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उत्तराखंड: ...तो भगत के बिगड़े बोल से नड्डा भी हो गए थे असहज, डैमेज कंट्रोल के लिए मुख्यमंत्री को उतारा

Wed, 06 Jan 2021 09:34 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Wed, 06 Jan 2021 09:34 PM IST
सार

  • भगत को भी मांगनी पड़ी माफी, वीडियो जारी कर कहा, इंदिरा जी वरिष्ठ नेता, मैं हृदय की गहराइयों से खेद प्रकट करता हूं

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Uttarakhand news: Bjp National President jp nadda also Feel Uncomfort on Banshidhar bhagat
जेपी नड्डा - फोटो : Twitter@JPNadda

विस्तार

नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृदयेश पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत के बिगड़े बोल से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ.जेपी नड्डा भी असहज बताए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, भगत के बयान वाला वीडियो मंगलवार की रात ही राष्ट्रीय नेताओं के माध्यम से नड्डा के पास भी पहुंचा। नड्डा तुरंत एक्शन में आए और उन्होंने इस पूरे मामले को संभालने के लिए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को जिम्मेदारी सौंपी। मुख्यमंत्री ने देर रात ट्वीट कर नेता प्रतिपक्ष से माफी मांगकर इस मामले को काफी हद तक तक संभाल लिया। बुधवार सुबह से ही डैमेज कंट्रोल में जुटी भाजपा ने इस मामले में चुप्पी साधे रखी।

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दोपहर बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत का वीडियो संदेश जारी हुआ। इसमें उन्होंने नेता प्रतिपक्ष के प्रति कहे गए शब्दों के लिए खेद प्रकट किया और शब्दों को वापस लेने की बात कही। हालांकि वीडियो संदेश जारी करने से पहले उन्होंने ट्वीट भी किया। उन्होंने लिखा कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश जी प्रदेश की सम्मानित नेता हैं और चुनावी क्षेत्र एक होने के कारण नोकझोंक होना स्वाभाविक है। उन्हें व्यक्तिगत क्षति पहुंचाने का मेरा कोई इरादा नहीं था, अगर उन्हें क्षति पहुंची है तो मैं अपना बयान सम्मानपूर्वक वापस लेता हूं, लेकिन इसमें उन्होंने खेद प्रकट नहीं किया।
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इसके बाद भगत ने एक वीडियो संदेश जारी किया। इसमें उन्होंने कहा, कल भीमताल कार्यकर्ताओं के एक कार्यक्रम में मेरे द्वारा एक शब्द कहा गया। मुझे पता लगा है कि इससे हमारी नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश जी काफी आहत हुई हैं। लेकिन मैं बहुत स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि मैंने इस दृष्टि से उस बात को बिल्कुल नहीं कहा। इंदिरा हृदयेश जी हमारी वरिष्ठ हैं। नारियों का सम्मान करना मेरा ही नहीं, मेरी पार्टी का परम कर्तव्य है। मैंने सामान्य रूप से एक बात कही। इसका अगर उन्हें कोई कष्ट पहुंचा है तो निश्चित रूप से हृदय की गहराइयों से खेद प्रकट करते हुए अपने शब्दों को वापस लेता हूं।

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भगत के लिए इतनी ही सजा काफी : इंदिरा

नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृदयेश ने कहा कि इस मामले का भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने संज्ञान लिया। इससे बड़ी बात नहीं हो सकती है। प्रदेश और देश की महिलाएं आक्रोशित हैं। उनकी पार्टी भी नाराज है। बंशीधर भगत के लिए इतनी सजा काफी है। मैंने उन्हें माफी मांगने के लिए बिल्कुल नहीं कहा। वह अड़े रहें और उसके बाद भी अपने पद पर बने रहे हैं। इंदिरा ने कहा कि अब भगत आंख चुराना चाह रहे हैं।

भाजपा में शामिल होने की बात के सवाल पर इंदिरा ने कहा कि मेरे जैसे कांग्रेस के बड़े नेतृत्व को पार्टी में शामिल कराना इनके हाथ में नहीं है। वह जेपी नड्डा या मोदी जी ही करा सकते हैं। कभी मैंने कोई अर्जी नहीं दी। पार्टी में मेरी बड़ी प्रतिष्ठा है। प्रदेश कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष का सर्वोच्च पद मुझे प्राप्त है। इनकी पार्टी में मेरी क्या दिलचस्पी। न ही मेरी विचारधारा इनके साथ है, न मेरा तौरतरीका है। मेरी कोई रूचि नहीं है कि भगत ने माफी मांगी।

हरीश रावत ने कहा - थैंक्यू मुख्यमंत्री जी

आलोचना के बीच में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत की तारीफ पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत गाहे-बगाहे करते रहे हैं। बुधवार को एक बार फिर हरीश रावत ने सीएम त्रिवेंद्र रावत का धन्यवाद किया। 

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने हाल ही में नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के खिलाफ एक कार्यकर्ता सम्मेलन में टिप्पणी की थी। इस पर कांग्रेस ने नाराजगी जताई तो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने ट्वीट कर भगत की ओर से कांग्रेस से माफी मांगी। फेसबुक पेज पर पूर्व सीएम हरीश रावत ने लिखा कि भगत की टिप्पणी पर खेद जताकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सूझबूझ का परिचय दिया और अपनी पार्टी को आंशिक रूप से फजीहत से बचा लिया। इसी के साथ पूर्व सीएम ने यह भी लिखा कि नर्सिंग के बच्चों को राहत देना भी अच्छा लगा है। 

प्रदेश में नर्सिंग के 1200 पदों पर भर्ती होनी है। इसमें सरकार की ओर से 30 बेड के अस्पताल में एक साल के अनुभव की शर्त रखी थी। इस पर पूर्व सीएम ने एतराज जताया था और कहा था कि पूरे पहाड़ में कहीं भी 30 बेड का अस्पताल नहीं है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को इस शर्त को हटाने का एलान किया था। मुख्यमंत्री कोरोना के कारण एम्स दिल्ली में भर्ती थे और स्वस्थ होने पर मंगलवार से ही उन्होंने काम करना शुरू कर दिया था। 

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