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बार-बार भूकंप के झटकों को देखते हुए दिल्ली-एनसीआर में बन रही हैं 10 वेधशालाएं
Wed, 17 Jun 2020 05:09 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 17 Jun 2020 05:09 AM IST
सार
- भूकंप की भविष्यवाणी संभव नहीं, लेकिन बड़े भूकंप से इंकार नहीं
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जरूरी है सावधानी...
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली-एनसीआर में 4 अप्रैल से 16 जून के बीच 11 बार धरती हिल चुकी है। वैज्ञानिक किसी बड़े भूकंप की आशंका को खारिज नहीं कर रहे हैं। ऐसे में नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के वैज्ञानिक संचालन जे एल गौतम के कहां भूंकप की कोई भविष्यवाणी नहीं की जा सकती लेकिन बड़ा भूकंप नहीं आएगा यह भी नहीं कहा जा सकता। इसलिए भूंकप से डरने की नहीं संभलने की जरूरत है।
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ऐसे में केंद्र ने दिल्ली समेत एनसीआर 10 और अस्थायी भूकंप वेधशालाए बनाने का फैसला किया है। इसमें तीन वेधशालाएं बन चुकी हैं। यंत्र उस जगह के आसपास लगाए जाएंगे जहां पिछले दिनों भूंकप का केंद्र रहा है। एनसीएस ने पहले ही दिल्ली और आसपास के क्षेत्र में भूंकप की संवेदनशीलता के चलते 300 किलोमीटर के दायरे में 25 यंत्र लगा रखे हैं।
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इसमें अकेले दिल्ली में ही सात भूकंप मापक यंत्र लगे हैं, लेकिन 4 अप्रैल के बाद से लगातार हिलती धरती को देख सेंटर ने फौरी तौर पर दस और मापकों को लगाने का फैसला किया है।
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देश में कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन के दौरान अकेले दिल्ली-एनसीआर में ही 4 अप्रैल से भूकंप के झटकों ने दहलाना शुरू कर दिया था। अब तक कुल 11 झटके लगे हैं। रविवार से गुजरात और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में लगातार चार बार भूकंप के झटके महसूस किए जा चुके हैं।
इसमें जम्मू-कश्मीर में रविवार को तीन बार 3.5 तीव्रता वाले फिर सोमवार और कल मंगलवार की सुबह भी झटके महसूस किए गए। गुजरात में भी रविवार को 5.5 तीव्रता वाले झटके कच्छ के इलाके में महसूस किए गए।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के विभिन्न केंद्रों से लेकर जियोलॉजी के कई संस्थान बड़े भूंकप की आशंका जता चुके हैं। आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि दिल्ली हरिद्वार टैक्टोनिक प्लेटों में दबाव की वजह से धरती हिल रही है।