एक ऐसा शिक्षक जो गरीब बच्चों पर खर्च करता है अपना वेतन, 150 छात्रों की पढ़ाई का उठाया खर्चा
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अपने लिए जीएं तो क्या जीएं, ए दिल तू जी जमाने के लिए... इन शब्दों को सार्थक किया है चमोली जिले के शिक्षक धन सिंह घरिया ने।
वे विद्यालय में छात्र-छात्राओं पढ़ाते हैं और गरीब छात्र-छात्राओं की मदद के लिए हमेशा आगे रहते हैं। वह अपनी 13 साल की सेवा में वे ऐसे 150 छात्रों की पढ़ाई का खर्चा उठा चुके हैं। वह अपना वेतन गरीब बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं। यही नहीं उन्होंने जीआईसी गोदली (पोखरी) के परिसर में ही एक मिश्रित वन तैयार किया है। इस वन में करीब सौ प्रजाति के पौधे हैं।
शिक्षक धन सिंह घरिया गोपेश्वर के समीप सेंटुणा गांव में भोटिया जनजाति परिवार के हैं। वर्ष 2005 में प्राथमिक विद्यालय किमाणा (रुद्रप्रयाग) में उनकी नियुक्ति हुई थी। वे 11 सालों से दुर्गम क्षेत्र के विद्यालय जीआईसी गोदली में राजनीति विज्ञान विषय में प्रवक्ता हैं।
गरीब छात्र-छात्राओं को न सिर्फ पढ़ाते हैं, उनकी पढ़ाई का खर्चा भी उठाते हैं
विद्यालय में पढ़ाई के साथ ही वे क्षेत्र के गरीब छात्र-छात्राओं को न सिर्फ पढ़ाते हैं वह उनकी पढ़ाई का खर्चा स्वयं उठाते हैं। वर्ष 2013 की केदारनाथ आपदा के दौरान मसोली गांव की अंजलि के पिता की मौत हो गई थी और एक माह बाद उसकी मां की तबियत खराब होने पर उनकी भी मौत हो गई थी।
वह तब सातवीं कक्षा की छात्रा थी और उसके दादा-दादी के पास रहती थी। माता-पिता की मौत के कारण वह आगे की पढ़ाई में असमर्थ थी।
जब धन सिंह को इस छात्रा के बारे में पता चला तो उन्होंने अंजली की पढ़ाई का खर्चा स्वयं उठाया। अभी अंजलि जीआईसी गोदली में बारहवीं की छात्रा है। शिक्षक धन सिंह घरिया कहते हैं कि बचपन से ही असहाय बच्चों के उत्थान की ललक थी। छात्र-छात्राओं की मदद करके मन को सुकून मिलता है।