2021 महाकुंभ के लिए हरिद्वार में साधु संतों के बीच जाएंगे सीएम, अखाड़ा प्रमुखों से करेंगे बात
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उत्तराखंड सरकार ने 2021 में होने वाले महाकुंभ की तैयारी को कमर कस ली है। प्रधानमंत्री मोदी से महाकुंभ के लिए मदद मांगने के बाद अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत साधु संतों और महात्माओं के बीच जाएंगे। 16 जून को मुख्यमंत्री हरिद्वार में अखाड़ा प्रमुखों के अलावा अन्य साधु महात्माओं के साथ मंथन करेंगे। उधर, साधु संतों ने भी महाकुंभ के लिए अपने स्तर से तैयारी शुरू कर दी है। सरकार से वार्ता से पहले सभी अखाड़ों ने 15 जून को बैठक रखी है।
उत्तर प्रदेश सरकार के इलाहाबाद में अर्द्धकुंभ के भव्य आयोजन के बाद उत्तराखंड सरकार पर हरिद्वार कुंभ को सफलता पूर्वक आयोजित करने का दबाव है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह कह चुके हैं कि हरिद्वार महाकुंभ भी प्रयाग अर्द्धकुंभ से बढ़कर होगा। इसके बाद त्रिवेंद्र सरकार ने सरकारी मशीनरी को भी महाकुंभ से संबंधित अवस्थापना विकास के लिए कमर कसने को कहा है। धर्मनगरी को यातायात के दबाव से बचाने और घाटों को सुविधा संपन्न बनाने की योजनाओं पर भी तेजी से काम शुरू हो गया है। महाकुंभ से पहले हरिद्वार-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण किया जाना है।
मुख्यमंत्री स्वयं महाकुंभ की तैयारियों की मानिटरिंग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी से महाकुंभ के लिए आर्थिक मदद मांगी है। केंद्र से मिले आश्वासन के बाद अब मुख्यमंत्री हरिद्वार के साधु संतों के बीच जाएंगे। सरकार के सामने बड़ी दिक्कत यह है कि प्रयाग में आयोजन के लिए विशाल क्षेत्र उपलब्ध है, जबकि हरिद्वार में सीमित स्थान के भीतर सभी सुविधाओं को उपलब्ध करवाना है। इसके लिए अखाड़ों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण रहेगा। मुख्यमंत्री इसी उद्देश्य से साधु संतों के बीच जाकर उनको तैयारियों से अवगत करवाने के साथ उनसे सुझाव लेंगे।
महाकुंभ के लिए तैयारियों जोरों पर है। केंद्र से इसके लिए पूरा सहयोग मिल रहा है। मुख्यमंत्री 16 जून को हरिद्वार जा रहे हैं। साधु संतों और महात्माओं के साथ मुख्यमंत्री की एक अहम बैठक है।
- मदन कौशिक, कैबिनेट मंत्री व शासकीय प्रवक्ता
अर्द्धकुंभ कांग्रेस, महाकुंभ भाजपा के हिस्से
2021 में प्रस्तावित हरिद्वार महाकुंभ के लिए भाजपा सरकार उत्साहित है। यह दिलचस्प संयोग है कि उत्तराखंड बनने के बाद दूसरा महाकुंभ भी भाजपा के कार्यकाल में आ रहा है। हिंदुत्व के झंडे को हमेशा बुलंद रखने वाली भाजपा के लिए यह एक ऐसा मौका होगा, जबकि वह हिंदुओं के बडे़ धार्मिक आयोजन में अहम भूमिका निभाने की स्थिति में होगी। हरिद्वार कुंभ से जुड़ा एक और दिलचस्प तथ्य भी है। अब तक हरिद्वार में राज्य बनने के बाद दो अर्द्धकुंभ हुए हैं और दोनों ही कांग्रेस के शासनकाल में हुए हैं। इस लिहाज से कहें, तो कांग्रेस सरकार को कभी महाकुंभ के आयोजन का मौका नहीं मिला है।
उत्तराखंड राज्य बनने के बाद हरिद्वार में सबसे पहले कुंभ का अवसर 2004 में आया। यह अर्द्धकुंभ था और प्रदेश में कांग्रेस की एनडी तिवारी सरकार काबिज थी। इसके बाद, वर्ष 2010 में महाकुंभ का मौका आया। प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और सीएम डॉ.रमेश पोखरियाल निशंक थे। निशंक सरकार ने इस महाकुंभ में आठ करोड़ लोगों के हरिद्वार में आने का दावा किया था। वर्ष 2016 में हरिद्वार में अर्द्धकुंभ का आयोजन हुआ।
प्रदेश में कांग्रेस की हरीश रावत सरकार ने इस आयोजन के लिए पूरी व्यवस्था की। एक बार फिर से हरिद्वार महाकुंभ के लिए तैयार हो रहा है। 2022 की जगह इस बार एक वर्ष पहले यानी 2021 में महाकुंभ का आयोजन प्रस्तावित किया गया है। प्रदेश में भाजपा की त्रिवेंद्र सरकार इसके लिए एक्शन मोड में आ गई है। जिस तरह से 2019 के चुनाव में हिंदुत्व मुद्दे का उभार रहा और इससे पहले प्रयागराज में कुंभ के आयोजन ने सुर्खियां बटोरी, उसमें हरिद्वार के महाकुंभ भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण आयोजन बनने जा रहा है।