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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन को मिली 500 हेक्टेयर वन भूमि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 14 Apr 2018 07:29 PM IST
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ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन
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बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का निर्माण कार्य अब तेजी से हो सकेगा।
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रेल मार्ग के लिए 500.5996 हेक्टेयर वन भूमि रेल विकास निगम को गैर वानिकी कार्यों के लिए मिल गई है। रेल विकास निगम को जो जमीन दी गई है उसमें 327.5683 हेक्टेयर जमीन भूमिगत वन भूमि है, शेष 173.0313 हेक्टेयर जमीन सरफेस फारेस्ट लैंड है।
प्रदेश के पर्वतीय जनपदों में आवागमन की सुविधा को बेहतर बनाने के लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन का निर्माण शुरू किया गया है। 126 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन के शुरूआती छह किलोमीटर के निर्माण कार्य से संबंधी औपचारिकता पूर्ण कर कार्य अवार्ड कर दिया गया है। इस रेल लाइन के निर्माण में 16216 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
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इस रेलवे लाइन का 85 फीसदी हिस्सा सुरंग से होकर गुजरेगा। यानी 126 किलोमीटर में से 105 किलोमीटर की 17 सुरंगे बनाई जाएंगी। इसमें 98.54 किलोमीटर की एस्केप टनल होंगी। इसमें 16 पुलों का भी निर्माण होगा। रेलवे लाइन के निर्माण में 791 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है। रेल लाइन केदारनाथ वन्यजीव और बद्रीनाथ वन प्रभाग से होकर भी गुजरेगा।
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वन विभाग ने रेल लाइन के निर्माण के लिए 500.5996 हेक्टेयर वन भूमि रेल विकास निगम को देने को मंजूरी दे दी है। इस संबंध में वन विभाग के अपर सचिव सुभाष चंद्र की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। रेल विकास निगम को इस शर्त पर वन भूमि गैर वानिकी कार्य के लिए दी गई है कि वह इस जमीन के बदले अवनत आरक्षित वन क्षेत्र में क्षतिपूरक वृक्षारोपण करेगा और दस साल उसका रख-रखाव भी करेगा।