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स्थानीय उत्पादों को मिलेगी हिमालयन ब्रांड से पहचान : मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत

Sat, 10 Oct 2020 07:32 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 10 Oct 2020 07:32 PM IST
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Local products will get Himalayan brand recognition: Chief Minister Trivendra Singh Rawat
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : पीटीआई (file photo)

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रदेश सरकार स्थानीय उत्पादों को हिमालयी ब्रांड से पहचान दिलाने के लिए काम कर रही है। आर्गेनिक उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। मुुख्यमंत्री शनिवार को अपने सरकारी आवास से राज्य के सामाजिक उद्यमियों से वर्चुअल संवाद कर रहे थे।

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उन्होंने कहा कि चीड़ की पत्तियों से बिजली बनाने की नीति कारगर होगी तो इससे 40 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। राज्य के वन क्षेत्र में 27 प्रतिशत पर चीड़ होता है। इसकी पत्तियों से बिजली बनेगी और पर्यावरणीय लाभ भी होगा।
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उन्होंने कहा कि हमें स्थानीय संसाधनों को आधार मानकर आगे बढ़ेंगें, तो आत्मनिर्भर बनने में सुविधा होगी। प्रकृति ने देवभूमि को बहुत कुछ दिया है। स्वरोजगार की दिशा में राज्य सरकार अनेक कार्य कर रही है। इस दिशा में सोचने की जरूरत है कि हम अपने साथ कितने और लोगों को रोजगार उपलब्ध करा सकते हैं।
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उन्होंने निवेशक सम्मेलन की जानकारी दी। बताया कि एक  लाख 25 हजार करोड़ रुपये के एमओयू हुए। जिसमें से 25 हजार करोड़ रुपये के कार्यों की ग्राउंडिंग हो चुकी है। राज्य बनने से औद्योगिक क्षेत्र में 2017 तक राज्य में 40 हजार करोड़ रुपये का निवेश हुआ। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में सुधार लाने के लिए हर न्याय पंचायत मे अलग अलग थीम पर रूरल ग्रोथ सेंटर बनाए जा रहे हैं।

अभी तक 100 से अधिक ग्रोथ सेंटरों को स्वीकृति दी जा चुकी है। होम स्टे को राज्य में बढ़ावा दिया जा रहा है। अभी तक 2200 से अधिक होम स्टे रजिस्टर्ड हो चुके हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री स्वरोजगा योजना की जानकारी भी दी। उन्होंने दिव्या रावत, हर्षपाल चौधरी, नुपुर अग्रवाल, निवेदिता कार्की, प्रेक्षा कपरवाण और प्रीति भंडारी से बात की और उनके सुझाव लिए।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा उन्नयन समिति की उपाध्यक्ष  दीप्ति रावत, सचिव  राधिका झा, पलायन आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एसएस नेगी, मुख्यमंत्री के तकनीकि सलाहकार डॉ. नरेन्द्र सिंह, आईटी सलाहकार रविन्द्र दत्त, निदेशक उद्योग  सुधीर नौटियाल, कार्यक्रम के संयोजक अखिलेश रावत उपस्थित थे।


500 रुपये से काम शुरू किया, 40 हजार कमा रही हूं

मशरूम उत्पादन से जुड़ी प्रीति भंडारी ने अपने अनुभव को साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने 500 रुपये से मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया था। आज वह 40 हजार रुपये तक प्रतिमाह कमा लेती हैं। मुख्यमंत्री ने भी एक ग्रामीण महिला का जिक्र किया, जिन्होंने बैंक से एक लाख रुपये लोन लेकर बकरियां पाली और  2.60 लाख रुपये में बेची।

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