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पढ़िए, यूपीएससी रिजल्ट की 5 अनोखी कहानियां

Fri, 13 Jun 2014 08:39 AM IST
Updated Fri, 13 Jun 2014 08:39 AM IST
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5 special story of UPSC result

उत्तराखंड के टनकपुर निवासी अरुण कुमार विश्वकर्मा को अपनी प्रतिभा के बल पर 2010 में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन की नौकरी मिली। लेकिन, उन पर तो आईएएस बनने का धुन सवार था। इसलिए नौकरी न करके तैयारी शुरू की। वर्ष 2011 में आईआरएस बने।

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विश्वकर्मा ने बताया कि उनकी प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्रों का विकास करने की है। क्योंकि वह खुद भी ऐसे क्षेत्र से आते हैं। उनके पिता उत्तराखंड में बीडीओ और माता सरकारी स्कूल की अध्यापिका हैं। इसी प्रकार 204वीं रैंक हासिल करने वाले वैशाली, बिहार के प्रभात कुमार आईपीएस बनना चाहते हैं।
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उनकी प्राथमिकता भ्रष्टाचार और अपराध खत्म करने की है। जबकि, पंजाब के दूरी नामक जगह के रहने वाले डॉ. मोहित कुमार गर्ग और अच्छी रैंक के लिए दोबारा परीक्षा देने की इच्छा रखते हैं। हालांकि 228वीं रैंक के साथ उनका आईपीएस बनना तय माना जा रहा है।

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दूसरे प्रयास में पाया दूसरा स्थान

5 special story of UPSC result

दूसरा प्रयास और दूसरा स्थान। दिल्ली के मुनीश शर्मा ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के नतीजों में अपने दूसरे ही प्रयास में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

वेंकटेश्वर कॉलेज से बैचलर ऑफ साइंस (बायोकेमिस्ट्री) से पढ़ाई की है। अपनी कामयाबी से खुश मुनीश अपनी सफलता में अपने परिवार और शिक्षकों का बड़ा योगदान मानते हैं।

'भ्रूण हत्या को जड़ से खत्म करूंगी'

5 special story of UPSC result

आईएएस की परीक्षा में 19 वीं रैंक हासिल करने वाली कोमल मित्तल हरियाणा में महिलाओं की शिक्षा की दुर्दशा देखकर हैरान हो जाती हैं। उनके अनुसार अगर उन्हें मौका मिला तो भ्रूण हत्या जैसी कुरीति को जड़ से खत्म करेंगी।

मूलरूप से हरियाणा के सोनीपत निवासी कोमल ने बताया कि वर्ष 2012 में उन्होंने आईआरएस की परीक्षा 125वीं रैंक के साथ उत्तीर्ण की थी। उनके अनुसार अब उन्हें महिलाओं की शिक्षा को लेकर काफी काम करना है। उन्होंने महिला सुरक्षा को लेकर की जा रही खानापूर्ति पर चिंता जताई।

उन्होंने कहा कि हरियाणा में लोग आज बेटी को वह स्थान नहीं दे पा रहे हैं जो लड़कों को हासिल है। ऐसे में अगर प्रदेश में जिम्मेदारी मिली तो इस विषमता को खत्म करने का प्रयास करूंगी।

सुमित ने नहीं मानी हार

5 special story of UPSC result

फरीदाबाद के एनएच तीन में रहने वाले 27 वर्षीय सुमित भाटिया ने आईएएस की परीक्षा में 561वीं रैंक हासिल की है। पिछली बार उन्हें असफलता मिली थी लेकिन वे विचलित नहीं हुए। खूब मेहनत की और दूसरे प्रयास में ही शहर का मान बढ़ाया। परिणाम देखने के बाद उनके परिवार के सभी सदस्य खुशी से झूम उठे।

सुमित के पिता विनोद भाटिया बिजनेसमैन हैं। वहीं माता ललिता गृहिणी। सुमित ने बताया कि उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के शहीद सुखदेव स्कूल ऑफ बिजनेस से ग्रेजुएशन करने के बाद एक निजी कंपनी में काम किया। फिर पिता के फर्म चारू क्रिएशन से जुड़े। फिर एमबीए करने मुंबई चले गए।

वहां एक दोस्त के पिता आईआरएस थे। उन्हीं को देखकर सिविल सर्विस में आने का प्लान बना। फिर राजेंद्र नगर दिल्ली में कमरा लेकर मेहनत शुरू की और दूसरी बार में सफलता हाथ लगी। सुमित ने बताया कि परीक्षा की तैयारी के दौरान वह खुद को कमरे में कैद कर लेते थे। नियमित तौर पर रोजाना आठ घंटे पढ़ाई की।

काबिल पिता की काबिल बिटिया

5 special story of UPSC result

आईएएस की परीक्षा में 48वीं रैंक हासिल करने वाली दिव्या एस. अय्यर शुरू से ही टॉपर रही हैं। उनकी इच्छा स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने की है। इसलिए पहले एमबीबीएस की पढ़ाई कर डॉक्टर बनीं और फिर सिविल सर्विसेज में हाथ आजमाया। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में अय्यर ने बताया कि 2012 में वह आईआरएस बन गईं।

लेकिन सपना तो आईएएस बनने का था, जो अब पूरा हो गया। कैंसर, हेपेटाइटिस बी, हाइपर टेंशन जैसी कई बीमारियों को जड़ से खत्म करने की इच्छा है।

मूल रूप से केरल निवासी दिव्या ने बताया कि 10वीं, 12वीं कक्षा में वह राज्य की टॉपर रही हैं। एमबीबीएस की परीक्षा में भी उन्होंने इसी इतिहास को दोहराया। उनके पिता सेसा अय्यर अंतरिक्ष वैज्ञानिक हैं। जबकि माता बैंक अधिकारी।

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