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प्रसव कक्षों में मिलेंगी उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सुविधाएं
Updated Sun, 15 Apr 2018 02:24 AM IST
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प्रसव कक्षों में मिलेंगी उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सुविधाएं
ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
राज्य के सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सुविधाएं मिलें, इसके लिए अस्पतालों में प्रसव कक्षों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्यूएएस) के मानकों पर बनाया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि राज्य के सरकारी अस्पतालाें में प्रसव कक्षों मेें उच्च स्तरीय सुविधाएं नहीं होने से कई बार प्रसूताओं के साथ नवजात की मौत हो जाती है। इस मृत्यु दर को रोकने के लिए केंद्र सरकार की ओर से मातृ-शिशु सुरक्षा योजना, जननी सुरक्षा योजना जैसी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बावजूद इसके कई राज्यों मेें मातृ-शिशु मृत्यु दर मेें कमी नहीं आ रही है। इसकी एक वजह सरकारी अस्पतालाें में प्रसव कक्षों में उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सेवाओं को अभाव है।
सरकारी अस्पतालों में गर्भवती को प्रसव के दौरान उच्च स्तरीय इलाज मिले, इससे लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा दिया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक युगल किशोर पंत ने बताया कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में प्रसव कक्षोें के उच्चीकरण लेकर प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा गया है। प्रसव कक्षों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड के मानकों पर तैयार करने की योजना है। इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत ‘लेबर रूम क्वालिटी इंप्रूवमेंट इनीसिएटिव प्रोग्राम’ भी चलाया जा रहा है। मिशन निदेशक के मुताबिक प्रस्ताव स्वीकृत होने और बजट जारी होने के साथ ही उच्चीकरण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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ब्यूरो/अमर उजाला
देहरादून।
राज्य के सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सुविधाएं मिलें, इसके लिए अस्पतालों में प्रसव कक्षों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्यूएएस) के मानकों पर बनाया जाएगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेज दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि राज्य के सरकारी अस्पतालाें में प्रसव कक्षों मेें उच्च स्तरीय सुविधाएं नहीं होने से कई बार प्रसूताओं के साथ नवजात की मौत हो जाती है। इस मृत्यु दर को रोकने के लिए केंद्र सरकार की ओर से मातृ-शिशु सुरक्षा योजना, जननी सुरक्षा योजना जैसी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। बावजूद इसके कई राज्यों मेें मातृ-शिशु मृत्यु दर मेें कमी नहीं आ रही है। इसकी एक वजह सरकारी अस्पतालाें में प्रसव कक्षों में उच्च स्तरीय चिकित्सकीय सेवाओं को अभाव है।
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सरकारी अस्पतालों में गर्भवती को प्रसव के दौरान उच्च स्तरीय इलाज मिले, इससे लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजा दिया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक युगल किशोर पंत ने बताया कि राज्य के सरकारी अस्पतालों में प्रसव कक्षोें के उच्चीकरण लेकर प्रस्ताव तैयार कर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजा गया है। प्रसव कक्षों को नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड के मानकों पर तैयार करने की योजना है। इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत ‘लेबर रूम क्वालिटी इंप्रूवमेंट इनीसिएटिव प्रोग्राम’ भी चलाया जा रहा है। मिशन निदेशक के मुताबिक प्रस्ताव स्वीकृत होने और बजट जारी होने के साथ ही उच्चीकरण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
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