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हिंदी हैं हम: अहिंदी भाषी लोग शान से फहरा रहे हिंदी का परचम, बढ़ावा देने के लिए दोस्तों को भी कर रहे प्रेरित

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Sun, 12 Sep 2021 09:41 PM IST

सार

Hindi Diwas 2021 News: खास बात यह है कि कार्यस्थल से लेकर दोस्तों व परिवार के बीच में हिंदी बोलने का बहुत ज्यादा चलन नहीं होने के बावजूद यह युवा हिंदी बोलते हैं।
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हिंदी भाषा(प्रतीकात्मक तस्वीर)
हिंदी भाषा(प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
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विस्तार

दक्षिण भारतीय अथवा अहिंदी भाषी होने के बावजूद दून में रह रहे कुछ युवाओं की हिंदी सुनकर यकीन नहीं होगा कि हिंदी उनकी मातृभाषा नहीं है। यह युवा न सिर्फ हिंदी बोलते है। बल्कि भाषा पर अपनी अच्छी खासी पकड़ भी रखते हैं। खास बात यह है कि कार्यस्थल से लेकर दोस्तों व परिवार के बीच में हिंदी बोलने का बहुत ज्यादा चलन नहीं होने के बावजूद यह युवा हिंदी बोलते हैं।
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अंग्रेजी के शिक्षक पर हिंदी शब्दकोष का भंडार है: अरित्रो
मूल रूप से कोलकाता के अरित्रो चटोपध्याय की हिंदी बिल्कुल स्पष्ट है। वह जितनी स्पष्ट अंग्रेजी बोलते है उतनी ही साफ हिंदी। इतना ही नहीं दोस्तों संग भी जब वह हिंदी में बात करते है तो टूटी-फूटी हिंदी नहीं बल्कि शुद्ध हिंदी ही बोलते है। उनका हिंदी शब्दकोश भी अच्छा खासा है। कम उम्र में ही अरित्रो के खाते में कई उपलब्धियां है। वह सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर है। वे पेशे से अंग्रेजी के शिक्षक भी हैं। महज 23 साल के अरित्रो का कहना है कि उनके परिवार में हिंदी बोलने का चलन कम है, लेकिन उनके पिता लेखक हैं और उनकी ही वजह से उन्होंने हिंदी को अपने करीब समझा। वह कहते हैं कि हिंदी बोलते समय मैं स्वयं बहुत अच्छा महसूस करता है और मैं स्पष्ट भाषा बोलने में यकीन रखता हूं। इसलिए अपना हिंदी शब्दकोश भी बढ़ाता हूं।

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अपनी भाषा को छोड़कर हम अपनी पहचान नहीं बना सकते : पोरलोब कुंडू
पश्चिम बंगाल के 23 वर्षीय पोरलोब कुंडू खुद तो हिंदी बोलते ही हैं सथ ही दूसरों को भी बोलने के लिए प्रेरित करते है। पोरलोब की मातृभाषा बांग्ला है। घर में वह बांग्ला के साथ हिंदी का भी  प्रयोग करते हैं। पेशे से फाइनेंशियल एनालिटिक्स पोरलोब कहते हैं कि स्कूल में बच्चों पर अंग्रेजी बोलने का दबाव होता है। वर्क प्लेस पर भी काम अंग्रेजी में होता है। ऐसे में हम खुद अपनी मातृभाषा को पीछे कर रहे हैं। वह कहते हैं कि मुझे खुद लगता है कि जब हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है तो हम इसे बोलने में क्यों हिचकिचाएं? मैं बहुत खुश होता हूं ये सोचकर कि मुझे बंगाली, अंग्रेजी के साथ हिंदी भी साफ बोलनी आती है। मैं अपने दोस्तों से भी कहता है कि हिंदी गाने सुनो। इसी बहाने कम से कम युवा हिंदी बोले। मैं मानता हूं कि हम अपनी भाषा,संस्कृति को छोड़कर अपनी पहचान नहीं बना सकते।
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