उत्तराखंड : अस्थाई अस्पताल में बना प्रदेश का पहला चिल्ड्रन कोविड वार्ड, ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए भी बेड आरक्षित
परिजनों को रोजाना मरीजों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए रैबार विभाग भी बनाया गया है।
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ऋषिकेश स्थित राइफल मैन जसवंत सिंह रावत अस्थाई अस्पताल में प्रदेश का पहला 90 बेड का चिल्ड्रन कोविड क्यूबिक वार्ड बनाया गया है। इसके अलावा अस्पताल में ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) के मरीजों के लिए 90 बेड आरक्षित रखे गए हैं।
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यह पहला अस्पताल होगा जहां परिजनों को रोजाना मरीजों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए रैबार विभाग भी बनाया गया है। अस्पताल में कोविड गाइडलाइन और विदेश के बड़े संस्थानों की चिकित्सा विधि के आधार पर मरीजों का उच्चस्तरीय इलाज किया जाएगा।
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तीसरी लहर के बच्चों के संक्रमित होने की आशंका और ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों ध्यान में रखते हुए राइफल मैन जसवंत सिंह रावत अस्थाई अस्पताल का निर्माण किया गया है। अस्थाई अस्पताल के प्रभारी और एम्स ट्रॉमा विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कि अस्पताल में 90-90 बेड का चिल्ड्रन कोविड क्यूबिक वार्ड और म्यूकोरमाइकोसिस क्यूबिक कोविड वार्ड बनाया गया है।
हालांकि सामान्य कोविड मरीजों की संख्या के आधार पर चिल्ड्रन और म्यूूूकोरमाइकोसिस के वार्ड को घटाया बढ़ाया जा सकता है। अस्पताल की पहली प्राथमिकता कोविड संक्रमित को भर्ती कर उसका तत्काल इलाज शुरू करने की होगी। इसके अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका के आर. एडम्स काउली शॉक ट्रॉमा सेंटर से भी मरीजों के इलाज के लिए विशेषज्ञ परामर्श लिया जाएगा।
तीमारदार अपने मरीज के स्वास्थ्य की रियल टाइम जानकारी ले सकता है
डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कि अस्पताल में एक रैबार विभाग भी बनाया गया है। इसका काउंटर अस्पताल के बाहर है। इसमें एक डिस्पले स्क्रीन भी लगाई गई है। काउंटर में संपर्क कर तीमारदार अपने मरीज के स्वास्थ्य की रियल टाइम जानकारी ले सकता है।
उन्होंने बताया कि एमबीबीएस प्रशिक्षुओं की रैबार टीम भी तीमारदारों को उनके मरीज के स्वास्थ्य की दैनिक जानकारी उपलब्ध कराएगी। डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कई बार मरीज के तीमारदार पर मानसिक दबाव बढ़ जाता है। कुछ तीमारदारों के घर एक से ज्यादा लोग भी संक्रमित होते हैं।
इससे उनका मनोबल पूरी तरह से टूट जाता है। ऐसे तीमारदारों की मनोविज्ञान विभाग की टीम के माध्यम से काउंसिलिंग कराई जाएगी।
अस्थाई अस्प्ताल में वेंटिलेटर बेड का संचालन मुश्किल
डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कि एम्स ऋषिकेश में ही 100 वेंटिलेंट बेड का संचालन किया जाएगा। अस्थाई अस्पताल के गंभीर मरीज एम्स में ही भर्ती कराए जाएंगे। डॉ. मधुर उनियाल ने बताया कि असल में अस्थाई अस्पताल में वेटिलेंटर बेड का संचालन बहुत मुश्किल होता है। वेंटिलेंटर तो खरीदना आसान है। लेकिन वेंटिलेटर बेड के संचालन के लिए प्रशिक्षित स्टाफ जुटाना मुश्किल होता है। जबकि पहले से तैयार सेटअप में तो आप संसाधन बढ़ा सकते हैं।