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हिरासत में मौत का मामलाः उत्तर प्रदेश के 5 पुलिसकर्मियों को 10 साल की जेल, 25 लाख जुर्माना
Wed, 20 Mar 2019 04:55 PM IST
शाहरुख खान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 20 Mar 2019 04:55 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
दिल्ली की एक अदालत ने हिरासत में हुई मौत के मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के पांच कर्मियों को 10 साल की जेल की सजा सुनाई है। इसी मामले में अदालत ने एक अन्य को 3 साल की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी ठहराए गए सभी पुलिसकर्मियों पर कुल 25 लाख का जुर्माना भी लगाया है जबकि छठे दोषी पर एक लाख का जुर्माना किया है।
आपको बता दें कि वर्ष 2006 में खुर्जा निवासी प्रॉपर्टी डीलर को साजिश के तहत एसओजी की टीम ने गिरफ्तार किया था और झूठे मुकदमे में फंसाकर हवालात में जमकर मारपीट की थी।
इस दौरान निठारी चौकी की हवालात में सोनू की मौत हो गई थी। इसके बाद सोनू के पिता मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। सोमवार को तीस हजारी कोर्ट ने सब इंस्पेक्टर हिंदवीर सिंह, महेश मिश्रा और सिपाही प्रदीप, पुष्पेंद्र व हरिपाल को दोषी करार दिया। दरअसल, वर्ष 2006 में यह घटना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी थी।
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उस समय पुलिस की स्पेशल टीम होती थी जिसे एसओजी के नाम से जाना जाता था। यह टीम बड़ी घटनाओं व संगठित अपराध पर काम करती थी, लेकिन उस वक्त एसओजी टीम पर आरोप लगने लगा था कि टीम सुपारी किलर हो गई है। किसी को भी फर्जी मुकदमे में फंसाना और वसूली करना उसका पेशा बन गया था।
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आपको बता दें कि वर्ष 2006 में खुर्जा निवासी प्रॉपर्टी डीलर को साजिश के तहत एसओजी की टीम ने गिरफ्तार किया था और झूठे मुकदमे में फंसाकर हवालात में जमकर मारपीट की थी।
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इस दौरान निठारी चौकी की हवालात में सोनू की मौत हो गई थी। इसके बाद सोनू के पिता मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले गए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस मामले की दिल्ली के तीस हजारी कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। सोमवार को तीस हजारी कोर्ट ने सब इंस्पेक्टर हिंदवीर सिंह, महेश मिश्रा और सिपाही प्रदीप, पुष्पेंद्र व हरिपाल को दोषी करार दिया। दरअसल, वर्ष 2006 में यह घटना पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी थी।
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उस समय पुलिस की स्पेशल टीम होती थी जिसे एसओजी के नाम से जाना जाता था। यह टीम बड़ी घटनाओं व संगठित अपराध पर काम करती थी, लेकिन उस वक्त एसओजी टीम पर आरोप लगने लगा था कि टीम सुपारी किलर हो गई है। किसी को भी फर्जी मुकदमे में फंसाना और वसूली करना उसका पेशा बन गया था।
सोनू हत्याकांड एसओजी पर लगने वाला उस वक्त का सबसे बड़ा धब्बा था। मूलरूप से खुर्जा निवासी सोनू नोएडा के निठारी में रहकर प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करता था। नोएडा निवासी प्रॉपर्टी डीलर कुंवर पाल से उसकी अनबन हो गई थी। इसके बाद वह सोनू को प्रॉपर्टी दिखाने के नाम पर साथ ले गया था। कुंवर पाल की एसओजी के एसआई व सिपाहियों से पहले से सेटिंग थी।
उसने झूठे मामले में फंसाकर सोनू को पकड़वा दिया था। इसके बाद एसओजी की टीम सोनू को निठारी चौकी ले आई यहां उसे जमकर पीटा गया था जिससे उसकी मौत हो गई थी, लेकिन अगले दिन पुलिस बता रही थी कि सोनू ने आत्महत्या की है। जांच की गई तो कई तथ्यों का खुलासा हुआ था।
उसने झूठे मामले में फंसाकर सोनू को पकड़वा दिया था। इसके बाद एसओजी की टीम सोनू को निठारी चौकी ले आई यहां उसे जमकर पीटा गया था जिससे उसकी मौत हो गई थी, लेकिन अगले दिन पुलिस बता रही थी कि सोनू ने आत्महत्या की है। जांच की गई तो कई तथ्यों का खुलासा हुआ था।