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उत्तराखंड : ओखलकांडा का लाल कुपवाड़ा में शहीद, सूचना मिलते ही शोक की लहर

Fri, 12 Jun 2020 10:37 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पतलोट (नैनीताल)
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पतलोट (नैनीताल) Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 12 Jun 2020 10:37 PM IST
सार

  • वर्तमान में हल्द्वानी के गोरापड़ाव में रहते हैं यमुना प्रसाद पनेरू

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Uttarakhand: Okhlakanda jawan martyred in Kupwara
martyr yamuna prasad paneru - फोटो : File Photo

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में तैनात गोरापड़ाव निवासी सूबेदार यमुना प्रसाद पनेरू बृहस्पतिवार सुबह पेट्रोलिंग के दौरान शहीद हो गए। वह कुपवाड़ा के गुरेज सेक्टर में तैनात थे। परिजनों के अनुसार शहीद यमुना प्रसाद का पार्थिव शरीर शनिवार को उनके गोरापड़ाव स्थित घर पहुंचने की संभावना है।

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मूलरूप से ओखलकांडा ब्लॉक के पदमपुर मीडार गांव निवासी यमुना प्रसाद पनेरू (39) पुत्र स्व. दयाकिशन पनेरु फरवरी 2002 में रानीखेत में कुमाऊं रेजिमेंट की छह कुमाऊं में भर्ती हुए थे। उन्होंने प्राइमरी शिक्षा मीडार से ली। इसके बाद 12वीं पास हरिद्वार से और एमएससी देहरादून से किया। सेना में भर्ती होने के बाद यमुना प्रसाद सेना के पर्वतारोही दल में शामिल हुए और 2012 में उन्होंने एवरेस्ट फतह किया। वह एवरेस्ट फतह करने वाले 6 कुमाऊं के पहले फौजी बने। 
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इसके बाद उन्हें पर्वतारोहण से इतना लगाव हुआ कि नंदादेवी और कंचनजंघा पर्वत भी उन्होंने फतह कर लिया। बताया गया कि वर्ष 2013-14 में वह सेना की ओर से भूटान भी गए थे। वहां से लौटने के बाद उन्होंने जेसीओ का कमीशन निकालने के साथ हवलदार से सूबेदार के पद पर नियुक्ति पाई। पिथौरागढ़ डाक विभाग में तैनात यमुना प्रसाद के बड़े भाई चंद्र प्रकाश ने बताया कि सेना के अधिकारियों ने उन्हें यमुना प्रसाद के पेट्रोलिंग के दौरान बृहस्पतिवार को शहीद होने की सूचना दी।

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2010 में हुई थी शहीद की शादी

शहीद के छोटे भाई भुवन चंद्र भी वन विभाग हल्द्वानी डिविजन में हैं। शहीद के परिवार में मां महेश्वरी देवी, पत्नी ममता, सात वर्षीय बेटा यश और पांच वर्षीय बेटी साक्षी हैं। भुवन चंद्र ने बताया कि यमुना प्रसाद की शादी 2010 में ममता से हुई। यमुना प्रसाद के शहीद होने के खबर सुनकर जहां पूरा गांव शोक में है, वहीं क्षेत्रवासी उनके परिवार को सांत्वना दे रहे हैं।

पर्वतारोहण स्कूल में इंस्ट्रक्टर भी रहे यमुना प्रसाद
शहीद यमुना प्रसाद के बड़े भाई चंद्र प्रकाश पनेरू ने बताया कि 6 कुमाऊं में सूबेदार के पद पर तैनात यमुना प्रसाद कुशल पर्वतारोही भी थे। वह एवरेस्ट फतह करने वाले 6 कुमाऊं के पहले फौजी बने। बताया कि यमुना, बंगाल के पर्वतारोहण स्कूल के इंस्ट्रक्टर भी रहे हैं। ये भी बताया कि यमुना प्रसाद अक्तूबर 2019 को हल्द्वानी से कश्मीर को लौटे थे। उन्हें अप्रैल में आना था लेकिन लॉकडाउन के कारण वह आ नहीं सके। 

पतलोट का डिग्री कॉलेज शहीद के नाम हो

पतलोट के डिग्री कॉलेज का नाम शहीद यमुना प्रसाद पनेरू के नाम करने की मांग जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने सीएम और उच्च शिक्षा मंत्री से की है। ताकि उनके पैतृक गांव ओखलकांडा में उनका नाम हमेशा अमर रहे। विधायक राम सिंह कैड़ा, ब्लाक प्रमुख कमलेश कैड़ा, मंडी समिति अध्यक्ष मनोज साह, मंडल अध्यक्ष आलम नगदली, ज्येष्ठ प्रमुख प्रदीप मटियाली, सुरेश जोशी, उमेश भट्ट, चंदन नयाल, डॉ. हेमंत जोशी, कमल पनेरू, छात्र संघ अध्यक्ष लक्ष्मण बिष्ट, कृष्णानंद कांडपाल, प्रधान डिकर मेवाड़ी आदि ने समर्थन किया है।

वहीं ग्राम प्रधान रोशन लाल ने बताया कि सूबेदार यमुना प्रसाद पनेरू के शहीद होने की खबर पर उनके पैतृक गांव पदमपुर मीडार में शोक की लहर छा गई और लोगों ने सोशल मीडिया में उनकी फोटो को पोस्ट कर श्रृद्धांजलि अर्पित की।

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