लोस चुनाव से पहले वरिष्ठ कांग्रेसी नेता की फेसबुक पोस्ट से मचा 'घमासान', एक तीर से किए कई वार
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लोकसभा चुनाव से पहले पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सीट से सांसद रहे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने अपने फेसबुक अकाउंट पर बाहरी-भीतरी के मुददे को लेकर एक पोस्ट डालकर नई बहस छेड़ दी है।
पूर्व सीएम ने उन्हें बाहरी करार दे रहे हरिद्वार के नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्हें वेस्ट यूपी के कुख्यातों का दोस्त तक करार दे डाला है। वे यही ही नहीं रुके बल्कि बाहरी-भीतरी की पूरी परिभाषा का वर्णन तक किया है। हरिद्वार ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में इस पोस्ट को लेकर हल्ला मचा हुआ है।
यह बात जगजाहिर है कि हरिद्वार लोकसभा सीट पर सक्रिय दिखाई दे रहे पूर्व सीएम हरीश रावत का बड़ा खेमा जिले में है, लेकिन राजनीतिक महत्वकांक्षा के चलते एक दूसरा खेमा टिकट पाने में पूर्व सीएम का रास्ता रोकने में जुटा है।
वह खेमा खुद को संसदीय क्षेत्र का दावेदार मान रहा है और पूर्व सीएम को बाहरी करार देकर टिकट पाने की जुगत में जुटा है। इधर, पूर्व सीएम भी हरिद्वार में खासे सक्रिय हो चले हैं क्योंकि वे एक बार इस सीट का प्रतिनिधितत्व संसद में कर चुके हैं।
हालांकि पिछले चुनाव में उनकी पत्नी पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक से चुनाव हार गई थी। पूर्व सीएम हरीश रावत ने अपने फेसबुक अकाउंट की वॉल पर तीखे शब्दों में एक पोस्ट अपलोड की है। पोस्ट में रावत ने जिले के आमजन के सुख दुख में शामिल होने से लेकर अपने कार्यकाल में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया है। आगे लिखा है कि उन्हें बाहरी बताने वाले वो लोग भीतरी है जो कुख्यात सुशील मूंछ, सुनील राठी को जानते हैं।
भाइयों पड़ोसियों में मुकदमेबाजी करवाते हैं और फिर मध्यस्थ बनते हैं। यही नहीं आमजन को गाली देते हैं। आखिरी में कटाक्ष करते हुए लिखा है कि ठीक है बाहरी एवं भीतरी की परिभाषा। रावत की पोस्ट सीधे सीधे हरिद्वार के ऐसे नेता से ताल्लुक रखती है, जिसने चुनाव हारने का रिकार्ड बनाया हुआ है। फिर भी खुद को टिकट मिलने का ख्वाब पाले हुए हैं। हरिद्वार में पूर्व सीएम की इस पोस्ट को लेकर कांग्रेस में उथल पुथल का माहौल बना हुआ है और हर कोई इस पोस्ट पर चटकारे ले रहा है।
मेरी पोस्ट कुछ सत्य और कुछ तथ्य की तरफ इशारा कर रही है बाकी हकीकत सब जानते हैं इससे ज्यादा कुछ और नहीं कहना है। मैंने वही विकास कार्य गिनाए हैं जो वास्तव में कराए गए हैं जहां तक पोस्ट को हटाने का सवाल है कुछ तीर ऐसे होते हैं जो छोड़े जाते हैं और उसके बाद खुद ही तरकश में लौट आते हैं यह पोस्ट भी ऐसा ही तीर था।
- हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री