19 साल पहले हुए हत्याकांड में पूर्व पालिकाध्यक्ष ने कोर्ट में किया सरेंडर, लगाई ये गुहार
जसपुर के पूर्व पालिकाध्यक्ष मुख्तयार अहमद की हत्या मामले में दोषी पूर्व पालिकाध्यक्ष फरीदा बेगम ने मंगलवार को प्रभारी प्रथम अपर जिला जज ओम कुमार की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया है।
फरीदा के अधिवक्ता शैलेंद्र मिश्रा ने अभियुक्त को इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भी न्यायालय में अर्जी लगाई है। इसमें फरीदा बेगम की वृद्धावस्था के साथ ही हृदय रोग से पीड़ित होने का जिक्र किया गया है। फरीदा बेगम और एक अन्य की उम्रकैद की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखते हुए 18 दिसंबर तक संबंधित कोर्ट में सरेंडर करने के आदेश दिए थे।
जसपुर निवासी पूर्व पालिकाध्यक्ष मुख्तयार अहमद की 1999 में हुई हत्या के मामले में जसपुर की तत्कालीन पालिकाध्यक्ष फरीदा बेगम, मो. अशरफ, रईस अहमद उर्फ सतना, रईस उर्फ लपट्टी, असलम, नसीम उर्फ चुरती और इदरीश उर्फ मिर्ची को एडीजे कोर्ट ने 23 जुलाई 2004 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। निचली अदालत के इस आदेश को अभियुक्तों ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
सुप्रीम कोर्ट में दायर करूंगी पुनर्विचार याचिका : फरीदा
हाईकोर्ट ने भी 22 अगस्त 2012 को निचली अदालत के उम्रकैद के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद अभियुक्तों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई। इस दौरान फरीदा बेगम जमानत पर थी। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय खंड पीठ ने फरीदा बेगम और एक अन्य अभियुक्त मो. अशरफ की उम्रकैद को बरकरार रखा। कोर्ट ने चार अन्य आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया।
फरीदा बेगम ने अदालत में आत्मसमर्पण करने से पूर्व इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात कही है। फरीदा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हुए वह सरेंडर कर रही हैं लेकिन उनकी मुख्तयार से कोई रंजिश नहीं थी। उनके कार्यकाल में रहे एक सभासद ने प्रपंच रचकर उन्हें इस मुकदमे में फंसाया है। उक्त सभासद उनसे गलत ढंग से बिल पास कराने का दबाव डालता था। उन्होंने कहा कि जिस समय मुख्तयार की हत्या को अंजाम दिया गया, उस समय वह कुछ सभासदों के साथ अपने घर पर मौजूद थीं। उन्होंने कहा कि इस सजा के खिलाफ वह सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेंगी। उन्हें इंसाफ मिलने का पूरा भरोसा है।