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एनएच-74 घोटाला जांच : सीबीआई तैयार, डीओपीटी का अघोषित इंकार
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 29 Dec 2017 11:18 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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एनएच-74 घोटाले में सीबीआई जांच करने को तैयार है, मगर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) ने मामला अटका रखा है। सीबीआई ने छह माह पूर्व ही जांच स्वीकार करने पर सहमति दे दी थी।
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हैरान करने वाली यह सच्चाई उस हलफनामे से सामने आई है, जिसे सीबीआई ने बीते दिनों हाईकोर्ट में दाखिल किया था। हलफनामे में साफ तौर पर कहा गया है कि देहरादून की सीबीआई शाखा ने बीती 21 जून 2017 को जांच करने की स्वीकृति देते हुए डीओपीटी को पत्र भेज दिया था।
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नियमानुसार सीबीआई द्वारा किसी जांच को स्वीकार किए जाने की औपचारिक अधिसूचना डीओपीटी को ही जारी करनी होती है, जो तब से ही लंबित है। यह बात पुख्ता होती है, सीबीआई के उस हलफनामे से जो हाईकोर्ट के निर्देश पर बीते दिनों दाखिल किया गया है। इसमें सीबीआई देहरादून (एंटी करप्शन ब्रांच) के इंस्पेक्टर प्रशांत कांडपाल ने साफ तौर पर कहा है कि उन्होंने जांच स्वीकार करने के बाबत आवश्यक औपचारिकताएं पहले ही पूरी कर दी हैं।
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यह तथ्य साफ संकेत करते हैं कि केंद्र में कोई ऐसा सामर्थ्यवान है, जो यह एनएच-74 घोटाले की जांच सीबीआई से नहीं करवाना चाहता। वरना प्रदेश के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने सीबीआई सिफारिश भेजी हो, सीबीआई जांच को तैयार हो, डबल इंजन की सरकार में फिर यह कैसे हो सकता है कि छह महीने डीओपीटी इसे अटकाए बैठी रहे।
दरअसल, एनएच-घोटाले की सीबीआई जांच की संस्तुति के कुछ दिन बाद ही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर सीबीआई जांच वापस करने तक के लिए कहा था। पत्र में यह भी कहा गया था कि यदि सीबीआई जांच होगी तो राज्य में चल रहे एनएच के तमाम प्रोजेक्ट प्रभावित होंगे। इस पत्र को लेकर सियासी हल्कों में बड़ी खलबली मची थी। कुछ माह पहले ही मुख्यमंत्री का पद संभालने वाले त्रिवेंद्र सिंह, इस घटनाक्रम से काफी असहज हो गए थे।
अरबों रुपये के इस घोटाले में तमाम छोटे-बड़े अधिकारियों के अलावा कुमाऊं के कुछ बड़े राजनेताओं का नाम खुलकर लिया गया। पूर्व में तत्कालीन कमिश्नर डी. सेंथिल पांडियन ने मामले का खुलासा किया था। उन्होंने मामले की प्राथमिक जांच करके अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी थी। साथ ही पूरे मामले की जांच किसी निष्पक्ष जांच एजेंसी से कराए जाने की संस्तुति की थी। इसी के बाद सीएम ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। मार्च में की गई इस सिफारिश के बाद शासने से दो बार सीबीआई को रिमाइंडर भी भेजा गया था।
यहां तक की सीएम ने एक मौके पर विधानसभा में भी बयान दिया कि मामले की जांच जल्द ही सीबीआई करेगी। बावजूद इसके जांच स्वीकार या अस्वीकार किए जाने संबंधी कोई जवाब आज तक नहीं आया। विपक्ष रह-रहकर इस मामले को तमाम मौकों पर उठाते हुए सरकार पर जानबूझकर जांच न करवाने का आरोप लगाता रहता है। सूत्रों की मानें तो सीबीआई के लिए यह जांच करना अधिकतम दो महीने का काम है, क्योंकि इससे जुड़े सारे रिकार्ड उपलब्ध हैं। मगर अफसरों और नेताओं की लॉबी ने इसे अपने प्रभाव से रुकवा रखा है। डीओपीटी में इसका इस तरह अटकना साफ संकेत करता है कि दाल में कुछ तो काला है।
पांच सौ करोड़ से ज्यादा का है घपला
एनएच-74 घोटाले में पांच सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम का घपला होने का अंदेशा है। इसमें अधिग्रहण की जाने वाली कृषि भूमि को अकृषि दिखाते हुए मुआवजे की राशि को कई गुना बढ़ा दिया गया। बीच की रकम में अफसरों और नेताओं के अलावा भूमि के काश्तकारों में बंदरबांट की गई। इस खेल से जुड़े तमाम अफसर जेल भी भेजे जा चुके हैं। फिलहाल मामले की जांच स्थानीय स्तर पर बनी एसआईटी कर रही है, जो यदा-कदा कुछ कार्रवाई करती रहती है।