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सल्ट विधानसभा उपचुनाव : मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की पहली परीक्षा की घड़ी आई

Wed, 17 Mar 2021 10:39 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 17 Mar 2021 10:39 AM IST
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Uttarakhand by Election News: Salt Assembly seat By-elections will cm tirath first exam
तीरथ सिंह रावत - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

सल्ट विधानसभा उपचुनाव के घोषित होते ही नए मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत की परीक्षा की घड़ी आ गई है। भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना के निधन के कारण खाली हुई सीट पर वापसी की भाजपा के सामने चुनौती है। इस चुनाव में अभी किसी भी राजनीतिक दल ने उम्मीदवारी को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं। माना जा रहा है कि भाजपा की जीना परिवार से ही प्रत्याशी देने की तैयारी है। 

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विधानसभा चुनाव में बढ़त बनाने के लिए कांग्रेस भी इस सीट पर पूरा जोर लगाने की कोशिश में है। सल्ट उपचुनाव ऐसे समय में घोषित हुआ है जब तीरथ सिंह रावत प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने नया-नया पदभार संभाला है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार के समय में लोगों की नाराजगी बढ़ने को नेतृत्व परिवर्तन के कारण बताया जा रहा है।
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ऐसे में मुख्यमंत्री को सल्ट उपचुनाव की कमान भी संभालनी होगी। उपचुनाव का परिणाम यह भी बताएगा कि भाजपा की सरकार के पिछले चार साल के कार्यकाल के दौरान लोगों की कितनी नाराजगी रही है। नेतृत्व परिवर्तन के बाद लोगों के मूड में कितना बदलाव आया है।

उप चुनाव का माहौल बनाने की चुनौती 

अब तीरथ सिंह रावत के कंधों पर उपचुनाव का माहौल अपने पक्ष में बनाने की चुनौती है। सल्ट विधानसभा में दो बार कांग्रेस और दो बार भाजपा का परचम लहराया है। इस विधानसभा में भाजपा के पास यह सीट थी और उसके तेजतर्रार विधायक सुरेंद्र सिंह जीना की यहां बेहद मजबूत पकड़ भी मानी जाती थी। भाजपा को अभी यह तय करना है कि उपचुनाव में भाजपा की तरफ से उम्मीदवारी किसकी होगी।

विधानसभा चुनाव का लिटमस टेस्ट

दूसरी ओर कांग्रेस इस उपचुनाव को आने वाले विधानसभा उपचुनाव का लिटमस टेस्ट मानकर चल रही है। ऐसे में कांग्रेस की इस उपचुनाव के जरिये विधानसभा चुनाव में मनोवैज्ञानिक रूप से बढ़त बनाने की कोशिश है।

कांग्रेस की ओर से अभी तक दो दावेदारी सामने आई हैं। पहली दावेदारी इसी क्षेत्र के पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत के बेटे विक्रम रावत की है। वहीं, पिछले चुनाव में कम मार्जिन से हारीं कांग्रेस कि रनर अप प्रत्याशी भी दावा कर रहीं हैं। 

आम आदमी पार्टी भी मैदान में

पिछले कुछ समय में प्रदेश में आप ने भी अपनी मौजूदगी का एहसास कराया है। आप भी सीट पर उपचुनाव में दावा ठोक सकती है। ऐसे में उपचुनाव में आप की भी परीक्षा होगी और परिणाम पर इसका फर्क पड़ने से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

क्या तीरथ हो सकते हैं उम्मीदवार?

इस उपचुनाव का एक दिलचस्प सवाल यह भी है कि क्या मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत उपचुनाव के उम्मीदवार हो सकते हैं? जानकार इसके पक्ष में यह तर्क दे रहे हैं कि इस सीट पर गढ़वाल का भी प्रभाव है। सल्ट महादेव का इलाका तीरथ सिंह रावत के लिए खासा मुफीद साबित हो सकता है।

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