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Delhi: दिल्ली सरकार के पास विधानसभा में पेश करने के लिए 8 कैग रिपोर्ट लंबित, CAG ने हाईकोर्ट को दी ये जानकारी

Sun, 01 Dec 2024 08:17 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 01 Dec 2024 08:17 PM IST
सार

सीएजी और महालेखाकार (लेखा परीक्षा) द्वारा दायर एक संक्षिप्त उत्तर में कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से संबंधित भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की आठ रिपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम 1991 की धारा 48 के प्रावधानों के अनुसार विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के पास लंबित है।

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8 CAG reports pending with Delhi govt for laying before Assembly, HC told
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने उच्च न्यायालय को बताया है कि दिल्ली से संबंधित आठ रिपोर्ट जीएनसीटीडी अधिनियम के अनुसार विधानसभा में प्रस्तुत करने के लिए दिल्ली सरकार के पास लंबित हैं। कैग ने कहा, कानूनी ढांचे के अनुसार, दिल्ली सरकार को अपने द्वारा प्रस्तुत ऑडिट रिपोर्ट विधानसभा के समक्ष रखनी होती है। उसने पूर्व में प्रमुख सचिव (वित्त) को पत्र लिखकर उनसे ऐसा करने का अनुरोध किया था।

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प्राधिकरण ने यह दलील शहर के विपक्षी नेताओं द्वारा दायर याचिका के जवाब में दी। इसमें शराब शुल्क, प्रदूषण और वित्त से संबंधित सीएजी रिपोर्ट विधानसभा के समक्ष रखने का निर्देश देने की मांग की गई थी। सीएजी और महालेखाकार (लेखा परीक्षा) द्वारा दायर एक संक्षिप्त उत्तर में कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली से संबंधित भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की आठ रिपोर्ट राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम 1991 की धारा 48 के प्रावधानों के अनुसार विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के पास लंबित है।

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उत्तर देने वाले प्रतिवादी ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 151(2) के साथ पठित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार अधिनियम, 1991 की धारा 48 और विनियमों के अनुसार, जीएनसीटीडी को भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा जीएनसीटीडी के खातों पर प्रस्तुत लेखापरीक्षा रिपोर्टों को दिल्ली विधानसभा में रखने का निर्देश दिया गया है। जवाब में बताया गया कि 2022 से 2024 तक की रिपोर्ट वित्त लेखा परीक्षा, वायु प्रदूषण, "राजस्व, आर्थिक, सामाजिक और सामान्य क्षेत्र और सार्वजनिक उपक्रमों", देखभाल और संरक्षण की जरूरत वाले बच्चों, शराब और सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित हैं।

उत्तर में कहा गया है कि 19 सितंबर 2024 के पत्र के माध्यम से सीएजी की रिपोर्ट संख्या 3/2024 को प्रधान सचिव (वित्त) को अग्रेषित करते समय दिल्ली लेखा परीक्षा कार्यालय ने उन्हें राज्य की विधानसभा के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए दिल्ली सरकार के पास लंबित सीएजी की सात रिपोर्ट के बारे में भी याद दिलाया। दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक मोहन सिंह बिष्ट, ओम प्रकाश शर्मा, अजय कुमार महावर, अभय वर्मा, अनिल कुमार बाजपेयी और जितेंद्र महाजन द्वारा दायर याचिका सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

उच्च न्यायालय ने 29 अक्तूबर को दिल्ली सरकार, विधानसभा अध्यक्ष कार्यालय, उपराज्यपाल (एलजी), सीएजी और दिल्ली के महालेखाकार (लेखा परीक्षा) को नोटिस जारी कर याचिका पर जवाब मांगा था। याचिका में दावा किया गया है कि 2017-2018 से 2021-2022 तक की 12 सीएजी रिपोर्ट मुख्यमंत्री आतिशी के पास लंबित हैं, जिनके पास वित्त विभाग भी है। याचिका में आगे आरोप लगाया गया है कि एलजी के बार-बार अनुरोध के बावजूद, ये रिपोर्ट विधानसभा में पेश करने के लिए उनके पास नहीं भेजी गई हैं।

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