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गुलदार की खाल को लेकर दो बड़े अफसर आमने-सामने

Wed, 04 Apr 2018 02:08 AM IST
Updated Wed, 04 Apr 2018 02:08 AM IST
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गुलदार की खाल को लेकर दो बड़े अफसर आमने-सामने
ब्यूरो /अमर उजाला/देहरादून।
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बंदर के बच्चे और गुलदार की पुरानी खाल को लेकर वन विभाग के दो बड़े अफसर आमने-सामने हैं। इससे विभाग में असहजता की स्थिति बन गयी है।
हरिद्वार वन प्रभाग की दुधिया ब्लॉक में बीते दिनों वन विभाग की ओर से गुलदार की पुरानी खाल, कुछ मांस और हड्डियां बरामद की गई थीं। इस प्रकरण में विभाग की ओर से हाल में रायवाला से एक व्यक्ति को पकड़ा गया है। पूछताछ में उसने जांच अधिकारी से जो कुछ कहा उससे लगता है कि विभाग में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने विभाग के कुछ लोगों के नाम बताए हैं। इसके बाद विभाग के एक बड़े अधिकारी के खेमे के अधिकारी इस मामले को साजिश बता रहे हैं। इनका कहना है कि उस क्षेत्र में टाइगर ट्रांसलोकेट से रोकने और उन्हें बदनाम करने के लिए एक साजिश के तहत वन्यजीव अंगों की बरामदगी की कार्रवाई हुई है। गुलदार को हड्डी और उसकी खाल के लिए मारा जाता है ऐसे में उसकी हड्डी व खाल दबाई जानी थी तो उसे मारा क्यों? वहीं दूसरी ओर प्रकरण में साजिश की बात आयी तो प्रमुख वन संरक्षक जयराज ने इसकी जांच के लिए मुख्य वन संरक्षक रंजन मिश्रा को अलग से जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साजिश की जांच के निर्देश दिए तो दूसरे पक्ष ने इस प्रकरण को सब ज्यूडिशियल बताते हुए इसकी अलग से जांच कराए जाने के औचित्य पर सवाल उठाया है।
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पहले भी हो चुकी है तकरार
ये दोनों अधिकारी बंदर के बच्चे को लेकर पहले भी आमने-सामने आ चुके हैं। प्रमुख वन संरक्षक जयराज एक बंदर के बच्चे का स्वास्थ्य ठीक न होने पर उसे अपने घर ले गए थे। उन्होंने प्रकरण में प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव डॉ. डीबीएस खाती से इसे कुछ दिन पालने की अनुमति मांगी थी, लेकिन उन्होंने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया था।
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गुलदार की खाल के मामले में यदि साजिश हो रही है तो इसकी भी जांच होगी। मैंने मुख्य वन संरक्षक रंजन मिश्रा को इसकी अलग से जांच के आदेश दे दिए हैं। आरोपी को पकड़कर पिटाई के बल पर उससे कुछ भी बुलवाया जा सकता है।

-जयराज प्रमुख वन संरक्षक
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वन्यजीव अंगों की बरामदगी मामले में कुछ विभागीय अधिकारियों की साजिश हो या फिर कोई अन्य मामला इन सभी पक्षों को ध्यान में रखकर जांच चल रही है। अभी कुछ तथ्य आए हैं, जिसे ओपन नहीं किया जा सकता।
-डॉ. डीबीएस खाती, प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव
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