छात्रवृत्ति घोटाला: हो रहे हैं चौंकाने वाले खुलासे, हर दूसरे छात्र को बाटी मोटी रकम
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दशमोत्तर छात्रवृत्ति घोटाले में निजी शिक्षण संस्थानों ने खूब गड़बड़झाला किया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब तक के सत्यापन में सामने आया है कि प्रदेश के बाहर के निजी शिक्षण संस्थानों ने 50 प्रतिशत छात्रवृत्ति फर्जी दस्तावेजों के आधार पर ली। एसआईटी की ओर से किए गए अब तक के सत्यापन करीब 50 प्रतिशत छात्र ऐसे मिले हैं, जिनको छात्रवृत्ति के बारे में कुछ जानकारी ही नहीं है।
छात्रवृत्ति घोटाले की जांच कर रही एसआईटी ने जसपुर और बाजपुर में यूपी और हरियाणा के सात शिक्षण संस्थानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया है। पहले चरण में एसआईटी राज्य के बाहर के करीब 350 शिक्षण संस्थानों के खिलाफ जांच कर रही है। इन शिक्षण संस्थानों में वर्ष 2011 से 2015 के बीच जिले के करीब चार हजार छात्रों का प्रवेश दिखाया गया।
इन छात्रों के फर्जी दस्तावेज लगाकर खाते खोले गए। एसआईटी राज्य के बाहर पढ़ने वाले इन छात्रों का सत्यापन कर रही है। सत्यापन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आएं हैं। वर्ष 2011 से 2015 के बीच जिन छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति निकाली गई, उनमें से सैकड़ों ने 10वीं के बाद स्कूल का मुंह नहीं देखा।
एसआईटी अब तक बाजपुर, जसपुर, नानकमत्ता, सितारगंज, खटीमा, कुंडा और केलाखेड़ा में करीब दो हजार छात्रों का सत्यापन किया है। सत्यापन में हर दूसरा छात्र ऐसा मिल रहा है, जिसने न तो उच्च शिक्षण संस्थान का मुंह देखा न ही कभी खाता खुलवाया।
सूत्रों की मानें तो राज्य के बाहर के निजी शिक्षण संस्थानों ने करीब 50 प्रतिशत छात्रों के फर्जी प्रवेश दिखाए और उनके नाम पर फर्जी दस्तावेजों से खाते खुलवाए। इसके बाद खुद ही छात्रवृत्ति की सारी रकम हड़प कर गए। आगे की जांच से स्थिति साफ हो जाएगी कि कितने प्रतिशत छात्रों को सही और कितनों के नाम पर फर्जी छात्रवृत्ति ली गई।
सरकारी कॉलेजों में गड़बड़ी ना के बराबर
जिले के जिन छात्रों ने राज्य के बाहर सरकारी कॉलेजों में पढ़ाई की उनकी छात्रवृत्ति में गड़बड़ी नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि सरकारी स्कूलों में मामूली फीस लगती है। सरकारी कॉलेजों में मॉनिटरिंग की प्रक्रिया भी कठिन होती है। इसी कारण सरकारी कॉलेजों में गड़बड़ी ना के बराबर मिल रही है।