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सड़क किनारे बनाए गए मंदिर टूटेंगे
Updated Thu, 22 Jun 2017 09:59 PM IST
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घनसली/लंबगांव। तहसील प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए भिलंगना और प्रतापनगर ब्लॉक में सड़क किनारे बने मंदिरों को ढहाने के लिए चिह्नित कर लिया गया है। प्रशासन की इस कवायद से लोगों में भारी रोष व्याप्त है।
प्रशासन ने बालगंगा तहसील के तहत घनसाली-चमियाला-बूढ़ाकेदार, एलकेसी और घनसाली-टिहरी मोटर मार्ग पर पांच-छह जगहों पर लंबे समय से बनाए गए छोटे-बड़े मंदिरों को चिह्नित कर तोड़ना शुरू कर दिया है। बदरी-केदार समिति के पूर्वं सदस्य और बेलेश्वर धाम मंदिर समिति के अध्यक्ष चंद्र किशोर मैठाणी, सुंदर सिंह कठैत, विशेश्वर प्रसाद और शिवराज सिंह कलूड़ा का कहना है कि लोगों की आस्था के केंद्र बने मंदिरों को नहीं तोड़ा जाना चाहिए जबकि प्रशासन मोटर मार्ग बनने से पहले बनाए गए मंदिरों को भी तोड़ रहा है। इससे लोगों में आक्रोश पनप रहा है।
उधर प्रतापनगर में भी प्रशासन ने लंबगांव, कोंटालगांव, प्रतापनगर, उत्तरकाशी और टिहरी मोटर मार्गों पर बने मंदिरों को तोड़ना शुरू कर दिया है। क्षेत्र के लोगों ने विधायक और डीएम से मंदिरों को ढहाने पर रोक लगाने की मांग की है। विधायक शक्ति लाल शाह का कहना है कि उत्तरखंड में मठ-मंदिर आस्था के केंद्र हैं, उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
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बालगंगा क्षेत्र में कोर्ट के आदेशानुसार छह मंदिरों को चिह्नित किया गया है। एलकेसी मोटर मार्ग पर केमुंडा खाली के पास देवी मंदिर, तीन पितृ मंदिर, बूढ़ाकेदार मोटर मार्ग पर चंफ्वा देवता मंदिर, सेंदुल गांव के पास दुर्गा देवी मंदिर, घनसाली के पास हनुमान मंदिर के साथ ही अन्य कई मंदिर हैं जो चिह्नित किए गए हैं।-मोहन लाल आर्य, तहसीलदार, बालगंगा
ग्रामीणों के विरोध पर बैरंग लौटी टीम
घनसाली (टिहरी)। चंफ्वा मंदिर तोड़ने के बाद एलकेसी मार्ग पर जसपुर में स्थित नर्सिंग मंदिर को तोड़ने गई टीम को ग्रामीणों के विरोध के चलते बैरंग लौटना पड़ा। लोगों ने मंदिर से पहले ही जाम लगाकर टीम को आगे नहीं बढ़ने दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क से 50 मीटर दूरी पर स्थित मंदिर को तोड़ने का कोई औचित्य नहीं है। प्रशासन सुप्रीम कोर्ट की आड़ में लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रहा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। विरोध जताने वालों में प्रधान संजय पंवार, संतु देवी, बुद्वि देवी, मुन्नी देवी, उषा देवी, विस्वा देवी, शाका देवी, सरोजनी देवी, कमला देवी, राधिका देवी, सीता देवी, विनीता देवी, चंद्रा देवी, राजी देवी,भरत सिंह, कलम सिंह, किशन सिंह, सुंदर नाथ, विपिन, प्रवीन और चंदन सिंह आदि शामिल थे।
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प्रशासन ने बालगंगा तहसील के तहत घनसाली-चमियाला-बूढ़ाकेदार, एलकेसी और घनसाली-टिहरी मोटर मार्ग पर पांच-छह जगहों पर लंबे समय से बनाए गए छोटे-बड़े मंदिरों को चिह्नित कर तोड़ना शुरू कर दिया है। बदरी-केदार समिति के पूर्वं सदस्य और बेलेश्वर धाम मंदिर समिति के अध्यक्ष चंद्र किशोर मैठाणी, सुंदर सिंह कठैत, विशेश्वर प्रसाद और शिवराज सिंह कलूड़ा का कहना है कि लोगों की आस्था के केंद्र बने मंदिरों को नहीं तोड़ा जाना चाहिए जबकि प्रशासन मोटर मार्ग बनने से पहले बनाए गए मंदिरों को भी तोड़ रहा है। इससे लोगों में आक्रोश पनप रहा है।
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उधर प्रतापनगर में भी प्रशासन ने लंबगांव, कोंटालगांव, प्रतापनगर, उत्तरकाशी और टिहरी मोटर मार्गों पर बने मंदिरों को तोड़ना शुरू कर दिया है। क्षेत्र के लोगों ने विधायक और डीएम से मंदिरों को ढहाने पर रोक लगाने की मांग की है। विधायक शक्ति लाल शाह का कहना है कि उत्तरखंड में मठ-मंदिर आस्था के केंद्र हैं, उन्हें नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।
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बालगंगा क्षेत्र में कोर्ट के आदेशानुसार छह मंदिरों को चिह्नित किया गया है। एलकेसी मोटर मार्ग पर केमुंडा खाली के पास देवी मंदिर, तीन पितृ मंदिर, बूढ़ाकेदार मोटर मार्ग पर चंफ्वा देवता मंदिर, सेंदुल गांव के पास दुर्गा देवी मंदिर, घनसाली के पास हनुमान मंदिर के साथ ही अन्य कई मंदिर हैं जो चिह्नित किए गए हैं।-मोहन लाल आर्य, तहसीलदार, बालगंगा
ग्रामीणों के विरोध पर बैरंग लौटी टीम
घनसाली (टिहरी)। चंफ्वा मंदिर तोड़ने के बाद एलकेसी मार्ग पर जसपुर में स्थित नर्सिंग मंदिर को तोड़ने गई टीम को ग्रामीणों के विरोध के चलते बैरंग लौटना पड़ा। लोगों ने मंदिर से पहले ही जाम लगाकर टीम को आगे नहीं बढ़ने दिया।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क से 50 मीटर दूरी पर स्थित मंदिर को तोड़ने का कोई औचित्य नहीं है। प्रशासन सुप्रीम कोर्ट की आड़ में लोगों की धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रहा है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। विरोध जताने वालों में प्रधान संजय पंवार, संतु देवी, बुद्वि देवी, मुन्नी देवी, उषा देवी, विस्वा देवी, शाका देवी, सरोजनी देवी, कमला देवी, राधिका देवी, सीता देवी, विनीता देवी, चंद्रा देवी, राजी देवी,भरत सिंह, कलम सिंह, किशन सिंह, सुंदर नाथ, विपिन, प्रवीन और चंदन सिंह आदि शामिल थे।