जश्न मनाने निकलीं छात्राएं, रास्ते में टकराई मौत
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यमुना एक्सप्रेसवे पर बुधवार रात हादसे में कार सवार तीन छात्राओं की मौत हो गई जबकि डीयू की छात्रा समेत दो घायल हो गए। हादसे के बाद कार चला रहा दोस्त भाग गया।
एसपी देहात डॉ. बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि राधापुरम स्टेट, मथुरा निवासी आयुषी अग्रवाल व कृष्णा कॉलोनी, मेरठ निवासी आकांक्षा यादव गलगोटिया संस्थान में एमबीए की छात्रा थीं। दोनों ग्रेनो के पीथ्री हॉस्टल में रहती थीं।
आकांक्षा की सहेली शिवानी चौधरी 29 दिसंबर से हॉस्टल में रुकी हुई थी। बुधवार रात आयुषी व आकांक्षा ने सेक्टर बीटा-2 निवासी डीयू की छात्रा लवन्या, डेल्टा-वन निवासी सुमित दास और एनआरआई सिटी निवासी शेखर को बुलाया।
सभी ने नए साल का जश्न मनाने का निर्णय लिया। सात बजे के बाद हॉस्टल में आने-जाने की पाबंदी है। ऐसे में घर जाने की बात कहकर आयुषी और आकांक्षा शेखर की वरना कार में निकल गईं।
नये साल का जश्न मानाने निकलीं थीं एमबीए की छात्राएं
सीओ ओपी त्रिपाठी ने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे पर जिस तरह से कार क्षतिग्रस्त हुई, उससे प्रतीत होता है कि हादसे के वक्त कार की रफ्तार करीब 140 किलोमीटर प्रतिघंटा रही होगी।
इसी वजह से कार डिवाइडर से टकराने के बाद दूसरी सड़क पर पलटा खाते हुए पहुंची और किनारे जाकर रुकी। गनीमत रही कि कार एक्सप्रेसवे से नीचे नहीं गिरी और न ही दूसरी सड़क पर एस वक्त कोई वाहन आया, जिससे कार सवार तीन लोगों की जान बच गई।
पार्टी के बाद सभी आगरा की ओर चल पड़े। रात करीब दो बजे जीरो प्वाइंट से साढे़ आठ किलोमीटर आगे पहुंची तो शेखर कार से नियंत्रण खो बैठा। कार डिवाइडर से टकराने के बाद सड़क की दूसरी ओर पलट गई।
हादसे में पीछे में बैठीं शिवानी, आयुषी, आकांक्षा की मौत हो गई। सूचना मिलने के बाद परिजन भी ग्रेनो पहुंच गए। आयुषी के पिता राजेश अग्रवाल कारोबारी और आकांक्षा के पिता विजयपाल सिंह यादव मेरठ न्याय विभाग में कार्यरत हैं। शिवानी के पिता बलजोत सिंह हिमाचल प्रदेश में कृषि विभाग में अधिकारी हैं।
साथ पढ़ी थीं, साथ चली गईं
आकांक्षा और शिवानी एक साथ मेरठ में पढ़ी थी। उनमें गहरी दोस्ती थी। स्कूलिंग के बाद से आकांक्षा कॉरपोरेट कंपनियों में काम करना चाहती थी, जबकि शिवानी एमकॉम करने के बाद सीए या फिर कोई अन्य नौकरी ज्वाइन करना चाहती थी और उसकी तैयारी कर रही थी।
परिजनों ने बताया कि दोनों की दोस्ती ऐसी थी कि शायद ही कोई दिन जाता हो, जब उनकी बात न होती थी। वे साथ में पढ़ीं और साथ ही चली गईं।
पुलिस के मुताबिक आकांक्षा और आयुषी बुधवार शाम सेमेस्टर एग्जाम देकर हॉस्टल लौटी थीं और घर जाने की बात कहकर वहां से दोस्तों के साथ नया साल मनाने के लिए निकल गईं।
आकांक्षा की एक सहेली ने बताया शाम करीब सात बजे उसकी आकांक्षा से बात हुई तो वह घर जाने की बात कह रही थी, लेकिन पता नहीं कि रात में कैसे उनका प्लान बदल गया।
छात्राओं की मौत के बाद गलगोटिया संस्थान और हॉस्टल में मातम सा छा गया। बृहस्पतिवार हॉस्टल में रहने वाली लड़कियों ने खाना तक नहीं खाया। उन्होंने बताया कि आकांक्षा और आयुषी काफी खुश रहती थीं और हर किसी की परेशानी को दूर करने का प्रयास करती थीं।