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छोटे-छोटी बातें बन रही हैं तलाक का कारण

Wed, 01 Mar 2017 01:20 AM IST
अमर उजाला, गुरुग्राम
अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Wed, 01 Mar 2017 01:20 AM IST
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a samll thing is big reason in talak
demo pic - फोटो : अमर उजाला
इस्लाम धर्म में तलाक को भले ही जायज करार दिया गया है लेकिन जिन सूरतों में तलाक देना जायज होना चाहिये उनमें से एक बात भी सामने नहीं आ रही है। मेवात में जितनी भी तलाक  दी गई हैं उनमें से अधिकतर इस्लाम के उसूलों के खिलाफ हैं। मेवात में  तलाक के ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। जिनमें छोटी-छोटी बातों पर तलाक दिया गया है।
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मेवात इलाके में अब तक तलाक के जो मामले समाने आये हैं उनमें बीबी के मायके रूठ कर चला जाना, किसी काम को करने से मना कर देता, दहेज कम देना या फिर शराबी पति को शराब पीने से मना करना शामिल हैं। दो दिन पहले ही पिनगवां कस्बे में एक पति ने अपनी बीवी को इसी बात पर तलाक दे दी थी कि उसने पति को जुआ सट्टा खेलने और शराब पीने से मना किया था।
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जानकारी के अनुसार मलाई गांव में मायके रूठ कर चले जाने पर एक महिला को उसके पति ने फोन पर तलाक दे दिया। महिला के दो बच्चे हैं। बाद में बिरादरी की पंचायत ने 25 लाख रूपये में फैसला कराया। नगीना खंड के गांव अटेरना-शमशादबाद में दंपति में किसी बात को लेकर मामूली कहासुनी हुई और एक बच्चे की मां अपने मायके चली गई करीब दस महीने बाद जब बीवी वापस ससुराल नहीं लौटी तो पति ने मोबाइल पर तीन तलाक लिखकर अपने ससुर को भेज दिया।
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बाद में दोनों पक्षों की पंचायत हुई और मामला 11 लाख में में सुलझा। इसी तरह पुन्हाना खंड के गांव पिपरौली में दहेज कम देने की वजह से एक विवाहिता के साथ ससुराल वालों ने पिटाई की और बाद में तलाक देकर छोड़ दिया। वहीं हाल ही में फिरोजपुर झिरका खंड के गांव कुलढेहरा में एक आदमी ने पांच बच्चों की मां अपनी पत्नी को रात के समय किसी गैरमर्द के साथ देख लिया और उसने भी अपनी पत्नी को तीन तलाक देकर छोड़ दिया।

दो दिन पहले पुन्हाना खंड के कस्बा पिनगवां में एक महिला को अपने पति से शराब पीने और जुआ-सट्टा ना खेलने की नसीहत देना भारी पड़ गया और पति ने नशे कि हालत में तीन तलाक लेकर हमेशा के लिये अपने से जुदा कर दिया। 


तलाक  के मसले पर क्या कहते हैं उलमा
मेवात के मुफ्ती जाहिद हुसैन का कहना है कि जिन लोगों को इस्लाम के नियमों की जानकारी नहीं है वे ही तलाक देते हैं। खासतौर से 20 से 30 साल के युवा जिनमें 99 फीसदी वे युवक शामिल हैं जो शराब, जुआ सट्टा आदि गलत कार्यों में शामिल होते हैं। इस्लाम धर्म की हलाल चीजों में से अल्लाह को तलाक सबसे ज्यादा नापसंद हैं। अगर मियां-बीबी का आपस में रहना असंभव है तब भी एक दम तलाक नहीं देना चाहिए बल्कि पहले मियां अपनी बीबी को समझाए, ना माने तो बीबी से अपना बिस्तर दूर रखे, फिर भी ना माने तो दोनो पक्षों के लोग मियां-बीबी में सुलह कराने की कोशिश करें। अगर फिर भी बात ना बने तो मियां अपनी बीबी को हिदायत के तौर पर पहले एक तलाक दे अगर औरत ना समझे तो दूसरी तलाक दे इसके बाद बीबी फिर भी ना समझे तो तीसरी तलाक देकर एक दूसरे से हमेशा अलग हो सकते हैं। 
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