उत्तराखंड: कर्मचारियों के आश्रितों के गोल्डन कार्ड घर जाकर बनाने पर विचार
- कर्मचारियों, पेंशनरों व उनके आश्रितों के बनने हैं 10 लाख गोल्डन कार्ड
- कार्ड बनाने में कर्मचारियों की अरुचि से राज्य प्राधिकरण की पेशानी पर बल
- अब मैक्स और कैलाश अस्पताल को सूचीबद्ध करने की तैयारी
विस्तार
उत्तराखंड अटल आयुष्मान योजना के तहत प्रदेश सरकार के कर्मचारियों के आश्रितों के गोल्डन कार्ड घर जाकर बनाने पर गंभीरता से विचार हो रहा है। शिविरों में गोल्डन कार्ड बनाने के लिए परिवार के सदस्यों को लेकर जाने पर कर्मचारियों को एतराज है। कर्मचारी संगठन इसका विरोध कर रहे हैं। कर्मचारियों के इस विरोध देखते हुए राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण इस विकल्प पर विचार कर रहा है, लेकिन इससे पहले प्राधिकरण चाहता है कि कर्मचारी कम से कम पहले अपने गोल्डन कार्ड बना लें।
प्राधिकरण ने तीन लाख राजकीय कर्मचारियों व पेंशनरों समेत उनके आश्रितों के कैशलेस इलाज के लिए गोल्डन कार्ड बनाने का बीड़ा उठाया है। पूरे प्रदेश में करीब 125 से अधिक अलग-अलग शिविर संचालित हो रहे हैं। आश्रितों को मिलाकर प्राधिकरण को करीब 10 लाख गोल्डन कार्ड बनाने हैं, लेकिन उसे इसमें खास सफलता नहीं मिल रही है। सूत्रों के मुताबिक अभी सिर्फ तय लक्ष्य के सापेक्ष 10 फीसदी ही प्रगति है। इसे देखते हुए अब प्राधिकरण उन स्थितियों को स्पष्ट करने जा रहा है, जिनके कारण भ्रम की स्थिति बनी है।
1-आश्रितों की परिभाषा : कर्मचारी संगठनों को भी इस बात पर एतराज है कि नौ हजार से अधिक आय वाले आश्रित को कैशलेस इलाज का लाभ नहीं मिलेगा। इस पर प्राधिकरण का मानना है कि यह आश्रितों के लिए यह मानक प्राधिकरण ने अलग से तय नही किया है, बल्कि यह पहले से शासकीय प्रक्रिया में है।
2-मैक्स और कैलाश से बन रही बात : कर्मचारी चाहते हैं कि मैक्स और कैलाश अस्पताल सरीखे नामी अस्पतालों को सूची में शामिल किया जाए। प्राधिकरण के सूत्रों की मानें तो मैक्स और कैलाश अस्पताल को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया निर्णायक मोड पर है। साथ ही केंद्र सरकार के तहत 30 हजार से अधिक अस्पतालों में कैशलेस इलाज राज्य के कर्मचारियों को भी मिले, इसके भी प्रयास शुरू हो गए हैं।
जब कार्ड नहीं बना तो अंशदान क्यों कटे?
कर्मचारी यह सवाल उठा रहे हैं कि जब उनका कार्ड ही नहीं बना है तो दिसंबर माह से उनके वेतन से अंशदान क्यों काटा जा रहा है? लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि दिसंबर से सभी राजकीय कर्मचारियों के वेतन से अंशदान की कटौती होगी। बेशक अभी उनके गोल्डन कार्ड न बने हों।
हमारी कोशिश है कि सभी कर्मचारी कम से कम अपने गोल्डन कार्ड बनवा लें। उनके आश्रितों के कार्ड बाद में भी बनाए जा सकते हैं। हमने अब कालोनियों में भी शिविर लगाने शुरू कर दिए हैं। हम इस विकल्प पर भी गंभीरता से विचार कर रहे हैं कि कर्मचारियों को आश्रितों के कार्ड घर पर जाकर बनाएं, लेकिन हमारी सबसे पहली प्राथमिकता ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों के कार्ड बनाने की है।
- अरुणेंद्र सिंह चौहान, सीईओ, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण