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कृत्रिम हृदय लगाने के एक साल बाद धड़कने लगा बीमार दिल
Thu, 11 Jul 2019 05:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 11 Jul 2019 05:50 AM IST
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artificial heart
हृदय फेल होने के बाद कृत्रिम प्रत्यारोपण करने और करीब साल भर तक निरंतर उपचार के बाद वापस हृदय स्वस्थ होना किसी चमत्कार से कम नहीं, लेकिन दिल्ली के डॉक्टरों ने इस चमत्कार को यथार्थ का रूप दिया है। दावा है कि यह एक अनोखा केस है।
दिल्ली के बीएलके अस्पताल में करीब साल भर पहले इराक के 52 वर्षीय व्यापारी हनी जवाद मोहम्मद उपचार कराने आया था। यहां मेडिकल जांच में हनी जवाद का दिल कमजोर निकला और तमाम तरह की परेशानी सामने आईं।
इसके बाद डॉक्टरों ने तत्काल कृत्रिम हृदय प्रत्यारोपित करने का फैसला लिया। सर्जरी के बाद डॉक्टर करीब एक साल तक मरीज की निगरानी करते रहे। दवाओं और पर्याप्त निगरानी के बाद अचानक से डॉक्टरों को पता चला कि हनी जवाद का प्राकृतिक दिल ने रिकवरी की है।
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यह डॉक्टरों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। जांच में जवाद का दिल स्वस्थ मिला तो उन्होंने पहले प्रत्यारोपित किए गए कृत्रिम दिल को हटाने का फैसला लिया।
अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर अजय कौल की मानें तो असली दिल ने उनकी अपेक्षा से भी अच्छी तरह से काम करना शुरू कर दिया था। इसलिए उन्होंने कृत्रिम हृदय को हटा दिया और अब जवाद का अपना स्वाभाविक हृदय बिना किसी सहारे के सामान्य रूप से फिर से धड़कने लगा है।
डॉ. अजय कौल ने बताया कि साल भर बाद जब उन्होंने जांच में मरीज के प्राकृतिक दिल को सही कार्यशैली में पाया तो वे काफी आश्चर्य में पड़ गए। कृत्रिम प्रत्यारोपण के कामकाज को धीमा करके उनके मूल हृदय के कामकाज की निगरानी की।
इस प्रक्रिया को दो महीने में 3-4 बार दोहराया और महसूस किया कि लगभग एक साल के आराम के बाद उनका दिल धीरे-धीरे ठीक होने लगा था। आमतौर पर ऐसी स्थिति में मूल हृदय 10-15फीसदी तक रिकवरी दिखा सकता है, लेकिन उनका दिल काफी बेहतर काम कर रहा था, जो एक चिकित्सा चमत्कार की तरह है।
आतंकवादियों की कैद में भी रह चुका है मरीज
बुधवार को अस्पताल में हुई प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान मरीज जवाद ने अपने जीवन से जुड़ी जानकारियां भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि वह आतंकवादियों की कैद में था, जहां से भागने में कामयाब रहा।
कई बार बंदूक की गोली से घायल होने के बाद भी वह कई सर्जरी और अंत में यहां कृत्रिम हृदय प्रत्यारोपण कराने से बच गया। उन्हें नहीं पता था कि आगे चलकर उन्हें वापस अपना दिल सही अवस्था में मिल जाएगा।
डॉ. कौल का कहना है कि जुलाई 2018 में मरीज का ऑपरेशन हुआ था। उस वक्त दिल कमजोर होने के पीछे सटीक कारण नहीं पता चला था । हो सकता है कि गोलियां लगने के बाद हुईं सर्जरी से भी इन्हें नुकसान पहुंचा हो।
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दिल्ली के बीएलके अस्पताल में करीब साल भर पहले इराक के 52 वर्षीय व्यापारी हनी जवाद मोहम्मद उपचार कराने आया था। यहां मेडिकल जांच में हनी जवाद का दिल कमजोर निकला और तमाम तरह की परेशानी सामने आईं।
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इसके बाद डॉक्टरों ने तत्काल कृत्रिम हृदय प्रत्यारोपित करने का फैसला लिया। सर्जरी के बाद डॉक्टर करीब एक साल तक मरीज की निगरानी करते रहे। दवाओं और पर्याप्त निगरानी के बाद अचानक से डॉक्टरों को पता चला कि हनी जवाद का प्राकृतिक दिल ने रिकवरी की है।
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यह डॉक्टरों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। जांच में जवाद का दिल स्वस्थ मिला तो उन्होंने पहले प्रत्यारोपित किए गए कृत्रिम दिल को हटाने का फैसला लिया।
अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टर अजय कौल की मानें तो असली दिल ने उनकी अपेक्षा से भी अच्छी तरह से काम करना शुरू कर दिया था। इसलिए उन्होंने कृत्रिम हृदय को हटा दिया और अब जवाद का अपना स्वाभाविक हृदय बिना किसी सहारे के सामान्य रूप से फिर से धड़कने लगा है।
डॉ. अजय कौल ने बताया कि साल भर बाद जब उन्होंने जांच में मरीज के प्राकृतिक दिल को सही कार्यशैली में पाया तो वे काफी आश्चर्य में पड़ गए। कृत्रिम प्रत्यारोपण के कामकाज को धीमा करके उनके मूल हृदय के कामकाज की निगरानी की।
इस प्रक्रिया को दो महीने में 3-4 बार दोहराया और महसूस किया कि लगभग एक साल के आराम के बाद उनका दिल धीरे-धीरे ठीक होने लगा था। आमतौर पर ऐसी स्थिति में मूल हृदय 10-15फीसदी तक रिकवरी दिखा सकता है, लेकिन उनका दिल काफी बेहतर काम कर रहा था, जो एक चिकित्सा चमत्कार की तरह है।
आतंकवादियों की कैद में भी रह चुका है मरीज
बुधवार को अस्पताल में हुई प्रेस कान्फ्रेंस के दौरान मरीज जवाद ने अपने जीवन से जुड़ी जानकारियां भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि वह आतंकवादियों की कैद में था, जहां से भागने में कामयाब रहा।
कई बार बंदूक की गोली से घायल होने के बाद भी वह कई सर्जरी और अंत में यहां कृत्रिम हृदय प्रत्यारोपण कराने से बच गया। उन्हें नहीं पता था कि आगे चलकर उन्हें वापस अपना दिल सही अवस्था में मिल जाएगा।
डॉ. कौल का कहना है कि जुलाई 2018 में मरीज का ऑपरेशन हुआ था। उस वक्त दिल कमजोर होने के पीछे सटीक कारण नहीं पता चला था । हो सकता है कि गोलियां लगने के बाद हुईं सर्जरी से भी इन्हें नुकसान पहुंचा हो।