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उत्तराखंड छात्रवृत्ति घोटालाः एसआईटी के सवालों का जवाब नहीं दे सकें अधिकारी

Sun, 10 Mar 2019 10:22 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून/हरिद्वार
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, देहरादून/हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 10 Mar 2019 10:22 AM IST
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uttarakhand scholership scam Social Welfare officials questioned by sit
प्रतीकात्मक तस्वीर

छात्रवृति घोटाले के मामले में दो सहायक समाज कल्याण अधिकारी और एक रिटायर्ड अधिकारी शनिवार को एसआईटी के सामने पेश हुए। घोटाले से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब न मिलने पर एसआईटी ने उन्हें अब 13 मार्च  को तलब किया है। उधर, नोडल अधिकारी आईटी सैल अनुराग शंखधर ने पेश होने के लिए एसआईटी से दस दिन का समय मांगा है।

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करोड़ों के छात्रवृति घोटाले की जांच कर रही एसआईटी अब तक हरिद्वार जिले के चार निजी शिक्षण संस्थानों के छह पदाधिकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। घोटाले को लेकर समाज कल्याण विभाग के अधिकारी भी एसआईटी की रडार पर है। एसआईटी ने इसी कड़ी में नोडल अधिकारी आईटी सैल और उप निदेशक जनजाति कल्याण अनुराग शंखधर, तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी हरिद्वार (सेवानिवृत) मुनीष त्यागी, सहायक समाज कल्याण अधिकारी खानपुर विनोद नैथानी और सहायक समाज कल्याण अधिकारी भगवानपुर सोमप्रकाश को नोटिस जारी कर शनिवार रोशनाबाद स्थित एसआईटी कार्यालय में बुलाया था।
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शनिवार को उप निदेशक को छोड़कर बाकी अधिकारी एसआईटी कार्यालय रोशनाबाद पहुंच गए। करीब आधा घंटे की बातचीत में अधिकारी एसआईटी को सही जवाब नहीं दे पाए। एसआईटी ने तीनों को फिर से दस्तावेजों के साथ 13 मार्च को पेश होने के लिए कहा है। उपनिदेशक जनजाति कल्याण अनुराग शंखधर ने एसआईटी को पत्र भेजकर दस दिन का वक्त पेश होने के लिए मांगा है। एसआईटी प्रभारी टीसी मंजूनाथ ने बताया कि इन अधिकारियाें को अब 13 मार्च को दस्तावेज लेकर आने को कहा गया है, ताकि विस्तृत तरीके से बातचीत की जा सके।
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हाईकोर्ट में 12 मार्च को होनी है सुनवाई
छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर 12 मार्च को नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। इससे पहले एसआईटी प्रभारी टीसी मंजूनाथ को अब तक हुई कार्रवाई के बारे में हाईकोर्ट में शपथ पत्र दाखिल करना है। छात्रवृत्ति घोटाले की सुनवाई पर हर किसी की निगाहें टिकी है।

वर्षों चल सकती है छात्रवृत्ति घोटाले में धरपकड़
कम आय वाले परिवारों के बच्चों की छात्रवृत्ति हड़पने वालों की धरपकड़ का सिलसिला लंबा खिंचने के आसार हैं। सूत्रों की मानें तो अभी यह शुरुआत भर है। एसआईटी का फिलहाल पिछले करीब छह साल के फर्जीवाड़े पर फोकस है। इसके तहत अभी कॉलेज संचालकों और समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों पर शिकंजा कसा जा रहा है। इसके बाद इस फर्जीवाड़े के लिए छात्र और कॉलेज संचालकों को जाल में फंसाने वाले बिचौलिए और फर्जी तरीके से छात्रवृत्ति हड़पने वाले छात्रों पर भी इसी तरह की कार्रवाई के संकेत मिले हैं।

इन दिनों में छात्रवृत्ति घोटाले में हो रहीं गिरफ्तारियां सुर्खियों में हैं। सरकारी धनराशि के गबन में सीधे कॉलेज संचालकों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है। इस फर्जीवाड़े में कॉलेज संचालकों से लेकर बिचौलियों, छात्रों और अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। पूरे मामले में जहां बिचौलियों ने कॉलेज संचालकों को जाल में फंसाया तो छात्रों को भी उनके खातों में छात्रवृत्ति पहुंचने का लालच दिया गया। इसके अलावा विभाग में अधिकारियों से सेटिंग गेटिंग का खेल भी चलता रहा। ऐसे में छात्रवृत्ति घोटाले की कड़ी में चार स्तर के लोगों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।


बताया जा रहा है कि फिलहाल एसआईटी कॉलेज संचालकों एवं विभागीय अधिकारियों के खिलाफ जांच और गिरफ्तारी की कार्रवाई में जुटी है। इसके बाद घोटाले में शामिल बिचौलियों और छात्रों पर शिकंजा कसेगा। सूत्रों की मानें तो 500 से अधिक छात्र भी एसआईटी की रडार पर हैं। ऐसे में बिचौलियों और सभी छात्रों की भूमिका जांचने और कार्रवाई में लंबा समय लग सकता है।

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