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नवजातों की बढ़ती मृत्यु दर पर बाल संरक्षण आयोग ने जतायी चिंता
Updated Fri, 04 May 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/देहरादून।
राज्य में नवजातों की बढ़ती मृत्यु दर पर बाल संरक्षण आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई है। आयोग अध्यक्ष का कहना है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से संचालित तमाम कल्याणकारी योजनाओं के चलते जब देश के तमाम राज्यों में शिशु मृत्यु दर कम हो रही है तो उत्तराखंड में आंकड़ा बढ़ना चिंताजनक है। इसके बाबत आयोग अध्यक्ष ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से मंथन करने को कहा है।
बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी बृहस्पतिवार को विभिन्न विभागों के अफसरों के साथ बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार बेहद गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट बच्चों से जुडे़ मामलों की खुद निगरानी कर रहा है। ऐसे में अधिकारी न्यायालय, केंद्र व राज्य सरकार के आदेशों-निर्देशों के अनुसार बाल कल्याण से संबंधित योजनाओं व कार्यक्रमों पर कार्य करें।
आयोग अध्यक्ष ने कहा कि विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी रिपोर्ट के अनुसार देहरादून जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, सुरक्षा योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो रहा है। दून में 1000 नवजातों के जन्म पर 38 के मृत्यु के आंकड़े चिंताजनक हैं। इसके अलावा आयोग अध्यक्ष ने स्कूली वाहनों में बच्चों को ठूंसकर ले जाने पर कड़ी नाराजगी जतायी। इसके लिए उन्होंने स्कूली वाहनों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने, चालक-परिचालक का सत्यापन कराने, लड़कियाें वाली बसों में महिला सहायकों की अनिवार्य तैनाती के आदेश दिए। आरटीई के तहत नि:शुल्क व अनिवार्य प्रवेश का कड़ाई से पालन करने, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। श्रम विभाग के अफसरोें से भिक्षावृत्ति में संलिप्त बच्चों का पुलिस के माध्यम से सत्यापन कराने, स्वास्थ्य विभाग को पॉक्सो अधिनियम के तहत दुराचार के मामलों में पारिवारिक सदस्यों की उपस्थिति में मेडिकल कराने की हिदायत दी। एकाकी परिवार वाले बच्चों में बढ़ रही मानसिक अस्वस्थता, इंटरनेट अपराध के गिरफ्त में आने व ड्रग्स, आत्महत्या जैसी प्रवृत्ति के लिए अस्पतालों में मनोवैज्ञानिक डॉक्टर की नियुक्ति अनिवार्य करने तथा पुलिस थानों में बच्चों से पूछताछ करने वाले अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। बैठक में बाल संरक्षण आयोग की सदस्य शारदा त्रिपाठी, सीमा डोरा, डीएम एसए मुरूगेशन, एसएसपी निवेदिता कुकरेती, सीएमओ वाईएस थपलियाल, आरटीओ सुधांशु गर्ग समेत तमाम विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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अफसरों की अनुपस्थिति पर जताई नाराजगी
बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी ने बैठक में आरटीओ की जगह एआरटीओ व सीएमओ की जगह डिप्टी सीएमओ की उपस्थिति पर कड़ी नाराजगी जतायी। उन्होंने कहा कि जब डीएम, एसएसपी उपस्थित हैं तो इन विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी क्यों नहीं है? इस बात से उन्होंने तत्काल स्वास्थ्य महानिदेशक को अवगत कराया तो सीएमओ बैठक में पहुंचे और थोड़ी देर बाद आरटीओ भी शामिल हुए।
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राज्य में नवजातों की बढ़ती मृत्यु दर पर बाल संरक्षण आयोग ने कड़ी नाराजगी जताई है। आयोग अध्यक्ष का कहना है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से संचालित तमाम कल्याणकारी योजनाओं के चलते जब देश के तमाम राज्यों में शिशु मृत्यु दर कम हो रही है तो उत्तराखंड में आंकड़ा बढ़ना चिंताजनक है। इसके बाबत आयोग अध्यक्ष ने स्वास्थ्य विभाग के अफसरों से मंथन करने को कहा है।
बाल संरक्षण आयोग अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी बृहस्पतिवार को विभिन्न विभागों के अफसरों के साथ बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार बेहद गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट बच्चों से जुडे़ मामलों की खुद निगरानी कर रहा है। ऐसे में अधिकारी न्यायालय, केंद्र व राज्य सरकार के आदेशों-निर्देशों के अनुसार बाल कल्याण से संबंधित योजनाओं व कार्यक्रमों पर कार्य करें।
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आयोग अध्यक्ष ने कहा कि विभिन्न सरकारी और गैर सरकारी रिपोर्ट के अनुसार देहरादून जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, सुरक्षा योजनाओं का क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो रहा है। दून में 1000 नवजातों के जन्म पर 38 के मृत्यु के आंकड़े चिंताजनक हैं। इसके अलावा आयोग अध्यक्ष ने स्कूली वाहनों में बच्चों को ठूंसकर ले जाने पर कड़ी नाराजगी जतायी। इसके लिए उन्होंने स्कूली वाहनों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने, चालक-परिचालक का सत्यापन कराने, लड़कियाें वाली बसों में महिला सहायकों की अनिवार्य तैनाती के आदेश दिए। आरटीई के तहत नि:शुल्क व अनिवार्य प्रवेश का कड़ाई से पालन करने, बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। श्रम विभाग के अफसरोें से भिक्षावृत्ति में संलिप्त बच्चों का पुलिस के माध्यम से सत्यापन कराने, स्वास्थ्य विभाग को पॉक्सो अधिनियम के तहत दुराचार के मामलों में पारिवारिक सदस्यों की उपस्थिति में मेडिकल कराने की हिदायत दी। एकाकी परिवार वाले बच्चों में बढ़ रही मानसिक अस्वस्थता, इंटरनेट अपराध के गिरफ्त में आने व ड्रग्स, आत्महत्या जैसी प्रवृत्ति के लिए अस्पतालों में मनोवैज्ञानिक डॉक्टर की नियुक्ति अनिवार्य करने तथा पुलिस थानों में बच्चों से पूछताछ करने वाले अधिकारियों को विशेष प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए। बैठक में बाल संरक्षण आयोग की सदस्य शारदा त्रिपाठी, सीमा डोरा, डीएम एसए मुरूगेशन, एसएसपी निवेदिता कुकरेती, सीएमओ वाईएस थपलियाल, आरटीओ सुधांशु गर्ग समेत तमाम विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
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अफसरों की अनुपस्थिति पर जताई नाराजगी
बाल संरक्षण आयोग के अध्यक्ष योगेंद्र खंडूड़ी ने बैठक में आरटीओ की जगह एआरटीओ व सीएमओ की जगह डिप्टी सीएमओ की उपस्थिति पर कड़ी नाराजगी जतायी। उन्होंने कहा कि जब डीएम, एसएसपी उपस्थित हैं तो इन विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी क्यों नहीं है? इस बात से उन्होंने तत्काल स्वास्थ्य महानिदेशक को अवगत कराया तो सीएमओ बैठक में पहुंचे और थोड़ी देर बाद आरटीओ भी शामिल हुए।