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उत्तराखंड: तीन साल के मासूम से दुष्कर्म और हत्या के दोषी को सजा-ए-मौत, ऐसे साबित हुआ गुनाह

Fri, 01 Feb 2019 08:44 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Fri, 01 Feb 2019 08:44 AM IST
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Death Punishment for sexual assault and murder to minor boy in dehradun
फांसी

तीन साल के बच्चे का दुष्कर्म के बाद हत्या करने वाले युवक को विशेष पोक्सो न्यायाधीश रमा पांडेय की अदालत ने मृत्युदंड दिया है। अदालत ने युवक को चार दिन पहले दोषी करार देते हुए निर्णय सुरक्षित कर लिया था।

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दोषी पर अलग-अलग धाराओं में कुल 1.25 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है। शासकीय अधिवक्ता भरत सिंह नेगी ने बताया कि इस मामले में 12 मई 2016 को नेहरू कॉलोनी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
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घटनाक्रम के अनुसार लखीमपुर खिरी का एक मजदूर का परिवार नेहरू कॉलोनी में एक निर्माणाधीन भवन में काम करता था। उनके साथ ही राजेश उर्फ  जितेंद्र निवासी अकरौली संभल (उत्तर प्रदेश) भी काम करता था।

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जितेंद्र शराब पीने का आदि था, जिस पर तंग आकर उसके ठेकेदार ने उसे काम से हटा दिया था। घटना के दिन जितेंद्र चुपके से निर्माणाधीन भवन में आया और वहां खेल रहे तीन साल के बच्चे को अपने साथ छत पर ले गया।

आसपास के लोगों ने उसे आते और जाते देखा था। कुछ देर बाद जब बच्चा घर नहीं आया तो उसके परिजनों ने तलाशना शुरू किया। इस बीच बच्चे का भाई निर्माणाधीन भवन की छत पर गया तो देखा कि वह बेहोश पड़ा हुआ था।

उसने आसपास के लोगों से पूछा तो जितेंद्र के वहां आने की बात लोगों ने कही। इस पर परिजनों ने पुलिस को सूचना दी और कुछ देर बाद जितेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया। उसके खिलाफ रायपुर थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 364, 302 व 377 और 6पोक्सो अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।

चार्जशीट दाखिल होने के बाद अभियोजन की ओर से कुल 12 गवाह पेश किए गए। जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया। भरत सिंह नेगी ने बताया कि दोषी को बृहस्पतिवार को अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। 

आईपीसी 364 में हुआ बरी 
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद दोषी को हत्या और दुष्कर्म में सजा सुनाई है। जबकि, आईपीसी 364 (हत्या के लिए अपहरण) में दोष मुक्त किया है। दोषी मुकदमा दर्ज होने के बाद से जेल में बंद है।   

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