उत्तराखंड : कोरोना से माता-पिता की मौत पर बच्चों की देखभाल को सरकार की योजना तैयार
इसके लिए राज्य स्तर पर निदेशक महिला कल्याण योगेंद्र यादव को एवं जिलों में जिलाधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
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कोरोना से माता-पिता की मौत पर सरकार की ओर से बच्चों की देखभाल के लिए योजना तैयार कर ली गई है। इसके लिए राज्य स्तर पर निदेशक महिला कल्याण योगेंद्र यादव को एवं जिलों में जिलाधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
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वहीं पांच सरकारी और 21 स्वयं सेवी संस्थाओं के माध्यम से चलने वाले बाल केंद्रों को भी आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य ने कहा कि सरकार हर बच्चे की देखभाल के लिए प्रतिबद्ध है।
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प्रदेश में कोरोना की दूसरी लहर से कई बच्चों के माता-पिता या फिर दोनों में से किसी एक की मौत की लगातार खबरें आ रही हैं। मंत्री रेखा आर्य के मुताबिक अपने माता-पिता या फिर दोनों में से किसी एक को खो चुके इस तरह के जरूरतमंद बच्चों की देखभाल के लिए सरकार कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगी।
इस तरह के बच्चों को चिन्हित कर उनकी मदद की जा सके, इसके लिए प्रदेश एवं राज्य स्तर पर नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। महिला कल्याण विभाग में पहले से चल रही स्पांसरशिप योजना के तहत भी इस तरह के बच्चों की मदद की जाएगी।
बच्चों की देखभाग के लिए देहरादून, हरिद्वार और अल्मोड़ा में शिशु गृह, बालक एवं बालिका गृह चल रहे हैं। इन गृहों में बच्चों की देखभाल के साथ ही उनकी पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार वहन करती है। इसके अलावा 21 एनजीओं के माध्यम से भी इस काम में सहयोग किया जा रहा है।
कोरोना मरीजों के रजिस्ट्रेशन फॉर्म में अगल से कॉलम बनाने की तैयारी
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री ने कहा कि कोरोना मरीजों के रजिस्ट्रेशन फार्म में अलग से एक कॉलम बनाने की तैयारी है। जिसमें मरीज के अस्पताल में भर्ती होते ही उनके बच्चों का विवरण दर्ज किया जाएगा। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि यदि कोई अनहोनी हो जाए तो बच्चों को किसके सुपुर्द किया जाए।
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास राज्यमंत्री रेखा आर्य ने कहा कि इसके लिए स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखा जा रहा है। इसके पीछे सरकार की यह मंशा है कि किसी तरह की अनहोनी होने पर बच्चों की सही से देखभाल हो सके और बच्चे गलत हाथों में न जाए।
इन योजनाओं से भी मिलेगी मदद
अपने माता-पिता या फिर दोनों में से किसी एक को खो चुके जरूरतमंद बच्चों की मदद के लिए सरकार की आरे से स्पांसरशिप योजना, पोषण देखभाल सहित कई अन्य योजनाएं चलाई जा रही है। स्पांसरशिप योजना के तहत बच्चों की देखभाल करने वाले उसके रिश्तेदारों को दो हजार रुपये प्रति महीने सरकार की ओर से दिए जाते हैं। विभागीय राज्यमंत्री ने कहा कि जरूरतमंद बच्चों की देखभाल के लिए सरकार की ओर से अपील भी जारी की जा रही है।
बाल आयोग की ओर से उठाए जा रहे कदम
कोरोना महामारी की वजह से बनी मुश्किल की इस घड़ी में जरूरतमंद बच्चों की देखभाल के लिए बाल आयोग की ओर से भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी के मुताबिक यह ऐसा समय है, जब बहुत सारे ऐसे असामाजिक तत्व और गिरोह सक्रिय हो जाते हैं, जो नाबालिग बालक व बालिकाओं से सहानुभूति जताते हुए ह्यूमन ट्रैफिकिंग कर कई तरह के लाभ उठाने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में आयोग ने पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा है।