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सचिन के खिलाफ धोखाधड़ी के मुकदमे की दोबारा जांच के आदेश
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सचिन के खिलाफ धोखाधड़ी के मुकदमे की दोबारा जांच के आदेश
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। कांग्रेस नेता के भाई सचिन उपाध्याय के खिलाफ धोखाधड़ी के मुकदमे में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को निरस्त करते हुए अदालत ने दोबारा विवेचना का आदेश दिया है। उपाध्याय के खिलाफ यह मुकदमा फरवरी 2017 में दर्ज हुआ था, जिसमें राजपुर पुलिस ने आठ माह बाद अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। अब न्यायालय ने थानाध्यक्ष राजपुर को खुद या किसी सक्षम उपनिरीक्षक से पुन: विवेचना कराए जाने के आदेश दिए हैं।
घटनाक्रम के अनुसार नोएडा निवासी मुकेश जोशी ने 14 फरवरी 2017 को राजपुर थाने में शिकायत की थी। मुकेश ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने वर्ष 2012 में सचिन उपाध्याय के खिलाफ दिल्ली में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि सचिन ने उनकी संपत्ति को फर्जी हस्ताक्षर कर खुर्द-बुर्द कर दिया है। मुकदमा दर्ज हुआ तो सचिन उपाध्याय ने समझौते के लिए कहा, जिसमें सचिन ने फर्जी हस्ताक्षर वाली बात कबूल की और मुकेश जोशी को 26,50000 रुपये देने की हामी भरी। सचिन ने रकम अदायगी तक मुकेश के पास देहरादून स्थित अपनी एक संपत्ति को भी गिरवी रखा। इसके कुछ दिनों बाद पता चला कि सचिन यह संपत्ति पहले ही बैंक में बंधक रख चुका है। मुकेश ने सचिन से बात की तो उसने पैसे देने से इंकार कर दिया। शिकायत पर राजपुर पुलिस ने सचिन के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, गाली गलौच और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया।
पुलिस ने जांच शुरू की और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए। पुलिस ने 10 दिसंबर 2017 को यह कहते हुए इस मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगा दी कि वादी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। यह भी कहा कि वादी मामले में रुचि नहीं ले रहा है। इस अंतिम रिपोर्ट को चुनौती देते हुए मुकेश जोशी ने अदालत में याचिका दायर की। इस पर गत 27 अप्रैल को अपर मुख्य दंडाधिकारी तृतीय विभा यादव की अदालत ने इस अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर दिया है।
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मेरे खिलाफ मुकदमे में एफआर लग चुकी थी। जो जांच हुई थी पुलिस ने की थी अब इसमें आगे क्या है मुझे नहीं पता।
- सचिन उपाध्याय
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून। कांग्रेस नेता के भाई सचिन उपाध्याय के खिलाफ धोखाधड़ी के मुकदमे में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को निरस्त करते हुए अदालत ने दोबारा विवेचना का आदेश दिया है। उपाध्याय के खिलाफ यह मुकदमा फरवरी 2017 में दर्ज हुआ था, जिसमें राजपुर पुलिस ने आठ माह बाद अंतिम रिपोर्ट लगा दी थी। अब न्यायालय ने थानाध्यक्ष राजपुर को खुद या किसी सक्षम उपनिरीक्षक से पुन: विवेचना कराए जाने के आदेश दिए हैं।
घटनाक्रम के अनुसार नोएडा निवासी मुकेश जोशी ने 14 फरवरी 2017 को राजपुर थाने में शिकायत की थी। मुकेश ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने वर्ष 2012 में सचिन उपाध्याय के खिलाफ दिल्ली में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि सचिन ने उनकी संपत्ति को फर्जी हस्ताक्षर कर खुर्द-बुर्द कर दिया है। मुकदमा दर्ज हुआ तो सचिन उपाध्याय ने समझौते के लिए कहा, जिसमें सचिन ने फर्जी हस्ताक्षर वाली बात कबूल की और मुकेश जोशी को 26,50000 रुपये देने की हामी भरी। सचिन ने रकम अदायगी तक मुकेश के पास देहरादून स्थित अपनी एक संपत्ति को भी गिरवी रखा। इसके कुछ दिनों बाद पता चला कि सचिन यह संपत्ति पहले ही बैंक में बंधक रख चुका है। मुकेश ने सचिन से बात की तो उसने पैसे देने से इंकार कर दिया। शिकायत पर राजपुर पुलिस ने सचिन के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, गाली गलौच और जान से मारने की धमकी देने के आरोप में मुकदमा दर्ज कर लिया।
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पुलिस ने जांच शुरू की और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए। पुलिस ने 10 दिसंबर 2017 को यह कहते हुए इस मुकदमे में अंतिम रिपोर्ट लगा दी कि वादी जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। यह भी कहा कि वादी मामले में रुचि नहीं ले रहा है। इस अंतिम रिपोर्ट को चुनौती देते हुए मुकेश जोशी ने अदालत में याचिका दायर की। इस पर गत 27 अप्रैल को अपर मुख्य दंडाधिकारी तृतीय विभा यादव की अदालत ने इस अंतिम रिपोर्ट को निरस्त कर दिया है।
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मेरे खिलाफ मुकदमे में एफआर लग चुकी थी। जो जांच हुई थी पुलिस ने की थी अब इसमें आगे क्या है मुझे नहीं पता।
- सचिन उपाध्याय