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उत्तराखंड में कोरोना: 24 घंटे में 8390 नए संक्रमित मिले, 118 की मौत, एक्टिव केस 71 हजार पार

Sat, 08 May 2021 08:21 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, ऋषिकेश Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 08 May 2021 08:21 PM IST
सार

साथ ही एक्टिव केस की संख्या भी 71 हजार से ज्यादा पहुंच गई है।

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Coronavirus Covid 19 pandemic in Uttarakhand update 8 may, new infected and death update
कोरोना जांच कराते लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उत्तराखंड में 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के  8390 नए संक्रमित मिले हैं, वहीं 118 मरीजों की मौत हुई है। साथ ही एक्टिव केस की संख्या भी 71 हजार से ज्यादा पहुंच गई है।

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आज 4771 मरीजों को ठीक होने के बाद डिस्चार्ज किया गया। प्रदेश में अब तक 2 लाख 38 हजार 383 संक्रमित मरीज आ चुके हैं, जिसमें से 1 लाख 58 हजार 903 मरीज स्वस्थ हुए हैं।
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बेकाबू हो रहे हालात: कोरोना का हॉटस्पॉट बना देहरादून, देश के टॉप-10 संक्रमित जिलों में हुआ शामिल

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक देहरादून जिले में सबसे अधिक 3430 कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं।

हरिद्वार जिले में 812, नैनीताल में 636, ऊधमसिंह नगर में 1159, पौड़ी में 230, टिहरी में 424, रुद्रप्रयाग में 271, पिथौरागढ़ में 208, उत्तरकाशी में 266, अल्मोड़ा में 247, चमोली में 175, बागेश्वर में 237 और चंपावत में 322 संक्रमित मिले।

वहीं, प्रदेश में अब तक 3548 मरीजों की मौत हो चुकी है। साथ ही सक्रिय मरीजों की संख्या 71174 हो गई है।

प्रख्यात पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा ऋषिकेश एम्स में भर्ती, कोरोना रिपोर्ट आई थी पॉजिटिव

पदम विभूषण और चिपको आंदोलन के प्रणेता सुंदरलाल बहुगुणा को ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराया गया है। वे पिछले एक  सप्ताह से बुखार से पीड़ित थे।

देहरादून में ही एक निजी लैब में टेस्ट कराने पर उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। फिलहाल उन्हें सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं है। उनका स्वास्थ्य स्थिर बना हुआ है।

यह जानकारी ऋषिकेश एम्स के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी हरीश थपलियाल के हवाले से दी गई है।

टीएचडीसी और एचसीसी कार्यालयों को किया सैनिटाइज 

जोशीमठ की नगर पंचायत पीपलकोटी और नगर पालिका जोशीमठ की ओर से कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए नगर क्षेत्रों को सैनिटाइज किया गया। पीपलकोटी में नगर पंचायत अध्यक्ष रमेश बंडवाल और अधिशासी अधिकारी टंकार कौशल के नेतृत्व में टीएचडीसी और एचसीसी कार्यालयों व परिसर के आसपास सैनिटाइजर का छिड़काव किया गया।

नगर क्षेत्र के ग्रेफ कैंप, उदय पैलेस, मायापुर, गडोरा क्षेत्र को भी सैनिटाइज किया गया। इस मौके पर प्रवीण कंडेरी, देवेंद्र, रिंपल आदि मौजूद थे। वहीं, जोशीमठ में नगर पालिका की ओर से नगर के विभिन्न वार्डों को सैनिटाइज किया गया। संवाद

कोविड संकट में शादियां टाल सकें टालें: सुबोध

प्रदेश में शादियां कोरोना संक्रमण के फैलाव की एक बड़ी वजह मानी जा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में हो रही शादियों में बाहर से आ रहे मेहमानों से संक्रमण की संभावना बन रही है। यही वजह है कि शासकीय प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल ने लोगों से अपील की है कि यदि संभव हो तो वे शादियां टाल दें।
 
बकौल उनियाल, यह बेहद चिंताजनक है कि पर्वतीय क्षेत्रों के दूरदराज गांव में भी कोरोना संक्रमण पहुंच गया है। इसके वहां पहुंचने की एक बड़ी वजह शादी समारोह हैं। हालांकि प्रदेश सरकार ने विवाह समारोह में मेहमानों की संख्या को सीमित किया है। लेकिन संक्रमण का फैलाव रुक नहीं रहा है।

उनियाल के मुताबिक, उनकी नरेंद्रनगर विधानसभा के गांवों में कोरोना संक्रमण के पहुंचने की एक बड़ी वजह शादी समारोह माना जा रहा है। बहरहाल, उनकी लोगों से अपील है कि कोरोना संकट को देखते हुए यदि संभव हो सके तो शादियां स्थगित कर दें। वर्तमान की हालात सामान्य नहीं हैं। जब स्थितियां सामान्य हो जाएंगी तो विवाह समारोह किए जा सकते हैं।

उधर, मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने एक समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए शादी व विभिन्न समारोह में निर्धारित संख्या से अधिक यदि लोग जुटते हैं, सख्त कार्रवाई की जाए। सूत्रों के मुताबिक, सरकार को यह फीडबैक मिला है कि विवाह समारोह से संक्रमण का फैलाव तेजी से हो रहा है। बेशक सरकार ने लोगों की संख्या सीमित की है, लेकिन अब शादियों में ज्यादा लोग जुट रहे हैं। कई जगहों पर कोविड गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा है।

कोविड से जंग में एम्स के 110 सिपाही संक्रमित हुए, आधे फिर मरीजों की सेवा में जुटे

कोरोना की दूसरी लहर से जंग के दौरान ऋषिकेश एम्स के 110 डॉक्टर और कर्मचारी संक्रमित हुए। वहीं इनमें 50 कर्मचारी संक्रमण को मात देने के बाद फिर से मरीजों को महमारी से बचाने में जुट गए हैं। सबसे खास बात संक्रमित होने वाले एम्स के किसी भी कोरोना योद्धा में संक्रमण के गंभीर लक्षण नहीं दिखे। एम्स के विशेषज्ञ कोविड टीकाकरण को डॉक्टरों और कर्मचारियों के सुरक्षित रहने का सबसे बड़ा कारण मान रहे हैं।

कोविड का नया स्ट्रेन देश प्रदेश में कहर ढा रहा है। प्रदेश में संक्रमितों और मौत के आंकड़ो में लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में हमारे स्वास्थ्यकर्मी पहली कतार में खड़े हाकर संक्रमण से टक्कर ले रहे हैं। खासकर एम्स ऋषिकेश गंभीर संक्रमितों को बचाने में बेहद अहम भूमिका निभा रहा है। एम्स ऋषिकेश के तीन हजार डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी, सफाई कर्मी और अन्य कर्मचारी दिन रात मरीजों कीर ढाल बनकर काम कर रहे हैं।

कोविड की दूसरी लहर का एम्स ऋषिकेश पर भी बड़ा असर रहा। एम्स ऋषिकेश के वरिष्ठ जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल ने बताया कि अप्रैल माह की शुरुआत से संस्थान के 110 डॉक्टर और अन्य कर्मचारी संक्रमित हुए। इनमें से 50 कर्मचारी 15 दिन की आइसोलेशन अवधि पूरी करने के बाद काम पर लौट आए।

हरीश मोहन थपलियाल ने बताया कि किसी भी कर्मचारी में कोविड के गंभीर लक्षण सामने नहीं आए। उन्होंने बताया कि करीब 90 फीसदी कर्मचारियों को दोनों कोविड टीके लग गए थे। जबकि 10 फीसदी कर्मचारियों एक टीका लगा था। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों के अनुसार कोविड टीके चलते ही डाक्टरों और अन्य कर्मचारियों में कोविड के गंभीर लक्षण प्रकट नहीं हुए।

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