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चारधाम यात्रा 2018: एक महीने बाद खुला यमुनोत्री हाईवे, लेकिन अभी भी जोखिमभरा

Thu, 23 Aug 2018 09:30 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बड़कोट (उत्तरकाशी)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बड़कोट (उत्तरकाशी) Updated Thu, 23 Aug 2018 09:30 AM IST
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Yamunotri highway opens after one month
अभी भी जोखिमभरा है हाईवे - फोटो : amar ujala

कुछ दिन से मौसम से मोहलत मिलने पर एनएच कर्मचारियों ने यमुनोत्री हाईवे पर ओजरी डबरकोट वाले हिस्से में मंगलवार को मलबा साफ कर यातायात चालू तो कर दिया है, लेकिन यहां दलदली सड़क और पहाड़ी से बोल्डर गिरने के खतरे के बीच जोखिमभरी आवाजाही हो रही है।

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बता दें कि बीते एक साल से यमुनोत्री हाईवे के लिए नासूर बने ओजरी डबरकोट स्लिप जोन का अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। इस साल यमुनोत्री धाम की यात्रा के दौरान यहां कई बार हाईवे अवरुद्ध हुआ।
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मानसून सीजन की बरसात इस हिस्से पर भारी पड़ी और बीते 21 जुलाई से यहां यातायात पूरी तरह ठप पड़ा था। इस दौरान तीर्थयात्री एवं स्थानीय लोगों को तिर्खली कुंसाला होते हुए पैदल रास्ते से जोखिम भरी आवाजाही करनी पड़ी। अब बीते कुछ दिन से बारिश का सिलसिला थमा होने पर एनएच के कर्मचारियों ने स्लिप जोन वाले हिस्से में जमा मलबा हटाकर मंगलवार को यातायात बहाल कर दिया।
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ओजरी डबरकोट वाले हिस्से में यातायात चालू होने पर लोगों ने राहत की सांस तो ली, लेकिन इस हिस्से में अब भी सड़क दलदली होने और पहाड़ी से बोल्डर गिरने का खतरा बरकरार रहने से लोगों को जोखिम उठाकर आवाजाही करनी पड़ रही है। फूलचट्टी, जंगलचट्टी और ओजरी डबरकोट वाले हिस्से में खस्ताहाल और बार-बार अवरुद्ध हो रही सड़क के रास्ते सुरक्षित यातायात के दावे बेमानी लग रहे हैं। इन हिस्सों में भारी वाहनों की आवाजाही लायक इंतजाम नहीं होने से गीठ बजरी क्षेत्र से आलू की फसलों को मंडियों तक पहुंचा पाना संभव नहीं लग रहा है।

ओजरी डबरकोट में मलबा साफ कर यातायात चालू करा दिया गया है। मौसम अनुकूल होने पर यहां सुरक्षित यातायात के इंतजाम किए जाएंगे। इस हिस्से के स्थायी ट्रीटमेंट के लिए राज्य और केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट स्वीकृत होते ही इस दिशा में कार्य शुरू किया जाएगा।

- नवनीत पांडे, ईई राजमार्ग निर्माण खंड बड़कोट

चमोली जिले में 22 सड़कें बंद
जिले में रुक-रुककर हो रही भारी बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों को यातायात से जोड़ने वाली 22 सड़कें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। ऐसे में ग्रामीणों को मीलों दूरी पैदल आवाजाही कर गंतव्य को जाना पड़ रहा है। ग्रामीण जरूरी खाद्य सामग्री अपनी पीठ पर लादकर ले जाने को मजबूर हैं। गोपेश्वर-बछेर-हापला सड़क जगह-जगह क्षतिग्रस्त है तो जोशीमठ के सलूड़ और डुंग्रा गांव को यातायात से जोड़ने वाली जोशीमठ-सलूड़-डुंग्रा सड़क दस दिनों से बंद पड़ी हैं। ऐसे में करीब सात किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर ग्रामीण जोशीमठ बाजार पहुंच रहे हैं। वहीं, बिरही-निजमूला-पगना सड़क बंद होने से पाणा, ईराणी, झींझी और पगना गांव के ग्रामीण जंगल के रास्ते आवाजाही कर रहे हैं। जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र नेगी ने निजमूला सड़क का निरीक्षण किया और मौके पर पहुंचे पीएमजीएसवाई के अधिकारियों को सड़कों की स्थिति के बारे में बताया।

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