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वन गुर्जरों की समस्याओं पर किया गया मंथन
Updated Wed, 22 Aug 2018 02:04 AM IST
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वन गुर्जरों की अनदेखी कर रही सरकार
ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
वन गुर्जरों को अधिकार संपन्न बनाने और समस्याओं पर मंथन के लिए मंगलवार को ‘रूरल लिटिगेशन एंड एनटाइटलमेंट केंद्र’ की ओर से रूलक सभागार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2006 को कड़ाई से लागू करने पर जोर दिया।
संस्था चेयरमैन पद्मश्री अवधेश कौशल ने कहा कि राज्य में वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2000 लागू नहीं होने से वन गुर्जर मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि प्रावधान के तहत जो वन गुर्जर परिवार तीन पीढ़ियों से या फिर 75 साल से वन क्षेत्रों में निवासरत है। उसे वनों में रहने और चार हेक्टेयर की जमीन का इस्तेमाल करने की अधिकार है। पद्मश्री अवधेश कौशल ने कहा कि वन गुर्जर समुदाय वनों की सुरक्षा के साथ वन्यजीवों के संरक्षण में पूरा सहयोग देते हैं। वन गुर्जर नूर जमाल ने कहा कि वन गुर्जर परिवार बेहद सीमित संसाधनों में अपना गुजारा करते हैं, लेकिन वन विभाग के अधिकार अक्सर परेशान करते हैं। वन गुर्जर रोशनदीन ने कहा कि हमें सरकार द्वारा दी जमीन पर स्वामित्व की पेचदगियां गिनाईं। संगोष्ठी के माध्यम से वन गुर्जरों ने गैंडीखाता को राजस्व ग्राम घोषित करने और सामान्य ग्रामीणों की तरह सरकारी योजनाओं का लाभ दिए जाने की मांग उठाई। वन गुर्जर सफी लोधा ने कहा कि हमारे राशन कार्ड जब्त कर लिए गए हैं। इससे हमें कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। हमारा इस्तेमाल महज मतदान के समय होता है। वन गुर्जर इरशाद ने कहा कि हम पिछले 150 साल से जंगलों में रह रहे हैं, लेकिन अतिक्रमण के नाम पर हमें बेदखल किया जा रहा है। गुलाम अली ने वन अधिकारियों पर जानवरों की खाल बेचने जानवरों का मरने के मामले में झूठा फंसाने का आरोप लगाया। संगोष्ठी को जय सिंह रावत, एके शर्मा समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
वन गुर्जरों को अधिकार संपन्न बनाने और समस्याओं पर मंथन के लिए मंगलवार को ‘रूरल लिटिगेशन एंड एनटाइटलमेंट केंद्र’ की ओर से रूलक सभागार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में वक्ताओं ने वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2006 को कड़ाई से लागू करने पर जोर दिया।
संस्था चेयरमैन पद्मश्री अवधेश कौशल ने कहा कि राज्य में वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2000 लागू नहीं होने से वन गुर्जर मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि प्रावधान के तहत जो वन गुर्जर परिवार तीन पीढ़ियों से या फिर 75 साल से वन क्षेत्रों में निवासरत है। उसे वनों में रहने और चार हेक्टेयर की जमीन का इस्तेमाल करने की अधिकार है। पद्मश्री अवधेश कौशल ने कहा कि वन गुर्जर समुदाय वनों की सुरक्षा के साथ वन्यजीवों के संरक्षण में पूरा सहयोग देते हैं। वन गुर्जर नूर जमाल ने कहा कि वन गुर्जर परिवार बेहद सीमित संसाधनों में अपना गुजारा करते हैं, लेकिन वन विभाग के अधिकार अक्सर परेशान करते हैं। वन गुर्जर रोशनदीन ने कहा कि हमें सरकार द्वारा दी जमीन पर स्वामित्व की पेचदगियां गिनाईं। संगोष्ठी के माध्यम से वन गुर्जरों ने गैंडीखाता को राजस्व ग्राम घोषित करने और सामान्य ग्रामीणों की तरह सरकारी योजनाओं का लाभ दिए जाने की मांग उठाई। वन गुर्जर सफी लोधा ने कहा कि हमारे राशन कार्ड जब्त कर लिए गए हैं। इससे हमें कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। हमारा इस्तेमाल महज मतदान के समय होता है। वन गुर्जर इरशाद ने कहा कि हम पिछले 150 साल से जंगलों में रह रहे हैं, लेकिन अतिक्रमण के नाम पर हमें बेदखल किया जा रहा है। गुलाम अली ने वन अधिकारियों पर जानवरों की खाल बेचने जानवरों का मरने के मामले में झूठा फंसाने का आरोप लगाया। संगोष्ठी को जय सिंह रावत, एके शर्मा समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
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