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सरकारी योजना के नाम पर इंस्टीट्यूट से ठगी
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सरकारी योजना के तहत टेंडर दिलाने के नाम पर दून के एक इंस्टीट्यूट से ठगी का मामला सामने आया है। आरोपियों ने खुद को एनएसडीसी (नेशनल स्किल डवलपमेंट काउंसिल) का सदस्य बताया था। आरोपी और रकम की मांग कर रहे थे, लेकिन इसी बीच इंस्टीट्यूट के सीईओ ने एनएसडीसी से संपर्क कर लिया। पता चला कि वह धोखाधड़ी का शिकार हो गए हैं।
धोखाधड़ी सुभाष रोड स्थित एक इंस्टीट्यूट के साथ हुई है। सीईओ डॉ. पियूष मित्तल ने बताया कि उनका इंस्टीट्यूट विभिन्न कौशल विकास योजनाओं के तहत छात्रों को ट्रेनिंग देता है। यह योजनाएं केंद्र और राज्य सरकार की होती हैं। गत दिनों उन्हें ईएसएससी के नाम से एक ई-मेल आया था। इस मेल में वेबसाइट का एड्रेस भी था। इस वेबसाइट को खोला गया तो एकदम सरकारी वेबसाइट जैसी दिख रही थी। वेबसाइट पर एक टेंडर नोटिस भी था, जिसमें सरदार बल्लभ भाई पटेल यंग ओरिएंटेड स्कीम का जिक्र था। इस टेंडर के तहत 2000 बच्चों को पढ़ाने की बात कही गई थी। इसके लिए 56 हजार रुपये फीस ली गई।
कुछ दिन बाद उन्होंने और रकम की मांग की। इस पर उन्हें शक हो गया। उन्होंने एनएसडीसी को ई-मेल की तो वहां से जवाब आया। पता चला कि इस तरह का कोई इंस्टीट्यूट उनका मेंबर नहीं है। न ही इस तरह की कोई स्कीम किसी सरकार की ओर से चलाई गई है। इस मामले में उन्होंने साइबर थाने को शिकायत की। साइबर थाने की जांच के बाद जीरो एफआईआर दर्ज की गई। इसे डालनवाला में ट्रांसफर किया गया। इंस्पेक्टर डालनवाला मणिभूषण श्रीवास्तव ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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धोखाधड़ी सुभाष रोड स्थित एक इंस्टीट्यूट के साथ हुई है। सीईओ डॉ. पियूष मित्तल ने बताया कि उनका इंस्टीट्यूट विभिन्न कौशल विकास योजनाओं के तहत छात्रों को ट्रेनिंग देता है। यह योजनाएं केंद्र और राज्य सरकार की होती हैं। गत दिनों उन्हें ईएसएससी के नाम से एक ई-मेल आया था। इस मेल में वेबसाइट का एड्रेस भी था। इस वेबसाइट को खोला गया तो एकदम सरकारी वेबसाइट जैसी दिख रही थी। वेबसाइट पर एक टेंडर नोटिस भी था, जिसमें सरदार बल्लभ भाई पटेल यंग ओरिएंटेड स्कीम का जिक्र था। इस टेंडर के तहत 2000 बच्चों को पढ़ाने की बात कही गई थी। इसके लिए 56 हजार रुपये फीस ली गई।
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कुछ दिन बाद उन्होंने और रकम की मांग की। इस पर उन्हें शक हो गया। उन्होंने एनएसडीसी को ई-मेल की तो वहां से जवाब आया। पता चला कि इस तरह का कोई इंस्टीट्यूट उनका मेंबर नहीं है। न ही इस तरह की कोई स्कीम किसी सरकार की ओर से चलाई गई है। इस मामले में उन्होंने साइबर थाने को शिकायत की। साइबर थाने की जांच के बाद जीरो एफआईआर दर्ज की गई। इसे डालनवाला में ट्रांसफर किया गया। इंस्पेक्टर डालनवाला मणिभूषण श्रीवास्तव ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
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