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पृथ्वी दिवस 2019: ...तो मैदानी इलाकों की तरह तपेंगे पहाड़, वैज्ञानिकों ने जताई चिंता

Mon, 22 Apr 2019 10:38 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 22 Apr 2019 10:38 AM IST
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Earth day 2019 scientist told mountains will heat soon like plains area
- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर

समय रहते न चेते तो मैदानी इलाकों की तरह पहाड़ भी तपने लगेंगे। जलवायु परिवर्तन पर अध्ययन कर रहे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) के वैज्ञानिकों का मत है कि आने वाले 50 वर्षों में वातावरण में सल्फेट एयरोसॉल और कार्बन-डाई-ऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से हिमालयन परिक्षेत्र का तापमान दो से चार डिग्री तक बढ़ सकता है।

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आईआईटीएम, सेंटर फॉर इकोलॉजी एंड हाईड्रोलॉजी यूनाइटेड किंग्डम के साथ मिलकर शोध कर रहा है। बीते दिनों दून पहुंचे आईआईटीएम के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अतुल सहाय ने बदलते पर्यावरण के प्रति चेताया था। उन्होंने बताया कि शोध में यह तथ्य सामने आया है कि जितनी तेजी से वायुमंडल में सल्फेट एयरोसॉल और कार्बन-डाई-ऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से तापमान में भी बढ़ोतरी हो रही है।
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चिंता की बात यह है कि उत्तराखंड सहित हिमालयन परिक्षेत्र में कई जगहों पर पहाड़ का तापमान चार डिग्री तक बढ़ सकता है। इससे जहां ग्लेशियर पिघलने की गति बढ़ेगी, वहीं इसके दुष्प्रभाव भी विकराल होंगे।

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बढ़ते तापमान से बारिश पर असर का अध्ययन

वैज्ञानिकों ने इससे बचाव के रास्ते तलाशने पर काम शुरू कर दिया है। कार्बन उत्सर्जन की मात्रा पर रोक लगाने के साथ ही भारतीय मौसम विभाग भी इस पर अध्ययन के लिए 20 रडार लगा रहा है। 

देशभर के वैज्ञानिक तापमान बढ़ने की आशंका तो जता चुके हैं, लेकिन बारिश पर इसका क्या असर पड़ेगा, इसको लेकर असमंजस में है। खासतौर से हिमालयन परिक्षेत्र में बारिश का अध्ययन काफी मुश्किल है।

आईआईटीएम के मुताबिक, अध्ययन में सबसे मुश्किल काम डाटा कलेक्शन का है। डाटा दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों के बीच से एकत्रित करना है। लेकिन आने वाले समय में इस दिशा में अध्ययन किया जाएगा।

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