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मेट्रो में महिलाएं कर रही ऐसा क्राइम, उड़ जाएंगे होश!

Sat, 04 Jul 2015 05:57 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 04 Jul 2015 05:57 PM IST
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95 percent of women caught in Metro pickpocket.

दिल्ली मेट्रो में यात्रा के दौरान अगर आपकी जेब कट जाती है या आपका पॉकेट मार लिया जाता है तो काफी हद तक संभावना है कि आपकी जेब कतरने वाला कोई लड़का नहीं बल्कि लड़की होगी।

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क्योंकि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल CISF के आंकड़े कुछ ऐसी ही कहानी बंया कर रहे हैं। सीआईएसएफ के आंकड़ों की मानें तो जेब कतरों में 95 फीसदी महिलाएं शामिल हैं।
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सीआईएसएफ के आंकड़े बताते हैं कि जनवरी से मई के बीच 149 जेबकतरे गिरफ्तार गिरफ्तार किए गए, जिनमें 142 महिलाएं और केवल 7 पुरूष शामिल हैं।

महिला पॉकेटमार के बने हैं ग्रुप

95 percent of women caught in Metro pickpocket.

मेट्रो में महिला पॉकेटमार से निपटने वाले सीआईएसएफ के अधिकारी के मुताबिक इन महिलाओं को देखकर आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते कि ये ऐसा करेंगी।

एक अधिकारी ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर बताया कि महिला पॉकेटमार के कई ऐसे ग्रुप हैं जो मेट्रो में यात्रा करते हैं। वे एक स्टेशन से चढ़ती हैं और तीसरे-चौथे स्टेशन पर उतर जाती हैं।

इस प्रक्रिया को वे तब तक दोहराती हैं जब तक कि किसी को अपना शिकार नहीं बना लेतीं। मेट्रो में महिला जेबकतरों के साथ निपटने वाले सीआईएसएफ के अधिकारी ने कहा कि उन्हें देखकर कोई उनकी मंशा को भांप भी नहीं सकता।

आप कैसे पहचानेंगे इन्हें?

95 percent of women caught in Metro pickpocket.

एक अधिकारी ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर कहा, 'महिला जेबकतरों के कई ऐसे समूह हैं जो मेट्रो पर यात्रा करते हैं। वे ट्रेन में एक स्टेशन से चढ़ती हैं और तीसरे या चौथे स्टेशन पर उतर जातीं हैं।

वे इसे तब तक दोहराती रहती हैं, जब तक कि वे किसी को अपना शिकार नहीं बना लेतीं। इन महिला पॉकेटमार की उम्र 18 से 40 साल के बीच होती हैं और कोई इन्हें देखकर कोई सोच भी नहीं सकता कि इनकी नजर आपकी जेब पर है।

CISF के प्रवक्ता हेमेंद्र सिंह ने कहा कि उनकी छापा मारने वाली टीम ने जनवरी से मई के बीच 32 बार अचानक जांच की और 149 पॉकेटमार को गिरफ्तार किया।

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रंगे हाथ पकड़े जाते हैं जेबकतरे

95 percent of women caught in Metro pickpocket.

आंकड़ों के मुताबिक साल 2014 में 71 बार छापेमारी हुई, जिसमें 354 पॉकेटमार को गिरफ्तार किया गया था। वहीं साल 2013 में 466 पॉकेटमार गिरफ्तार किए गए थे।

सीआईएसएफ प्रवक्ता ने कहा कि वे पॉकेटमार को रंगे हाथों या यात्री की शिकायत पर गिरफ्तार करते हैं। इसके बाद उन्हें मेट्रो पुलिस को सौंप दिया जाता है।

सीआईएसएफ के पास कुछ पॉकेटमार की एक सूची रहती है। जो संस्था को दिल्ली पुलिस से मिलती है। इसके आधार पर ही सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद वे पॉकेटमार को तलाशते हैं।

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