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उत्तराखंड: नजूल भूमि को लेकर हाईकोर्ट का सरकार को झटका, हजारों परिवारों की उम्मीदें टूटी

Tue, 19 Jun 2018 09:06 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, नैनीताल Updated Tue, 19 Jun 2018 09:06 PM IST
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Nainital High Court reject Nazul land freehold proposal
nainital high court - फोटो : google

हाईकोर्ट ने 2009 की नजूल नीति में अवैध कब्जेदारों के पक्ष में नजूल भूमि को फ्री होल्ड करने के प्रावधान को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने इन प्रावधानों को असंवैधानिक और गैर कानूनी मानते हुए सरकार पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि नजूल भूमि सार्वजनिक संपत्ति है। इस भूमि को सरकार किसी अतिक्रमणकारी के पक्ष में फ्री होल्ड नहीं कर सकती। हाईकोर्ट ने माना कि सरकार की ओर से इस नीति से पूरे प्रदेश के करीब 20 हजार एकड़ नजूल भूमि अवैध कब्जेदारों के पक्ष में फ्री होल्ड हुई है। इसमें 1900 एकड़ भूमि केवल नगर निगम रुद्रपुर में है।   
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वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति लोकपाल सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। रुद्रपुर के पूर्व सभासद राम बाबू और उत्तराखंड हाईकोर्ट के अधिवक्ता रवि जोशी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर सरकार की एक मार्च 2009 की नजूल नीति के तीन उपबंधों  ( छ, ज  और झ) को चुनौती दी थी।
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याचिकाकर्ताओं का कहना था कि राज्य सरकार ने नजूल भूमि को अवैध कब्जाधारकों के पक्ष में मामूली नजराना लेकर फ्री होल्ड करने के ये उपबंध नजूल एक मार्च 2009 को नीति में जोड़े थे।  हाईकोर्ट ने भी इस मामले को एक जनहित याचिका के रूप में स्वीकार किया था।

विधि विश्वविद्यालय के खाते में जमा होगा जुर्माना

Nainital High Court reject Nazul land freehold proposal
इलाहाबाद

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व में अपने फैसले में भी नजूल भूमि के उपयोग के लिए व्यवस्था की है। इसके बावजूद सरकार नजूल भूमि का सार्वजनिक उपयोग करने के बजाय अवैध कब्जेदारों और व्यक्ति विशेष के हित में कर रही है।

खंड पीठ ने कहा कि लोकतंत्र विधि नियम (रूल आफ लॉ) से चलता है। सरकार की यह नीति विधि नियम के खिलाफ है। नजूल भूमि का उपयोग सार्वजनिक हित में किया जाए और यह भूमि बीपीएल, गरीब, अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग आदि के लोगों को आवंटित की जाए।

विधि विश्वविद्यालय के खाते में जमा होगा जुर्माना
कोर्ट के मुताबिक जुर्माने की यह धनराशि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के खाते में जमा होगी। कोर्ट में मंगलवार को ही ऊधमसिंह नगर में राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का मामला में भी सुनवाई हुई। कोर्ट में सरकार ने कहा कि इस विश्वविद्यालय के लिए उनके पास पैसा नहीं है।

इस पर हाईकोर्ट ने न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं की ओर से विश्वविद्यालय के लिए धनराशि देने पर सहमति जताई। इसी के साथ कोर्ट ने कहा कि इसके लिए एक अलग से खाता खोला जाए और यह पैसा उस में जमा कराया जाए। कोर्ट ने सरकार पर लगाए गए जुर्माने के पांच लाख रुपये भी इसी खाते में जमा करने का आदेश दिया।
 

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