अमर उजाला एक्सक्लूसिव : एमएसएमई के सामने कई चुनौती, उत्तराखंड सरकार का सपोर्ट चाहिए
- पर्यटन, फूड प्रोसेसिंग, रबर प्लास्टिक, गारमेंट्स, पेपर इंडस्ट्री में सुधार की जरूरत
- सर्वे में एक हजार से अधिक उद्योगों से लिया गया फीडबैक
- नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर ने सरकार को सौंपी सर्वे रिपोर्ट
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उत्तराखंड में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्योग (एमएसएमई) को उत्पादन क्षमता बढ़ाने, उत्पादों की गुणवत्ता सुधार और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए काफी सुधार करने की जरूरत है। एमएसएमई के सामने कई तरह की चुनौतियां हैं। इसके लिए उन्हें सरकार का सपोर्ट चाहिए। प्रदेश में पहली बार किए एमएसएमई सर्वे में यह बात सामने आई है। नेेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर ने सर्वे रिपोर्ट सरकार को सौंपी दी है।
प्रदेश में लगभग 64 हजार एमएसएमई हैं। पहली बार नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के माध्यम से एमएसएमई का सर्वे किया गया है। इस सर्वे में एक हजार से अधिक उद्योग से फीडबैक लिया गया है। जिसमें आठ अलग-अलग सेक्टर के उद्योगों पर सर्वे किया गया। पर्यटन, फूड प्रोसेसिंग, रबर एंड प्लास्टिक, गारमेंट्स और पेपर इंडस्ट्री की रैकिंग निगेटिव रही है।
जबकि इलेक्ट्रिक विर्निर्माण उद्योग सर्वोच्च प्राथमिक क्षेत्र शामिल हैं। फार्मा उद्योग दूसरा और ऑटो इंडस्ट्री प्रदेश में तीसरा प्राथमिक क्षेत्र है। सर्वे रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में पर्यटन की काफी संभावनाएं है लेकिन प्रदेश उच्च आय वाले पर्यटकों को आकर्षिक नहीं कर पा रहा है। फूूड प्रोसेसिंग और गारमेंट्स उद्योग के उत्पादों की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से प्रतिस्पर्धी बनाने की आवश्यकता है।
प्रदेेश में एमएसएमई की दिक्कतों को दूर कर उन्हें किस तरह से बढ़ावा दिया जा सकता है। इसके लिए पहली बार सर्वे कराया गया था। सिंगापुर यूनिवर्सिटी की ओर से सर्वे रिपोर्ट सरकार को सौंप दी गई है। सरकार की ओर से एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव प्रयास किया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट के सुझाव पर सरकार की ओर से जो दिशानिर्देश मिलेंगे। उस पर काम किया जाएगा।
- सुधीर चंद्र नौटियाल, निदेशक उद्यो
सर्वे रिपोर्ट में सरकार को दिए गए सुझाव
-एमएसएमई क्षेत्र का डिजिटलाइजेशन बढ़ाया जाए
-मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इकॉनोमी डवलपमेंट बोर्ड का गठन
-उद्योगों के विकास के लिए उत्तराखंड बिजनेस एसोसिएशन का गठन
-राज्य में उद्यमिता विकास संस्थान की स्थापना
-इलेक्ट्रिकल विर्निर्माण क्षेत्र में पूंजी निवेश बढ़ाने और उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग व नीतियों में सुधार
-फार्मा सेक्टर में कारोबार के तरीके और ब्रॉडिंग में सुधार
-ऑटो सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए मार्केटिंग, मानव संसाधन विकास व लीडरशिप में सुधार।
सरकार से चाहिए उद्योगों को ये सहायता
-कारोबार के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना-28 प्रतिशत
-एमएसएमई उत्पादों की ब्रॉडिंग बढ़ाना-14 प्रतिशत
-बिजनेस की संभावनाओं को हाईलाइटिंग करना-10 प्रतिशत
-मार्केटिंग इंफॉरमेंशन को शेयर करना-11 प्रतिशत
-बिजनेस फाइनेंसिंग बढ़ाने के स्रोत-11 प्रतिशत
-कारोबार बढ़ाने को पाटर्नर का नेटवर्क बनाना-13 प्रतिशत
-बिजनेस के लिए मेंटरशिप की सुविधा-7.0 प्रतिशत
-बिजनेस आइडिया के लिए दिशानिर्देश-7.0 प्रतिशत
इन चुनौतियों का सामना कर रहे उद्योग
-उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए फंड की कमी-26 प्रतिशत
-नौकरशाही और सरकार स्तर पर सेवाओं में तेजी-18 प्रतिशत
-अवस्थापना विकास में कमी-13 प्रतिशत
-उद्योगों में दक्ष मानव श्रम की कमी-13 प्रतिशत
-किराया, श्रमिक व अन्य खर्चे बढ़ने से बिजनेस लागत में वृद्वि-12 प्रतिशत
-डिजिटल क्षमताओं में कमी-5.0 प्रतिशत
-विदेशों के लिए निर्यात का विस्तार करने में कठिनाईयां-7.0 प्रतिशत
-सरकार की ओर से दी जाने वाली प्रोत्साहन व ग्रांट में कमी-6.0 प्रतिशत