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मुसीबत का सबब बन सकता है यह सिम
प्रवेश कुमारी
Updated Mon, 22 Jul 2013 08:16 AM IST
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मोबाइल फोन में लगने वाला सा सिम कार्ड कभी भी किसी बड़ी मुसीबत का सबब बन सकता है। किसी और की आईडी पर किसी और को सिम बांटे जा रहे हैं।
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पड़ोसी देश से पढ़ने आए और किराएदार के रूप में रह रहे छात्र सिम पाने के लिए मकान मालिक की आईडी का सहारा लेने रहे हैं।
ऐसा वह सत्यापन की प्रक्रिया से बचने के लिए कर रहे हैं ताकि आसानी से सिम हासिल कर सकें। उधर, सत्यापन के नाम पर टेलीकाल का दावा कर रहे अधिकारी रैंडम सैंपलिंग के नाम पर पल्ला झाड़ रहे हैं।
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सभी कंपनियां कस्टमर डाटा बेस बढ़ाने के लिए महज औपचारिकता पूरी कर सिम बांटने में जुटी हैं। पटेलनगर, क्लेमेंटटाउन, राजपुर रोड जैसे इलाकों में विभिन्न संस्थानों में पढ़ रहे बाहर के छात्र-छात्राएं बड़ी तादाद में इस तरह सिम हासिल कर रहे हैं।
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जिम्मेदारी रिटेलर, मकान-मालिक की
मोबाइल कंपनियों के अधिकारी मानते हैं कि अगर कोई छात्र मकान-मालिक की आईडी पर सिम ले रहा है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित मकान मालिक की है।
उसे अपने कागजात इसके लिए नहीं देने चाहिए। वहीं, रिटेलर की भी जिम्मेदारी बनती है। किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में उन्हें भी कुसूरवार ठहराया जाएगा।
हर किसी को फोन करना संभव नहीं
'सत्यापन के लिए टेलीकालिंग की व्यवस्था की गई है। कंपनी की ओर से फोन करके जांचा जाता है कि सिम किसके नाम है कौन प्रयोग कर रहा है? लेकिन हर किसी को फोन किया जा सकना संभव नहीं। रैंडमली नंबर लेकर चेक किये जाते हैं।'
एमपी गुप्ता, उप-महाप्रबंधक, बीएसएनएल