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देहरादून की बिजली लाइनें होंगी भूमिगत
Updated Mon, 15 Oct 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
देहरादून। हरिद्वार के बाद अब राजधानी दून में भी एचटी व एलटी सभी बिजली लाइनों को भूमिगत किए जाने की तैयारी है। एशियन डेवलपमेंट बैंक ने योजना के लिए सैंद्धातिक सहमति दे दी है और मूल्यांकन का काम शुरू कर दिया है। दून के सभी इलाकों में बिजली लाइनों को भूमिगत करने में करीब 505 करोड़ का खर्च आएगा।
यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा ने बताया कि देहरादून मेें बिजली लाइनों को भूमिगत करने के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक ने 505 करोड़ का बजट मुहैया कराने की सैद्धांतिक सहमति दे दी है। एडीबी की ओर से योजना का मूल्यांकन कराया जा रहा है। मूल्यांकन पूरा होने के साथ ही लोन एग्रीमेंट समेत तमाम प्रक्रिया पूरी की जाएगी। योजना के पहले चरण में हरिद्वार में बिजली लाइनों को भूमिगत किया जा रहा है। निर्माण का जिम्मा फीडबैंक इंफ्रास्ट्रक्चर नामक कंपनी को सौंपा गया है। योजना पर कुल 388.49 करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा। बिजली लाइनें भूमिगत होने के बाद जहां लोगों को पूरे शहर में फैले तार के जालों से निजात मिलेगी वहीं, यातायात व्यवस्था भी सुगम होगी। इसके अलावा बिजली चोरी को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
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देहरादून। हरिद्वार के बाद अब राजधानी दून में भी एचटी व एलटी सभी बिजली लाइनों को भूमिगत किए जाने की तैयारी है। एशियन डेवलपमेंट बैंक ने योजना के लिए सैंद्धातिक सहमति दे दी है और मूल्यांकन का काम शुरू कर दिया है। दून के सभी इलाकों में बिजली लाइनों को भूमिगत करने में करीब 505 करोड़ का खर्च आएगा।
यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा ने बताया कि देहरादून मेें बिजली लाइनों को भूमिगत करने के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक ने 505 करोड़ का बजट मुहैया कराने की सैद्धांतिक सहमति दे दी है। एडीबी की ओर से योजना का मूल्यांकन कराया जा रहा है। मूल्यांकन पूरा होने के साथ ही लोन एग्रीमेंट समेत तमाम प्रक्रिया पूरी की जाएगी। योजना के पहले चरण में हरिद्वार में बिजली लाइनों को भूमिगत किया जा रहा है। निर्माण का जिम्मा फीडबैंक इंफ्रास्ट्रक्चर नामक कंपनी को सौंपा गया है। योजना पर कुल 388.49 करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा। बिजली लाइनें भूमिगत होने के बाद जहां लोगों को पूरे शहर में फैले तार के जालों से निजात मिलेगी वहीं, यातायात व्यवस्था भी सुगम होगी। इसके अलावा बिजली चोरी को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
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