{"_id":"5abd4f984f1c1bbe618b46f6","slug":"201522356120-dehradun-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीबीएसई स्कूलों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीबीएसई स्कूलों ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
Updated Fri, 30 Mar 2018 02:12 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
केवल एनसीईआरटी किताबें पढ़ाने जैसे चार सरकारी आदेशों के खिलाफ प्रदेश के सीबीएसई स्कूल संचालकों ने बृहस्पतिवार को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ‘शिक्षा बचाओ-देश बचाओ’ की नारेबाजी के बीच स्कूल संचालकों ने गांधी पार्क में राज्य सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान स्कूल संचालकों ने मांगे नहीं मानने तक अनिश्चितकालीन स्कूल बंद करने की चेतावनी दोहराई। उन्होंने कहा कि दो अप्रैल से किसी भी सीबीएसई स्कूल में शिक्षण कार्य शुरू नहीं किया जाएगा।
प्रदेश सरकार ने हाल ही में आदेश जारी किया है कि निजी सीबीएसई स्कूलों में नए सत्र से केवल एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जाएंगी। अगर कोई स्कूल प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें पढ़ाता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ एनओसी रद्द करने तक की कार्रवाई की जाएगी। बृहस्पतिवार को सरकार के इस आदेश के खिलाफ न केवल दून, बल्कि प्रदेशभर के सीबीएसई स्कूल संचालकों ने धरना दिया। उन्होंने गांधी पार्क के सामने प्रदर्शन किया। 200 से अधिक स्कूल संचालकों ने पार्क के गेट पर बैठक कर तय किया कि जब तक सरकार फैसला नहीं बदलती, स्कूलों में दो अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र में शिक्षण कार्य शुरू नहीं करेंगे। प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन (पीपीएसए) के अध्यक्ष प्रेम कश्यप नेे कहा कि केवल एनसीईआरटी की अनिवार्यता, आरटीई दाखिले के लंबित पैसे, निजी स्कूलों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली, स्कूल एक्ट को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है।
प्रदर्शन करने पहुंचे अनेक वक्ताओं ने सरकार की एनसीईआरटी किताबों की खस्ता हालात बताई। उन्होंने कहा कि जहां, बच्चाें को निजी किताबों मेें अधिकतर अभ्यास प्रश्न पढ़ाए जाते हैं, वहीं एनसीईआरटी में केवल गिने-चुने प्रश्नोें की संख्या होती है। जिससे बच्चा पास तो हो जाता है, लेकिन उसकी तैयारी पुख्ता नहीं हो पाती। निजी स्कूल संचालकों ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर वार करते हुए सरकार की शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाया। उसके बाद प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन के नेतृत्व में स्कूल संचालकों ने जिलाधिकारी कार्यालय जाकर डीएम एसए मुरुगेशन के माध्यम से सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय को ज्ञापन भेजा। धरने में कोलंबस स्कूल, ऊधमसिंह नगर के निदेशक मनोज खेरा, स्कॉलर्स होम स्कूल की प्रिंसिपल छाया खन्ना, एचएस मान, सोमदत्त त्यागी, डॉ.एससी ब्याला, समर जीत सिंह, नीलम शर्मा सहित बड़ी संख्या में स्कूल संचालक शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
केवल एनसीईआरटी किताबें पढ़ाने जैसे चार सरकारी आदेशों के खिलाफ प्रदेश के सीबीएसई स्कूल संचालकों ने बृहस्पतिवार को सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ‘शिक्षा बचाओ-देश बचाओ’ की नारेबाजी के बीच स्कूल संचालकों ने गांधी पार्क में राज्य सरकार के खिलाफ धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान स्कूल संचालकों ने मांगे नहीं मानने तक अनिश्चितकालीन स्कूल बंद करने की चेतावनी दोहराई। उन्होंने कहा कि दो अप्रैल से किसी भी सीबीएसई स्कूल में शिक्षण कार्य शुरू नहीं किया जाएगा।
प्रदेश सरकार ने हाल ही में आदेश जारी किया है कि निजी सीबीएसई स्कूलों में नए सत्र से केवल एनसीईआरटी की किताबें ही पढ़ाई जाएंगी। अगर कोई स्कूल प्राइवेट प्रकाशकों की किताबें पढ़ाता हुआ पाया गया तो उसके खिलाफ एनओसी रद्द करने तक की कार्रवाई की जाएगी। बृहस्पतिवार को सरकार के इस आदेश के खिलाफ न केवल दून, बल्कि प्रदेशभर के सीबीएसई स्कूल संचालकों ने धरना दिया। उन्होंने गांधी पार्क के सामने प्रदर्शन किया। 200 से अधिक स्कूल संचालकों ने पार्क के गेट पर बैठक कर तय किया कि जब तक सरकार फैसला नहीं बदलती, स्कूलों में दो अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र में शिक्षण कार्य शुरू नहीं करेंगे। प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन (पीपीएसए) के अध्यक्ष प्रेम कश्यप नेे कहा कि केवल एनसीईआरटी की अनिवार्यता, आरटीई दाखिले के लंबित पैसे, निजी स्कूलों की स्वतंत्र कार्यप्रणाली, स्कूल एक्ट को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया है।
विज्ञापन
प्रदर्शन करने पहुंचे अनेक वक्ताओं ने सरकार की एनसीईआरटी किताबों की खस्ता हालात बताई। उन्होंने कहा कि जहां, बच्चाें को निजी किताबों मेें अधिकतर अभ्यास प्रश्न पढ़ाए जाते हैं, वहीं एनसीईआरटी में केवल गिने-चुने प्रश्नोें की संख्या होती है। जिससे बच्चा पास तो हो जाता है, लेकिन उसकी तैयारी पुख्ता नहीं हो पाती। निजी स्कूल संचालकों ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर वार करते हुए सरकार की शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाया। उसके बाद प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल एसोसिएशन के नेतृत्व में स्कूल संचालकों ने जिलाधिकारी कार्यालय जाकर डीएम एसए मुरुगेशन के माध्यम से सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय को ज्ञापन भेजा। धरने में कोलंबस स्कूल, ऊधमसिंह नगर के निदेशक मनोज खेरा, स्कॉलर्स होम स्कूल की प्रिंसिपल छाया खन्ना, एचएस मान, सोमदत्त त्यागी, डॉ.एससी ब्याला, समर जीत सिंह, नीलम शर्मा सहित बड़ी संख्या में स्कूल संचालक शामिल रहे।
विज्ञापन