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रिपोर्ट लिखाने के लिए 23 दिन तक काटे थाने के चक्कर, मैसेज वायरल होने के बाद मामला दर्ज
ब्यूरो, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
Updated Wed, 25 Jul 2018 08:58 PM IST
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खाते से पैसे निकाले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए रिटायर्ड जिला सूचना अधिकारी ग्रेटर नोएडा कोतवाली और साइबर सेल के बीच 23 दिन तक चक्कर लगाते रहे। लेकिन उसकी एक नहीं सुनी गई। बुधवार को सोशल मीडिया में एफआइआर दर्ज न होने का मैसेज वायरल होने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया।
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जिला सूचना अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त आनंद चौधरी ग्रेटर नोएडा के ओमीक्रॉन-1ए सेक्टर में रहते हैं। एक जुलाई की रात 11:55 से 12:10 के बीच उनके स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के खाते से ठगों ने 80 हजार रुपये निकाल लिए। 02 जुलाई की सुबह मोबाइल में मैसेज देखकर उन्हें इसका पता चला।
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उसी दिन रिपोर्ट दर्ज कराने वह ग्रेटर नोएडा कोतवाली पहुंचे। आरोप है कि थाना प्रभारी ने धर्मेंद्र शर्मा ने शिकायत दर्ज न कर उन्हें साइबर सेल भेज दिया। साइबर सेल ने जांच कर बताया कि दिल्ली के बदरपुर में उनके खाते से रुपये निकाले गए हैं। आनंद का खाता एसबीआई कविनगर गाजियाबाद में है।
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देरी से रिपार्ट दर्ज होने पर कट सकते हैं 20 हजार रुपये
उधर बैंक ने बिना एफआइआर रुपये वापस करने से मना कर दिया। आरोप है कि कई बार ग्रेटर नोएडा कोतवाली चक्कर काटने के बाद थाना प्रभारी ने उनसे कहा कि रुपये दिल्ली में निकले हैं तो मामला वहां दर्ज कराओ या खाता गाजियाबाद का है तो वहां दर्ज कराओ। यहां इसकी एफआईआर दर्ज नहीं होगी।
इस दौरान वह क्षेत्राधिकारी के पास भी गए पर उनकी सुनवाई नहीं हुई। बुधवार को व्हाट्स एप पर पीड़ित की एफआइआर दर्ज न होने का मैसेज वायरल होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने तत्काल मामला दर्ज करने के आदेश दिए, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।
देरी से रिपार्ट दर्ज होने पर कट सकते हैं 20 हजार रुपये
रिटायर्ड अधिकारी ने जुलाई 2017 में आरबीआई ने एक सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि खाते से रुपये निकालने के मामले में अंतिम जिम्मेदारी बैंक की होगी। यदि घटना होने के सात दिन में पीड़ित मामले की एफआइआर दर्ज नहीं कराता है तो उसके 10 हजार रुपये कट जाएंगे। 15 दिन के बाद 20 हजार रुपये कट सकते हैं।
पीड़ित की शिकायत के बाद जांच कर मामला दर्ज कर लिया गया है। मामला दर्ज करने में देरी के कारणों की जांच की जाएगी।- आशीष श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण।
इस दौरान वह क्षेत्राधिकारी के पास भी गए पर उनकी सुनवाई नहीं हुई। बुधवार को व्हाट्स एप पर पीड़ित की एफआइआर दर्ज न होने का मैसेज वायरल होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने तत्काल मामला दर्ज करने के आदेश दिए, जिसके बाद पुलिस ने मामला दर्ज किया।
देरी से रिपार्ट दर्ज होने पर कट सकते हैं 20 हजार रुपये
रिटायर्ड अधिकारी ने जुलाई 2017 में आरबीआई ने एक सर्कुलर का हवाला देते हुए कहा कि खाते से रुपये निकालने के मामले में अंतिम जिम्मेदारी बैंक की होगी। यदि घटना होने के सात दिन में पीड़ित मामले की एफआइआर दर्ज नहीं कराता है तो उसके 10 हजार रुपये कट जाएंगे। 15 दिन के बाद 20 हजार रुपये कट सकते हैं।
पीड़ित की शिकायत के बाद जांच कर मामला दर्ज कर लिया गया है। मामला दर्ज करने में देरी के कारणों की जांच की जाएगी।- आशीष श्रीवास्तव, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण।