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ईश्वर का घर हैं बुग्याल, इन्हें छह माह में राष्ट्रीय उद्यान घोषित करें: उत्तराखंड हाईकोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
Updated Wed, 22 Aug 2018 10:54 AM IST
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बुग्याल में चरतीं बकरियां
- फोटो : अमर उजाला
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हाईकोर्ट ने राज्य के सभी बुग्यालों तथा उच्च हिमालय क्षेत्र की घाटियों को ईश्वर के आवास की संज्ञा देते हुए छह माह के भीतर उन्हें राष्ट्रीय उद्यान घोषित करने के आदेश दिए हैं।
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कोर्ट ने तीन माह के अंदर बुग्यालों में बनाए गए स्थायी फाइबर हट्स को हटाने और बुग्यालों में रात में ठहरने पर भी रोक लगाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने इन बुग्यालों से औषधीय वनस्पति सीमित मात्रा में केवल सरकारी या पब्लिक सेक्टर संस्था से ही एकत्र कराने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने छह माह में इन बुग्यालों में पाए जाने वाले पादपों का हरबेरियम रिकॉर्ड तैयार करने के भी निर्देश दिए हैं।
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अल वेदनी बागजी बुग्याल संघर्ष समिति चमोली की जनहित याचिका पर कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ ने गुरु ग्रंथ साहब में लिखे हवा, पानी, धरती और आकाश को भगवान का घर और मंदिर कहे जाने का जिक्र किया। पीठ ने सरकार को प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण के लिए छह सप्ताह में इको डेवलपमेंट कमेटी बनाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि बुग्यालों में पर्यटकों की आवाजाही सीमित की जाए और 200 से अधिक पर्यटकों का यहां प्रवेश न होने दिया जाए।
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बुग्यालों के व्यावसायिक चारागाहों के रूप में इस्तेमाल पर रोक
खंडपीठ ने इन बुग्यालों का व्यावसायिक चारागाह के रूप में उपयोग करने पर भी रोक लगा दी है। इसके साथ ही स्थानीय चरवाहों को सीमित रूप में इससे छूट देते हुए कहा है कि वे एक ही स्थान के बजाय रोटेशन में पशुओं को यहां चराएं। सभी जिला अधिकारियों को छह सप्ताह में बुग्यालों से प्लास्टिक का कचरा, बोतलें आदि साफ करवाने और किसी भी तरह के अतिक्रमण पर सख्ती से रोक लगाने का आदेश भी अदालत ने जारी किया है।
रुप कुंड सहित अन्य स्थलों की ट्रेकिंग होगी प्रभावित
कोर्ट के इस आदेश से रूप कुंड सहित अन्य उच्च हिमालयी क्षेत्रों में होने वाली ट्रेकिंग प्रभावित हो सकती है। इन स्थानों से एक दिन में ही आवाजाही नहीं की जा सकती है। बुग्यालों में रात को रुकने के प्रतिबंध से रूप कुंड जाना भी संभव नहीं हो पाएगा। इस कुंड के ट्रेक के लिए बेदनी बुग्याल का पड़ाव है। इसी तरह से नंदा देवी राजजात में भी बुग्यालों में कई जगह पड़ाव हैं।