फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   10 reason of aap victory in delhi

10 हथियार जिससे दिल्ली फतह कर पाए केजरीवाल

Tue, 10 Feb 2015 03:07 PM IST
Updated Tue, 10 Feb 2015 03:07 PM IST
विज्ञापन
10 reason of aap victory in delhi

भारतीय राजनीति के इतिहास में दिल्ली चुनाव ऐसा अध्याय लिखने जा रहा है जिसमें महज तीन साल पुरानी पार्टी ने परंपरागत राजनीति की सभी सीमाओं को थोथ साबित कर दिया।

विज्ञापन


वैसे तो इस जीत के लिए पूरा क्रेडिट आम आदमी पार्टी, उनके संगठन और शानदार चुनावी रणनीति को जाता है। लेकिन साथ ही साथ कुछ ऐसी भी चीजें हैं जिन्होंने आप के पक्ष में लहर पैदा की।
विज्ञापन


आइए जानते हैं दस ऐसे तत्व जिसने दिल्ली के इतिहास में आम आदमी पार्टी की अप्रत्याशित जीत को संभव बनाया...

1 आप की रणनीति सबसे आगे: लोकसभा चुनाव में मिली निराशाजनक हार के बाद आम आदमी पार्टी ने अपनी नीतियों और रणनीति पर गंभीर चिंतन किया और तुरंत ही नई रणनीति बनाना शुरु कर दिया। यही कारण था कि जब चुनाव आयोग ने दिल्ली में चुनावों की घोषण की तक तक आम आदमी पार्टी अपने कैंपेन को चरम पर पहुंचा चुकी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

केजरीवाल ने मानी अपनी गलती

10 reason of aap victory in delhi

आपको यादा होगा कि चुनाव की घोषणा के बहुत पहले ही आम आदमी पार्टी ने दिल्ली डॉयलॉग के नाम से सोशल गेदरिंग करनी शुरु कर दी थी। लोगों के फिडबैक के साथ उनका घोषण पत्र सबसे पहले तैयार था और वह दिल्ली के लोगों की अपेक्षाओं के बेहद नजदीक भी था।

इस चुनाव में आम आदमी पार्टी के विरोधियों ने लगातार यह बताने की कोशिश करते रहे कि आम आदमी पार्टी ऐसा दल है जो अराजकता में विश्वास करती है ओर धरना प्रदर्शन की करती रहती है।

2 केजरीवाल ने मानी अपनी गलती: इस दौरान अरविंद केजरीवाल ने किसी तरह की जिद दिखाने या अपनी गलती छिपाने की बिलकुल भी कोशिश नहीं की। वह लोगों के बीच गए और माना कि 49 दिन बाद इस्तीफा देना उनकी बड़ी गलती थी। इस दौरान उन्होंने अपने खिलाफ उतारी गईं किरण बेदी के खिलाफ एक बार ‌भी नकारात्क प्रचार नहीं किया।

मफलर बनाम दस लाख का सूट

10 reason of aap victory in delhi

3 मफलर बनाम दस लाख का सूट: इसे भले ही अतिशयोक्ति माना जाए लेकिन उनकी जीत में उनके मफलर का भी योगदान रहा है। असल में अरविंद केजरीवाल का पहनावा हमेशा से ही बेहद साधारण रहा है।

उनका पहनावा और व्यवहार हमेशा ही उन्हें आम आदमी की तरह ही पेश करता रहा। ये उनके पहनावे का ही असर था कि ऐन चुनाव के पहले जहां उनका मफलर चर्चा में था वहीं ओबामा के साथ मोदी की वह तस्वीर चर्चा में थीं जिसे दस या पंद्रह लाख रुपये तक बताया गया।

4 अल्पसंख्यकों में लोकप्रिय रहे अरविंद केजरीवाल : हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मुसलमानों ने  आम आदमी पार्टी के पक्ष में वोट किया। हालांकि इस चुनाव के पहले से ही यह माना जाता रहा है कि अल्पसंख्यक वोट कांग्रेस के पाले में हैं और इनके बिखराव को फायदा आम आदमी पार्टी को मिलेगा।

कांग्रेस ने की गलती

10 reason of aap victory in delhi

5 कांग्रेस ने की गलती: आम आदमी पार्टी की इस जीत में कांग्रेस की गलती का भी कम योगदान नहीं हैं। लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद आम आदमी पार्टी ने अपनी जमीन खो ‌दी थी। इसके बावजूद कांग्रेस ने इस खाली जमीन को पाने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई और अंततः दिल्ली में उनका खाता तक नहीं खुल पाया। जहां कांग्रेस ने चुनाव ने रणनीति बनाने में बहुत देर कर दी वहीं दिल्ली में भाजपा ने भी चुनाव से पहले गंभीर गलती ‌की।

6 बीजेपी ने दिल्ली को हल्के में लिया: लोकसभा चुनाव से उत्साहित भारतीय जनता पार्टी ने इसके बाद हुए अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में भी सफलता हासिल कीं। इसका नतीजा यह हुआ कि बीजेपी ने दिल्ली को हल्के में लिया।  यह बीजेपी की लापरवाही का ही नतीजा है कि चुनाव के केवल 17 दिन पहले उसने किरण बेदी को अचानक सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया जबकि पार्टी के लोग ही उनसे खुश नहीं थे।

7 किरण बेदी का दांव पड़ा उलटा: आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेता और स्टार प्रचारक अरविंद केजरीवाल की बढ़ती लोकप्रियता पर लगाम लगाने के लिए बीजेपी ने किरण बेदी को उनके खिलाफ उतारा। शुरुआत में इसे बीजेपी का मास्टर स्ट्रोक माना गया लेकिन जल्द ही किरण बेदी राजनीतिक अनुभवहीनता लोगों के सामने आ गई और बीजेपी का यह मास्टर स्ट्रोक ही उनके खिलाफ साबित हो गया। इस फैसले की गलती का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खुद किरण बेदी भी अपनी सीट नहीं बचा पाईं।

किसी के पक्ष में नहीं हुआ वोटों का ध्रुवीकरण

10 reason of aap victory in delhi

8 किसी के पक्ष में नहीं हुआ वोटों का ध्रवीकरण: वोटो को ध्रुवीकरण की राजनीति की गणित दिल्ली के चुनावों में पूरी तरह धराशायी हो गई। आम आदमी पार्टी ने इस चुनाव में किसी जाति धर्म या संप्रदाय के लोगों को खुश करने की बजाए जनता से जुड़े मुद्दों को सबसे ऊपर रखा। यही कारण है कि इस चुनाव में बीजेपी को और किसी भी पार्टी की तुलना में न सिर्फ ज्यादा वोट मिले बल्कि इतनी सीटें मिलीं जिसकी उम्मीद किसी एग्जिट पोल में नहीं की गई थी।

9 मोदी बनाम केजरीवाल बना दिल्‍ली का चुनाव: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विकास पुरूष बनाकर हर चुनाव में पेश करने की बीजेपी की रणनीति दिल्ली में पूरी तरह खारिज कर दी गई। बीजेपी के न चाहते हुए भी यह चुनाव अरविंद केजरीवाल बनाम नरेंद्र मोदी के बीच मुकाबले में बदल गया।

10 केंद्र सरकार के खिलाफ पड़ा वोट: अंत में आम आदमी पार्टी के पक्ष में गए इस व्यापक जनादेश में एंटीइनकबेंसी को भी कारण माना जा सकता है  क्योंकि  पिछले आठ महीने से दिल्ली में बीजेपी के नेतृत्व में केंद्र सरकार काम कर रही है। महंगाई और अपराध पर लगाम न लगा पाने की वजह से सरकार के खिलाफ भी लोगों का गुस्सा था जिसने बीजेपी को नुकसान पहुंचाया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed