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उत्तराखंडः श्राइन बोर्ड के ‘यज्ञ’, चारधाम विकास परिषद की ‘आहुति’
Thu, 22 Aug 2019 02:30 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Thu, 22 Aug 2019 02:30 PM IST
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चारधाम श्राइन मैनेजमेंट बोर्ड के यज्ञ में चार धाम विकास परिषद ने अपनी आहुति डाली है। सरकार श्राइन बोर्ड के गठन की जिस कसरत में जुटी है, उसके लिए विकास परिषद ने काफी होमवर्क किया है। चारधाम यात्रा विकास परिषद ने बाकायदा एक ड्राफ्ट बनाकर सरकार को सौंपा है। इस ड्राफ्ट के साथ कई और चीजों को जोड़कर सरकार इस मामले में आगे बढ़ रही है।
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चारधाम यात्रा विकास परिषद ने पिछले दिनों ड्राफ्ट सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत को सौंपा था। इसके बाद, संस्कृति विभाग इस मसले में आगे बढ़ रहा है। मुख्य सचिव को श्राइन बोर्ड के संबंध में प्रस्तुतीकरण के दौरान चारधाम यात्रा विकास परिषद के ड्राफ्ट की तमाम बातों पर विस्तार से चर्चा हुई है।
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चारधाम यात्रा विकास परिषद के उपाध्यक्ष आचार्य शिव प्रसाद ममगांई का कहना है कि सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर श्राइन मैनेजमेंट बोर्ड की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। एक एक्ट बनाकर श्राइन बोर्ड का गठन जल्द से जल्द होगा।
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श्राइन मैनेजमेंट बोर्ड के लिए प्रस्तावित ड्राफ्ट की अहम बातें
बोर्ड का प्रस्तावित ढांचा, सदस्यों की स्थिति
एक ऐसा बोर्ड होगा, जो चारधाम मंदिर के विकास और प्रबंधन के लिए मुख्य शासी निकाय होगा। सीएम बोर्ड के अध्यक्ष होंगे। राज्य सरकार के स्तर पर नामित दो व्यक्ति, जो उत्तराखंड के गढ़वाल और कुमाऊं मंडल क्षेत्र के सांसद होंगे, इसके अलावा एक पूर्णकालिक उपाध्यक्ष नामित किया जाएगा। पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय भारत से सरकार से विशेष रूप से आमंत्रित अधिकारी, जो संयुक्त सचिव से निम्न स्तर का नहीं होगा, उसे भी सदस्य नामित किया जाएगा। इसके अलावा, मुख्य सचिव और पर्यटन, संस्कृति सचिव पदेन सदस्य होंगे। दोनों मंडलों के दो विधायक, विभिन्न क्षेत्रों के तीन व्यक्ति, जिन्हें राज्य सरकार नामित करेगी, सदस्य होंगे। द्वारिका, श्रृगेरी, पुरी और ज्योतिषपीठ में से एक व्यक्ति को सदस्य नामित किया जाएगा। धर्मायुक्त और सह धर्मायुक्त जैसे पदाें की भी व्यवस्था होगी। इन पदों पर नियुक्त अफसरों का भी हिंदू होना जरूरी होगा। अध्यक्ष को पद छोड़ना होगा तो वह राज्यपाल को इस्तीफा भेजेगा और उपाध्यक्ष को पद छोड़ना होगा तो वह अध्यक्ष को सूचित करेगा। सदस्य अध्यक्ष को सूचित कर पद छोड़ सकता है। बोर्ड के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों के लिए तमाम योग्यताओं के अलावा ये भी जरूरी होगा, कि वह हिंदु धर्म से हों और धर्म से संबंधित जानकारी रखते हों।
न्यासियों, पुजारियों, रावलों आदि की नियुक्ति
प्रत्येक न्यासी पद और गोपनीयता की शपथ ग्रहण करने की तिथि से पांच वर्ष की अवधि के लिए पद पर रहेगा। न्यासियों की नियुक्ति के लिए प्रार्थना पत्र आमंत्रित किए जाएंगे और सत्यापन भी होगा। गैर वंशानुगगत न्यासी या पुजारी की पदावधि पांच वर्ष होगी। वंशानुगत पुजारी या न्यासी न होने पर धर्मायुक्त गैर वंशानुगत पुजारी या न्यासी नियुक्त कर सकेंगे। बदरीनाथ और केदारनाथ के पवित्र स्थलों पर पूजा करने वाला रावल और नायब रावव नंबूदरी ब्राह्मण परिवार से होगा। चारों धाम के लिए रावल और पुजारी की नियुक्ति और कर्तव्य सौंपने की वर्तमान परंपरा का पालन किया जाएगा।
धार्मिक संस्थाओं की आय के आधार पर सूची
धर्मायुक्त अलग धार्मिक स्थलों की आय की अलग-अलग सूची तैयार करेगा और उसे प्रकाशित करेगा। चारों धामों के लिए निश्चित प्रारूप पर पंजिका तैयार की जाएगी और उसका रखरखाव किया जाएगा। इसके अलावा, मंदिरों से जुड़ा इतिहास, प्रशासनिक व्यवस्था और व्यय आदि का हिसाब किताब भी रखा जाएगा। पंजिकाओं का वार्षिक सत्यापन कराना अनिवार्य रहेगा।
संपत्ति का बोर्ड में निहित होने की व्यवस्था
समस्त संपत्तियां, जिन पर एक्ट लागू होगा और जो एक्ट के लागू होने से पहले सरकार, जिला पंचायत, नगर पालिका या अन्य स्थानीय प्राधिकारी, या किसी कंपनी सोसायटी, संगठन, के कब्जे में हैं, वह सब बोर्ड के अधीन होंगी।
यात्री सुविधाओं का विस्तार और व्यवस्था
यात्री सुविधा के लिए मूलभूत सुविधाओं का विकास, स्वच्छ और स्वस्थ सार्वजनिक परिवहन प्रदान करना और पर्यावरण सुधार सहित औद्यानिक क्रियाकलाप जैसी बातों पर फोकस किया जाएगा। धार्मिक प्रचार, शिक्षण संस्थाओं की स्थापना और रखरखाव, ज्योतिष, वेदों, संस्कृत और फलित ज्योतिष आदि की शिक्षा का प्रचार और छात्रों का प्रशिक्षण की व्यवस्था करना। मंदिरों में आने वाले संतों, तीर्थ यात्रियों और ऐसी संस्थाओं में नियुक्त कर्मचारियों के लिए स्वास्थ्य, सुरक्षा और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करना।
सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने चारधाम यात्रा परिषद से ये अपेक्षा की थी कि श्राइन बोर्ड के गठन के संबंध में हम एक ड्राफ्ट उपलब्ध कराए। कई जगहों की व्यवस्था का अध्ययन करने के बाद एक ड्राफ्ट सरकार को सौंपा गया है। वैष्णों देवी मंदिर और तिरूपति मंदिर के बोर्ड से जुड़ी व्यवस्थाएं हमारे सामने बेहतर उदाहरण के रूप में मौजूद हैं। जल्द ही एक दल इन दोनों जगहों पर जाकर अध्ययन भी करेगा।
-आचार्य शिव प्रसाद ममगांई, उपाध्यक्ष, चार धाम यात्रा विकास परिषद