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महिलाओं से ठगी में बावरिया गिरोह का सदस्य दबोचा
Updated Wed, 30 May 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून
शहर में महिलाओं से ठगी के आरोप में कोतवाली पुलिस ने गुजरात के बावरिया गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने क्षेत्र की दो घटनाओं को अंजाम देने की बात कुबूल की है। आरोपी के पास से एक सोने की चेन, एक अंगूठी और कुछ नकदी बरामद हुई है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
गौरतलब है कि पांच मई को वसंती देवी से दून अस्पताल चौक पर और सात मई को कमलेश नारंग नाम की बुजुर्ग महिला से पीपल मंडी क्षेत्र में ठगी की गई थी। आरोपियों ने महिलाओं को अपनी लच्छेदार बातों में उलझाया और उनसे गहने ठग लिए थे। आरोपियों की तस्वीरें आसपास के सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हुई थी। इसी आधार पर कोतवाली पुलिस की एक टीम को आरोपियों की तलाश में लगाया गया था। कोतवाल बीबीडी जुयाल ने बताया कि मुखबिरों से सूचना मिली कि बावरिया गिरोह के कुछ सदस्य फिर से घटना करने की फिराक में शहर में घूम रहे हैं। इसी सूचना पर पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम नवल उर्फ किशन पुत्र कन्हैया लाल निवासी साढे बारह गज रघुवीर नगर, थाना ख्याला नई दिल्ली बताया। जबकि, एक अन्य गलियों के रास्ते भागने में सफल हो गया। दूसरे का नाम गोलू बताया जा रहा है। नवल ने पूछताछ में बताया कि वह गुजरात के बावरिया गिरोह का सदस्य है, जो मूढ़े बनाने का काम करते हैं। कालांतर में मूढ़ों की बिक्री कम हुई तो वे ठगी के काम में लग गए। दून में भी वे मूढ़े बनाने का ही काम करते हैं। जुयाल ने बताया कि गोलू और नवल महिलाओं को बातों में उलझाते हैं और खुद के पास भारी रकम होने की बात करते हैं। इसके लिए उन्होंने कागजों की एक गड्डी भी ली हुई है, जिसे वे नोट बताकर महिलाओं से जेवर ले लेते हैं।
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दिल्ली से आया था दून
नवल पिछले चार मई को दिल्ली से देहरादून आया था। वह मूढ़े बनाकर बेचने की बात कहकर ही देहरादून आया था। एक दो दिन उन्होंने मूढ़े भी बनाए थे। लेकिन, बाद में वे ठगी के काम में लग गए।
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मुखबिरी करने वालों को दंड देता है गिरोह
एसएसआई कोतवाली अशोक कुमार राठौर ने बताया कि इस गिरोह में एक मुखिया होता है। सभी लोग इस मुखिया की बात मानते हैं। पहले यह गिरोह तरह तरह के क्राइम भी करता था। लेकिन, विभिन्न राज्यों में पुलिस की सख्ती को देखते हुए उन्होंने संगठित अपराधों को छोड़कर ठगी करना शुरू कर दिया। इस गिरोह में एक बात विशेष है कि यदि इनका कोई सदस्य मुखबिरी करता है और उसका पता इन्हें लग जाता है तो मुखिया उसे दंड देता है। जो व्यक्ति पकड़ा गया है उसके परिवार का खर्च मुखबिर बना वह सदस्य ही उठाता है। इसके अलावा उसी के जिम्मे आरोपी की पैरवी का खर्च भी होता है।
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शहर में महिलाओं से ठगी के आरोप में कोतवाली पुलिस ने गुजरात के बावरिया गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने क्षेत्र की दो घटनाओं को अंजाम देने की बात कुबूल की है। आरोपी के पास से एक सोने की चेन, एक अंगूठी और कुछ नकदी बरामद हुई है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश की जा रही है।
गौरतलब है कि पांच मई को वसंती देवी से दून अस्पताल चौक पर और सात मई को कमलेश नारंग नाम की बुजुर्ग महिला से पीपल मंडी क्षेत्र में ठगी की गई थी। आरोपियों ने महिलाओं को अपनी लच्छेदार बातों में उलझाया और उनसे गहने ठग लिए थे। आरोपियों की तस्वीरें आसपास के सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हुई थी। इसी आधार पर कोतवाली पुलिस की एक टीम को आरोपियों की तलाश में लगाया गया था। कोतवाल बीबीडी जुयाल ने बताया कि मुखबिरों से सूचना मिली कि बावरिया गिरोह के कुछ सदस्य फिर से घटना करने की फिराक में शहर में घूम रहे हैं। इसी सूचना पर पुलिस ने चेकिंग के दौरान एक संदिग्ध को पकड़ लिया। पूछताछ में उसने अपना नाम नवल उर्फ किशन पुत्र कन्हैया लाल निवासी साढे बारह गज रघुवीर नगर, थाना ख्याला नई दिल्ली बताया। जबकि, एक अन्य गलियों के रास्ते भागने में सफल हो गया। दूसरे का नाम गोलू बताया जा रहा है। नवल ने पूछताछ में बताया कि वह गुजरात के बावरिया गिरोह का सदस्य है, जो मूढ़े बनाने का काम करते हैं। कालांतर में मूढ़ों की बिक्री कम हुई तो वे ठगी के काम में लग गए। दून में भी वे मूढ़े बनाने का ही काम करते हैं। जुयाल ने बताया कि गोलू और नवल महिलाओं को बातों में उलझाते हैं और खुद के पास भारी रकम होने की बात करते हैं। इसके लिए उन्होंने कागजों की एक गड्डी भी ली हुई है, जिसे वे नोट बताकर महिलाओं से जेवर ले लेते हैं।
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दिल्ली से आया था दून
नवल पिछले चार मई को दिल्ली से देहरादून आया था। वह मूढ़े बनाकर बेचने की बात कहकर ही देहरादून आया था। एक दो दिन उन्होंने मूढ़े भी बनाए थे। लेकिन, बाद में वे ठगी के काम में लग गए।
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मुखबिरी करने वालों को दंड देता है गिरोह
एसएसआई कोतवाली अशोक कुमार राठौर ने बताया कि इस गिरोह में एक मुखिया होता है। सभी लोग इस मुखिया की बात मानते हैं। पहले यह गिरोह तरह तरह के क्राइम भी करता था। लेकिन, विभिन्न राज्यों में पुलिस की सख्ती को देखते हुए उन्होंने संगठित अपराधों को छोड़कर ठगी करना शुरू कर दिया। इस गिरोह में एक बात विशेष है कि यदि इनका कोई सदस्य मुखबिरी करता है और उसका पता इन्हें लग जाता है तो मुखिया उसे दंड देता है। जो व्यक्ति पकड़ा गया है उसके परिवार का खर्च मुखबिर बना वह सदस्य ही उठाता है। इसके अलावा उसी के जिम्मे आरोपी की पैरवी का खर्च भी होता है।