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ग्रुप हाउसिंग के लिए कृषि भूमि के भू उपयोग परिवर्तन पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक 

Wed, 27 Jun 2018 09:59 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल Updated Wed, 27 Jun 2018 09:59 PM IST
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uttarakhand high court decision on Land use change
highcourt nainital - फोटो : google

हाईकोर्ट ने प्रदेश में कृषि भूमि का ग्रुप हाउसिंग के लिए भू उपयोग परिवर्तन करने पर रोक लगाते हुए तीन माह के भीतर ग्रुप हाउसिंग के लिए नीति निर्धारित करने को को कहा है। कोर्ट ने कहा है कि नियम न बनने तक यह रोक जारी रहेगी। 

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वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अनुज कंसल ने हाईकोर्ट में याचिका कर कहा था कि देहरादून के आस पास पेड़ काटने के साथ अवैध निर्माण हो रहा है। याचिका में कोर्ट से इस सब पर रोक लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने अवैध निर्माणों से संबंधित मामलों की सुनवाई जिला न्यायालयों में किए जाने पर रोक लगाते हुए सभी मामले हाईकोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा है।
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 हाईकोर्ट ने देहरादून के हर्बटपुर, विकास नगर और शहर के आसपास कृषि भूमि से फलदार पेड़ काटने व अवैध निर्माण के मामले की जांच के लिए राज्य के मुख्य सचिव को आईजी स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने एसएसपी को निर्देश दिए हैं कि वे दून के स्पेशल एरिया अथारिटी के उन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें जिनके कार्यकाल में पेड़ काटे गए और अवैध निर्माण हुए हैं।
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हाई कोर्ट ने राज्य के सभी सिविल न्यायालयों के निर्देश दिया है कि वे यूपी स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथारिटी  एक्ट 1986 के अंतर्गत एसएडीए, साडा द्वारा जिन अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण के आदेश किए गए हैं उनकी सुनवाई ना करें। साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वह विकासनगर के सिविल जज सीनियर डिवीजन को सम्मन जारी करें और उनके द्वारा 22 अक्टूबर 2013 को पारित आदेश की प्रति हाईकोर्ट में पेश करें जिसमें उन्होंने अवैध निर्माण के ध्वस्तीकरण के खिलाफ अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर स्थगन आदेश पारित किया है। 


कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिए हैं कि एसआईटी को मामले से संबंधित सभी दस्तावेज उपलब्ध कराएं। कोर्ट ने कहा है कि एसआईटी तीन महीने में जांच कर मामला दर्ज करे। संबंधित विभागाध्यक्षों को आदेश दिया है कि आरोपी अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करें। कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि ग्रुप हाउसिंग निर्माण को नियमित करने के लिए तीन महीने में कानून बनाए।

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