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दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग को गर्भपात की अनुमति: हाईकोर्ट ने गर्भावस्था में पल रहे भ्रूण के बजाय पीड़िता की जिंदगी को ज्यादा महत्वपूर्ण माना
Mon, 07 Feb 2022 11:56 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीता
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीता
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 07 Feb 2022 11:56 PM IST
सार
नैनीताल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग को गर्भपात की अनुमति दे दी है।
हाईकोर्ट ने गर्भावस्था में पल रहे भ्रूण के बजाय पीड़िता की जिंदगी को अधिक महत्वपूर्ण माना है।
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फाइल फोटो
- फोटो : PTI
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विस्तार
नैनीताल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग को गर्भावस्था के 29 सप्ताह पांच दिन में गर्भपात की अनुमति प्रदान की है। कोर्ट ने गर्भावस्था में पल रहे भ्रूण के बजाय पीड़िता की जिंदगी को अधिक महत्वपूर्ण मानते हुए यह आदेश पारित किया।
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी अधिनियम के तहत गर्भावस्था के 24 सप्ताह में गर्भपात की अनुमति देने का प्रावधान है। न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। गढ़वाल मंडल की पीड़िता ने अपने पिता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति की गुहार लगाई थी।
याचिकाकर्ता की अधिवक्ता के अनुसार पीड़िता की उम्र 15 साल नौ महीने है। दुष्कर्म के कारण वह गर्भवती हुई है। इन परिस्थितियों में यदि याचिकाकर्ता को अपनी गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर किया जाता है तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसके जीवन को जीने की गारंटी का उल्लंघन होगा।
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अभियोजन के अनुसार 12 जनवरी को नामजद आरोपितों के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया था। 11 जनवरी को पीड़िता की सोनोग्राफी कराई गई जिसमें 27 सप्ताह, चार दिन से अधिक का गर्भ पाया गया।
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मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी अधिनियम के तहत गर्भावस्था के 24 सप्ताह में गर्भपात की अनुमति देने का प्रावधान है। न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। गढ़वाल मंडल की पीड़िता ने अपने पिता के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर गर्भपात की अनुमति की गुहार लगाई थी।
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याचिकाकर्ता की अधिवक्ता के अनुसार पीड़िता की उम्र 15 साल नौ महीने है। दुष्कर्म के कारण वह गर्भवती हुई है। इन परिस्थितियों में यदि याचिकाकर्ता को अपनी गर्भावस्था जारी रखने के लिए मजबूर किया जाता है तो यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसके जीवन को जीने की गारंटी का उल्लंघन होगा।
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अभियोजन के अनुसार 12 जनवरी को नामजद आरोपितों के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज किया गया था। 11 जनवरी को पीड़िता की सोनोग्राफी कराई गई जिसमें 27 सप्ताह, चार दिन से अधिक का गर्भ पाया गया।
अदालत के आदेश पर 24 जनवरी को मेडिकल बोर्ड का गठन कर रिपोर्ट दी गई जिसमें गर्भ 28 सप्ताह पांच दिन का पाया गया। बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि गर्भपात मां के लिए जोखिम भरा है।
कोर्ट ने फिर आदेश दिया कि मेडिकल बोर्ड के मार्गनिर्देशन में आदेश प्राप्त के 48 घंटे के भीतर मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्त्री रोग विशेषज्ञ की देखरेख में गर्भपात की प्रक्रिया पूरी करें।
कोर्ट ने फिर आदेश दिया कि मेडिकल बोर्ड के मार्गनिर्देशन में आदेश प्राप्त के 48 घंटे के भीतर मुख्य चिकित्सा अधिकारी स्त्री रोग विशेषज्ञ की देखरेख में गर्भपात की प्रक्रिया पूरी करें।