टैक्सी बिल घोटाला: स्वास्थ्य विभाग के दस अधिकारियों को चार्जशीट, पूर्व निजी सचिवों पर मेहरबानी
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चर्चित टैक्सी बिल घोटाले में स्वास्थ्य विभाग के दस अधिकारियों को चार्जशीट दी गई है। स्वास्थ्य विभाग में 2009 से लेकर 2013 तक मुख्यमंत्रियों के टूर के नाम पर टैक्सी बिलों का भुगतान किया गया। यह भुगतान तकरीबन पौने दो करोड़ रुपये का था।
जांच में सामने आया कि अधिकारियों ने ट्रैवल एजेंसियों के साथ मिलकर गलत तरीके से भुगतान करा लिया। इस मामले में कोषागार, शासन और स्वास्थ्य महानिदेशालय व सीएमओ कार्यालयों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई थी।
टैक्सी बिल घोटाले को लेकर कई मुकदमे राज्य के अलग-अलग थानों में दर्ज हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसर इस फर्जीवाड़े का ठीकरा तत्कालीन मुख्यमंत्रियों के निजी सचिवों पर थोपते रहे और निजी सचिव बिलों को फर्जी बताते रहे।
पुलिस की जांच में पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक के एक निजी सचिव की हैंडराइटिंग फर्जी बिलों से मिल गई थी। मगर ऊंचे कनेक्शन के चलते उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इधर, बीते दिनों मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई संपन्न करने के निर्देश दिए, जिस पर स्वास्थ्य विभाग ने दस अधिकारियों को चार्जशीट जारी की है, जिनमें राज्य के विभिन्न जिलों के चिकित्साधिकारियों के नाम शामिल हैं।
कुल 12 थे दोषी, दो की हुई मौत
जिन अफसरों को चार्जशीट दी गई है, उनके नाम डॉ. आरएस असवाल, डॉ. एमपी अग्रवाल, डॉ. दीपा शर्मा, डॉ. मीनू, डॉ. वीके गैरोला, डॉ. एसडी सकलानी, डॉ. राकेश सिन्हा, डॉ. जीसी नौटियाल, डॉ. आरके पंत और डॉ. वाईएस राणा शामिल हैं। इस क्रम में अभी सचिवालय प्रशासन की ओर से की जाने वाली कार्रवाई का इंतजार है।
टैक्सी बिल घोटाले की स्वास्थ्य विभाग ने जांच कराई थी, जिसमें विभाग के 12 अधिकारी दोषी पाए गए थे। महानिदेशक स्वास्थ्य ने इस मामले की समग्र जांच का आग्रह किया। इस पर शासन ने अपर सचिव आशीष जोशी से इसकी जांच कराई। उन्होंने आधी अधूरी रिपोर्ट सौंप दी थी। बाद में संयुक्त सचिव आरआर सिंह की जांच में स्वास्थ्य विभाग के 12 अफसर और दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के पांच निजी सचिव दोषी पाए गए। उन्होंने मामले की सीबीसीआईडी जांच की जरूरत बताई।
लेकिन गृह विभाग ने इससे इंकार कर दिया था। इसी रिपोर्ट के आधार पर दस लोगों को चार्जशीट जारी की गई है। दो अन्य आरोपी डॉ. गुरपाल सिंह और डॉ. हटवाल की मौत हो चुकी है। पूर्व मुख्यमंत्री के निजी सचिव ने टैक्सी के जिस फर्जी बिल पर हस्ताक्षर किए हैं, वह नंबर एक स्कूटर का निकला था। आरटीओ ऑफिस से कराए गए सत्यापन में यह बात सही पाई गई थी।