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किताबें 250 की तो कॉपियां 800 रुपये की

Sun, 08 Apr 2018 02:20 AM IST
Updated Sun, 08 Apr 2018 02:20 AM IST
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किताबें 250 की तो कॉपियां 800 रुपये की
किताबें 250 की तो कॉपियां 800 रुपये की
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
निजी स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने के आदेश के बाद अब पुस्तक विक्रेताओं ने निजी प्रकाशकों की पुस्तकों के हिस्से का मुनाफा कॉपियों से कमाना शुरू कर दिया है। कॉपियों के दाम दोगुने से भी ज्यादा बढ़ा दिए गए हैं। इस वजह से अभिभावक 250 रुपये की किताबें खरीद रहे हैं तो उन्हें कॉपियों के लिए 800 से 1000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। दूसरी ओर कमाई बढ़ाने के लिए पुस्तक विक्रेता अब एनसीईआरटी की सस्ती पुस्तकों पर जिल्द चढ़ाकर 25 से 30 रुपये महंगे दामों में बेच रहे हैं।
सरकार के इस सत्र से सीबीएसई से मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों में केवल एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाने के आदेश के बाद अब पुस्तक विक्रेताओं ने मुनाफे के दूसरे रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। अभिभावक इन तरीकों से हैरान और परेशान हैं। सरकार के आदेश के तहत उन्हें सस्ती किताबें तो मिल रही हैं लेकिन कॉपियों के दाम बढ़ा दिए गए हैं। 250 रुपये की पुस्तकें खरीदने वाले अभिभावकों को कॉपियों के लिए 800 से 1000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। कॉपियों के दामों में दो से तीन गुना तक की बढ़ोतरी कर दी गई है।
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शनिवार को एक विक्रेता के पास पुस्तकें लेने पहुंचे अभिभावक मुकेश ने बताया कि सरकार की सख्ती के बाद किताबें तो सस्ती मिली हैं लेकिन उसके साथ कॉपियों के दाम बढ़ दिए गए हैं। उनकी मांग है कि सरकार किताबों के साथ ही कॉपियों के दामों पर भी नियंत्रण करे। दूसरे अभिभावक नितिन ने जब एनसीईआरटी की किताबें खरीदी तो उन्हें प्रति पुस्तक 25 से 30 रुपये महंगी मिली। इसकी वजह यह थी कि पुस्तक विक्रेता ने इन पुस्तकों पर जिल्द चढ़ा दी, जिसके वह ज्यादा दाम ले रहा है। नितिन का कहना था कि पुस्तक पर कैसा कवर चढ़ेगा, यह फैसला अभिभावकों के पास होना चाहिए।
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फोटो-
डुप्लीकेट किताबों से अभिभावक चिंतित
- शिक्षकों ने कहा, डुप्लीकेट नहीं एनसीईआरटी पुस्तकों से पढ़ाएंगे
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून।
बाजारोें में बिक रही एनसीईआरटी की डुप्लीकेट किताबों ने अभिभावकों को चिंता में डाल दिया है। हूबहू एनसीईआरटी जैसी दिखने वाली इन किताबों से शिक्षक भी मुखर हो गए हैं। उनका कहना है कि वह एनसीईआरटी की पुस्तकों से ही पढ़ाएंगे। प्राइवेट प्रकाशकों की किताबों से नहीं पढ़ाएंगे।
शनिवार को बाजार मेें एनसीईआरटी किताबें की खोज में अनेक अभिभावक भटक रहे थे। जबकि दर्जनों अभिभावक अनजाने में ले ली गईं डुप्लीकेट किताबों को वापस कराने में जुटे हैं। कुछ दिनों से बाजारों में हूबहू दिखने वाली प्राइवेट पब्लिशर की डुप्लीकेट किताबें एनसीईआरटी की बताकर बेची जा रही है। जबकि कई स्कूलों के शिक्षकों ने डुप्लीकेट किताबोें से पढ़ाने से इंकार कर दिया। जिसके चलते काफी संख्या में अभिभावक डुप्लीकेट किताबें वापस लौटाने विक्रेताओं के पास पहुंचे। एक विक्रेताओं ने बताया की डिमांड न पूरी होने के चलते ही प्राइवेट पब्लिशर की किताबें बेच रहे हैं।

क्या कहते हैं अभिभावक - फोटो भी हैं-
कुछ दिन पहले ही मैं अपने बच्चों के लिए बाजार से एनसीईआरटी की किताबें लेकर गई लेकिन विक्रेताओं ने कुछ किताबोें के बदले हूबहू दिखने वाली प्राइवेट पब्लिशर की किताब दे दीं। अब टीचरों ने इन किताबों से पढ़ाने से इंकार कर दिया है। जिसके चलते किताबों को वापस करने के लिए यहां भटक रहे हैं।
- आरती
प्राइवेट पब्लिशरों ने अब नया तरीका निकाल लिया है। एनसीईआरटी की डुप्लीकेट किताबाें को बाजार में लाकर अभिभावकों की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। शिक्षक इन किताबों से पढ़ाने से इंकार कर रहे हैं। अब इन्हें वापस करने में परेशानी हो रही है। - अशोक पंवार

क्या कहते हैं टीचर
बाजारों में बिक रही डुप्लीकेट किताबों से हम नहीं पढ़ाएंगे। ऐसी जो भी किताब बच्चे लेकर आ रहे हैं, उसे तुरंत वापस करने की सलाह दे रहे हैं। - नितिन रॉक्सवैल,
एनसीईआरटी की डुप्लीकेट किताबें खुलेआम बिक रही हैं, जिसके चलते अभिभावक भी जल्दबाजी में किताबें खरीद रहे हैं। हम अभिभावकों को सलाह दे रहे हैं कि प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें न खरीदें। - जीके रोहिला


कुछ अभिभावकों ने जताया विरोध
देहरादून। एनसीईआरटी की किताबों में अध्ययन सामग्री को लेकर शनिवार को गांधी पार्क में कुछ महिला अभिभावकों ने जताया। उन्होंने एनसीईआरटी के कंटेंट पर सवाल उठाते हुए विरोध जताया। साथ ही राज्य सरकार से एनसीईआरटी की किताबों की अनिवार्यता के निर्णय को तुरंत वापस लेने की अपील की। विरोध प्रदर्शन के बाद वे राज्यपाल से मिलने राजभवन भी गईं लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो पाई। विरोध जताने वालों में गुंजन, रश्मि शर्मा, दीपिका नेगी, कुलवंत कौर, जेसिका राणा शामिल रहीं।
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