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Dehradun News: देवदार के जंगल की विश्वस्तरीय पहचान मिटाने में जुटे माफिया
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देवदार के जंगल की विश्वस्तरीय पहचान रखता है कनासर रेंज का जंगल
एशिया का सबसे पुराना देवदार का वृक्ष कनासर में मौजूद
वन प्रभाग की कनासर रेंज स्थित देवदार का जंगल न सिर्फ प्रदेश और देश में बल्कि विश्वस्तर पर अपनी अलग पहचान रखता है। कनासर के जंगल में एशिया का सबसे पुराना वृक्ष मौजूद होना जंगल की विशेषता को दर्शाता है, लेकिन लकड़ी चोर जंगल की इस विश्वस्तरीय पहचान पर लगातार आरी चलाने में जुटे हुए हैं।
चकराता-त्यूणी मोटर मार्ग पर स्थित चकराता वनप्रभाग की कनासर रेंज को देवदार के बेशकीमती पेड़ो के सृमद्ध जंगल के रूप में जाना जाता है। इसी स्थान पर वन विभााग के माध्यम से संरक्षित किया गया देवदार का एक वृक्ष रेंज के जंगल की विशेष पहचान है। 6.33 मीटर गोलाई का यह पेड़ साढ़े तीन सौ साल पुराना बताया जाता है। यह वृक्ष देवदार के पुराने पेड़ों की श्रेणी में एशिया में पहला स्थान रखता है।
लकड़ी चोरों के निशाने पर देवदार का जंगल
पिछले कई साल से देवदार का यह महत्वपूर्ण जंगल लकड़ी चोरो के निशाने पर है। जंगल से एक के बाद एक कई हजार पुराने और बेशकीमती पेड़ चोरी कर लिए गए हैं। हाल के दिनों में वन विभाग ने कनासर रेंज के जंगल से सटे तीन गांवो में तलाशी अभियान चलाते हुए देवदार और कैल नामक प्रजाति की लकड़ी से बने 4127 स्लीपर बरामद किए हैं।
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देवदार के काटे गए पेड़ो की नहीं हो सकेगी भरपाई
देवदार के पेड़ को लगाने से लेकर उसके काटने लायक स्थिति में पंहुचने में एक पीढ़ी गुजर जाने जितना समय लगता है। चकराता के सहाय वन संरक्षक मुकुल कुमार के मुताबिक देवदार की पौध तैयार करने में लगने वाले तीन साल के समय के बाद उसे जंगल में रौप दिया जाता है। चकराता निवासी कैप्टन चेतना चौहान का कहना है कि कनासर रेंज के जंगल से काटे गए अधिकतर वृक्ष सौ से दो सौ साल तक पुराने थे। यह एक ऐसा नुकसान है जिसे पूरा करना असंभव है।
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एशिया का सबसे पुराना देवदार का वृक्ष कनासर में मौजूद
वन प्रभाग की कनासर रेंज स्थित देवदार का जंगल न सिर्फ प्रदेश और देश में बल्कि विश्वस्तर पर अपनी अलग पहचान रखता है। कनासर के जंगल में एशिया का सबसे पुराना वृक्ष मौजूद होना जंगल की विशेषता को दर्शाता है, लेकिन लकड़ी चोर जंगल की इस विश्वस्तरीय पहचान पर लगातार आरी चलाने में जुटे हुए हैं।
चकराता-त्यूणी मोटर मार्ग पर स्थित चकराता वनप्रभाग की कनासर रेंज को देवदार के बेशकीमती पेड़ो के सृमद्ध जंगल के रूप में जाना जाता है। इसी स्थान पर वन विभााग के माध्यम से संरक्षित किया गया देवदार का एक वृक्ष रेंज के जंगल की विशेष पहचान है। 6.33 मीटर गोलाई का यह पेड़ साढ़े तीन सौ साल पुराना बताया जाता है। यह वृक्ष देवदार के पुराने पेड़ों की श्रेणी में एशिया में पहला स्थान रखता है।
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लकड़ी चोरों के निशाने पर देवदार का जंगल
पिछले कई साल से देवदार का यह महत्वपूर्ण जंगल लकड़ी चोरो के निशाने पर है। जंगल से एक के बाद एक कई हजार पुराने और बेशकीमती पेड़ चोरी कर लिए गए हैं। हाल के दिनों में वन विभाग ने कनासर रेंज के जंगल से सटे तीन गांवो में तलाशी अभियान चलाते हुए देवदार और कैल नामक प्रजाति की लकड़ी से बने 4127 स्लीपर बरामद किए हैं।
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देवदार के काटे गए पेड़ो की नहीं हो सकेगी भरपाई
देवदार के पेड़ को लगाने से लेकर उसके काटने लायक स्थिति में पंहुचने में एक पीढ़ी गुजर जाने जितना समय लगता है। चकराता के सहाय वन संरक्षक मुकुल कुमार के मुताबिक देवदार की पौध तैयार करने में लगने वाले तीन साल के समय के बाद उसे जंगल में रौप दिया जाता है। चकराता निवासी कैप्टन चेतना चौहान का कहना है कि कनासर रेंज के जंगल से काटे गए अधिकतर वृक्ष सौ से दो सौ साल तक पुराने थे। यह एक ऐसा नुकसान है जिसे पूरा करना असंभव है।